अब दूध विक्री पर एफडीए की ‘वक्रदृष्टि’

दूध में मिलावट के खिलाफ ‘सेव फूड-सेव ड्रग’ अभियान

* पत्रवार्ता में एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे ने दी जानकारी
मुंबई/दि.3- राज्य के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) आयुक्त तुकाराम मुंढे ने अब दूध और दुग्धजन्य उत्पादों में मिलावट के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए राज्यव्यापी ‘सेव फूड-सेव ड्रग’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है. इसके तहत दूध उत्पादन से लेकर उपभोक्ता की थाली तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला (फार्म टू प्लेट) के लिए नई नियमावली जारी की गई है. मुंबई में आयोजित पत्रकार परिषद में मुंढे ने कहा कि दूध आम नागरिकों के भोजन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए इसकी गुणवत्ता और शुद्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है. उन्होंने बताया कि दूध उत्पादकों, पैकर्स, परिवहनकर्ताओं और विक्रेताओं सहित पूरी डेयरी व्यवस्था के लिए आठ प्रकार के अनिवार्य नियम लागू किए गए हैं.
* संकलन से बिक्री तक सभी चरणों पर निगरानी
पत्रवार्ता में एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक नई व्यवस्था के तहत दूध संकलन केंद्र, चिलिंग सेंटर, थोक और खुदरा विक्रेता, पनीर, खोया, मक्खन, क्रीम, चीज और आइसक्रीम निर्माताओं एवं विक्रेताओं को खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा. दूध के संग्रहण, शीतकरण, पैकेजिंग, भंडारण, परिवहन और बिक्री के प्रत्येक चरण पर प्रशासन की निगरानी रहेगी. मुंढे ने स्पष्ट कहा कि अभियान का उद्देश्य केवल मिलावट रोकना नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य की सुरक्षा, ईमानदार व्यवसायों को प्रोत्साहन और खाद्य सुरक्षा की मजबूत संस्कृति विकसित करना है.
* फर्जी प्रमाणपत्र वालों पर भी कार्रवाई
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंंढे ने पत्रवार्ता में बताया कि होटल एवं रेस्टोरेंट क्षेत्र में चलाए गए अभियान के दौरान कई प्रतिष्ठानों ने नियमों का पालन किया, लेकिन कुछ जगहों पर कीट नियंत्रण (पेस्ट कंट्रोल) के फर्जी प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए गए. जांच में गड़बड़ी मिलने पर ऐसे प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई शुरू की गई है. उन्होंने चेतावनी दी कि केवल कागजी प्रमाणपत्र दिखाने से काम नहीं चलेगा. नियमों का वास्तविक पालन नहीं करने वालों के खिलाफ सीधे लाइसेंस निरस्तीकरण जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी.
* निरीक्षण में सामने आईं गंभीर अनियमितताएं
एफडीए की जांच और नमूना परीक्षणों में दूध आपूर्ति श्रृंखला में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं. इनमें प्रमुख रूप से दूध में पानी मिलाना, कृत्रिम (सिंथेटिक) दूध का निर्माण और बिक्री, यूरिया, डिटर्जेंट, कॉस्टिक सोडा, स्टार्च, ग्लूकोज और मेलामाइन जैसे रसायनों का उपयोग, मिल्क फैट और एसएनएफ मानकों का उल्लंघन, कोल्ड चेन व्यवस्था का पालन न करना, बिना लाइसेंस या पंजीकरण के कारोबार, गलत लेबलिंग और उपभोक्ताओं को भ्रमित करना आदि का समावेश है.
* जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं
पत्रवार्ता में एफडीए आयुक्त मुंढे ने कहा कि दूध और दुग्ध उत्पादों में मिलावट सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है. इसलिए पूरे राज्य में सख्त निरीक्षण अभियान चलाया जाएगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने दूध व्यवसाय से जुड़े सभी हितधारकों से नई नियमावली का पालन करने और उपभोक्ताओं को सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराने की अपील की.

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