नागपुर आरटीओ महाघोटाले के तार अमरावती तक!

500 ‘ब्लैक लिस्टेड’ ट्रक अब भी सड़कों पर!

* दो साल पहले मुंबई पुलिस ने खोली थी फर्जीवाड़े की परतें
* अमरावती आरटीओ से दो अधिकारी सस्पेंड होकर पहुंचे थे जेल
अमरावती/मुंबई/दि.9- नागपुर आरटीओ में सामने आए कथित महाघोटाले ने अब पूरे विदर्भ में सनसनी फैला दी है. विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार द्वारा भ्रष्टाचार, अवैध वसूली, चोरी के वाहनों के फर्जी पंजीकरण और संगठित रैकेट के आरोप लगाए जाने के बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. वहीं परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने एसआईटी गठित कर पूरे मामले की जांच शुरू करने की घोषणा की है. लेकिन इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल अमरावती को लेकर उठ रहा है. परिवहन क्षेत्र से जुड़े जानकारों और सूत्रों का दावा है कि नागपुर में उजागर हुए फर्जी ट्रक पंजीकरण नेटवर्क के तार अमरावती तक भी जुड़े हो सकते हैं और आज भी जिले में बड़ी संख्या में संदिग्ध पासिंग वाले ट्रक संचालित हो रहे हैं.
* दो साल पहले मुंबई पुलिस ने किया था बड़ा खुलासा
जानकारी के अनुसार करीब दो वर्ष पूर्व मुंबई पुलिस ने चोरी के ट्रकों के फर्जी पंजीकरण और बोगस एनओसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया था. उस समय मुंबई पुलिस की एक विशेष टीम अमरावती भी पहुंची थी. टीम ने कई ट्रक मालिकों और संबंधित लोगों को बुलाकर पूछताछ की थी तथा उनके बयान दर्ज किए थे. उस दौरान परिवहन विभाग और ट्रांसपोर्ट कारोबार में भारी हलचल मच गई थी. हालांकि शुरुआती कार्रवाई और चर्चाओं के बाद यह मामला धीरे-धीरे ठंडे बस्ते में चला गया. नतीजा यह हुआ कि जिन वाहनों की वैधता पर सवाल उठे थे, उनमें से अनेक ट्रक आज भी सड़कों पर दौड़ रहे हैं.
* 500 ट्रकों की अवैध पासिंग की आशंका
परिवहन क्षेत्र से जुड़े सूत्रों का दावा है कि अमरावती शहर और जिले में आज भी लगभग 400 से 500 ट्रक ऐसे हो सकते हैं जिनकी पासिंग और दस्तावेजों की जांच आवश्यक है. हालांकि इस संख्या की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लंबे समय से ट्रांसपोर्ट जगत में इस संबंध में चर्चाएं होती रही हैं. बताया जाता है कि चोरी किए गए ट्रकों की पहचान मिटाने के लिए उनके चेसिस नंबरों में फेरबदल किया जाता था. इसके बाद नागालैंड, असम, ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में फर्जी अथवा डुप्लीकेट दस्तावेज तैयार कराए जाते थे. बाद में इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर वाहनों को वैध दिखाते हुए एनओसी प्राप्त की जाती थी और अन्य राज्यों में उनका पुनः पंजीकरण कराया जाता था.
* फर्जी एनओसी और बोगस पासिंग का खेल
सूत्रों के मुताबिक इस कथित नेटवर्क में चोरी के ट्रकों की चेसिस प्लेट बदलकर उन्हें नई पहचान दी जाती थी. इसके बाद संबंधित राज्यों से तैयार किए गए दस्तावेजों के आधार पर वाहन अमरावती और नागपुर जैसे आरटीओ कार्यालयों तक पहुंचते थे, जहां कथित तौर पर फर्जी कागजातों के जरिए एनओसी और पासिंग की प्रक्रिया पूरी कराई जाती थी. इसी कारण अनेक ऐसे वाहन वर्षों तक वैध ट्रकों के रूप में सड़कों पर चलते रहे, जबकि उनकी वास्तविक पहचान और स्वामित्व संदिग्ध था.
* अमरावती आरटीओ के अधिकारी भी आए थे जांच के घेरे में
इस कथित फर्जीवाड़े के दौरान अमरावती आरटीओ के दो अधिकारियों पर भी कार्रवाई हुई थी. सूत्रों के अनुसार दोनों अधिकारियों को निलंबित किया गया था और उन्हें जेल भी जाना पड़ा था. हालांकि इसके बावजूद पूरे नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने वाली व्यापक कार्रवाई नहीं हो सकी. यही कारण है कि अब जब नागपुर आरटीओ घोटाला फिर से सुर्खियों में आया है, तब पुराने मामलों की फाइलें भी चर्चा में आ गई हैं.
* नागपुर में 1,587 संदिग्ध ट्रकों का खुलासा, 223 का पंजीकरण रद्द
नागपुर में सामने आए मामले में अब तक 1,587 संदिग्ध ट्रकों की पहचान की जा चुकी है. इनमें से 495 वाहनों के खिलाफ कार्रवाई हुई है और 223 ट्रकों का पंजीकरण रद्द किया जा चुका है. जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था और इसके तार परिवहन विभाग के विभिन्न स्तरों तक पहुंच सकते हैं.
* बड़ा सवाल – यदि फर्जी हैं तो सड़कों पर क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि वर्षों पहले फर्जी दस्तावेजों और संदिग्ध पंजीकरणों को लेकर जांच शुरू हुई थी, तो फिर ऐसे वाहन आज भी सड़कों पर कैसे दौड़ रहे हैं? यदि जांच एजेंसियों के पास जानकारी थी, तो इन वाहनों को जब्त कर उनकी वैधता की पुनः जांच क्यों नहीं की गई? स्थानीय ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि एसआईटी जांच यदि निष्पक्ष और व्यापक हुई तो अमरावती सहित विदर्भ के कई जिलों से जुड़े चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं.
* एसआईटी जांच से खुल सकते हैं कई राज
मुख्यमंत्री द्वारा उच्चस्तरीय जांच और एसआईटी गठन की घोषणा के बाद अब पूरे विदर्भ की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं. परिवहन विभाग, आरटीओ कार्यालयों, दलालों और ट्रक पंजीकरण नेटवर्क से जुड़े कई पुराने मामलों की भी जांच होने की संभावना व्यक्त की जा रही है. यदि जांच एजेंसियां अमरावती में वर्षों से संचालित कथित फर्जी एनओसी, बोगस पासिंग और संदिग्ध ट्रकों के मामलों की गहराई से पड़ताल करती हैं, तो यह महाराष्ट्र के परिवहन इतिहास के सबसे बड़े घोटालों में से एक साबित हो सकता है.

 

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