मंत्री व अधिकारियों की गैरहाजिरी पर भडके विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर
सरकार को दी कडी चेतावनी, कहा- आगे ऐसा हुआ तो सदन का कामकाज रोक देंगे

मुंबई./दि.9 – महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में बुधवार को उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब विपक्ष द्वारा उठाए गए महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में संबंधित मंत्री और अधिकारियों की अनुपस्थिति का मुद्दा सामने आया. इस पर विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कड़ा रुख अपनाते हुए सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि भविष्य में मंत्री और अधिकारी सदन में उपस्थित नहीं रहे, तो विधानसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी जाएगी.
विधानसभा नियम 293 के अंतर्गत विपक्ष द्वारा लाए गए प्रस्ताव पर चर्चा चल रही थी. इसी दौरान कांग्रेस विधायक विजय वडेट्टीवार और नाना पटोले ने अध्यक्षीय पीठ का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि सदन में संबंधित मंत्री मौजूद नहीं हैं और अधिकारियों के लिए निर्धारित गैलरी भी लगभग खाली है. विपक्ष ने इसे विधानसभा और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान बताते हुए तीव्र नाराजगी व्यक्त की. इस समय कांग्रेस के विधान मंडल नेता विजय वडेट्टीवार ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि मंत्री और अधिकारी विपक्ष की बात सुनने के लिए सदन में उपस्थित नहीं रह सकते, तो फिर विधानसभा सत्र आयोजित करने का औचित्य क्या है. उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि यदि चर्चा को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है, तो अधिवेशन सड़क पर ही आयोजित कर लिया जाए.
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने तुरंत हस्तक्षेप किया और मुख्य सचिव को अगले आधे घंटे के भीतर अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने स्पष्ट कहा कि सदन की कार्यवाही सर्वोच्च प्राथमिकता है और मंत्री व अधिकारियों की अनुपस्थिति किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी. इस दौरान भाजपा विधायक रणधीर सावरकर ने भी अधिकारियों की गैरहाजिरी पर आपत्ति जताते हुए सदन स्थगित करने की मांग की. वहीं, सदन में मौजूद मंत्री राधाकृष्ण विखे-पाटील ने कहा कि अधिकारियों को उपस्थित रहने के संबंध में मुख्य सचिव स्तर पर निर्देश जारी किए जाएंगे.
हालांकि संसदीय कार्य मंत्री चंद्रकांत पाटील ने सफाई देते हुए कहा कि कई वरिष्ठ अधिकारी और मंत्री महत्वपूर्ण बैठकों तथा मंत्रिमंडल की बैठक में व्यस्त थे, इसलिए वे सदन में उपस्थित नहीं हो सके. लेकिन यह स्पष्टीकरण अध्यक्ष को संतुष्ट नहीं कर सका. अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कड़े शब्दों में कहा कि विधानसभा की कार्यवाही से अधिक महत्वपूर्ण कोई बैठक नहीं हो सकती. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि राज्य में 110 से अधिक सचिव स्तर के अधिकारी हैं, तो उनमें से कम से कम कुछ अधिकारी सदन की कार्यवाही के दौरान उपस्थित क्यों नहीं रह सकते.
अध्यक्ष नार्वेकर की इस सख्त टिप्पणी के बाद सदन में मौजूद मंत्रियों और अधिकारियों में हलचल देखी गई. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधानसभा अध्यक्ष की यह चेतावनी सरकार और प्रशासनिक अधिकारियों के लिए स्पष्ट संदेश है कि सदन की कार्यवाही को हल्के में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी. विधानसभा के इतिहास में कम ही ऐसे अवसर आते हैं जब अध्यक्ष को सरकार को इस प्रकार सार्वजनिक रूप से फटकार लगानी पड़े. इस घटनाक्रम ने एक बार फिर जनप्रतिनिधियों के प्रति प्रशासनिक जवाबदेही और सदन की गरिमा के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है.