अमरावती मनपा के सफाई ठेके का मामला गूंजा विधान परिषद में

विधायक संजय खोडके व धीरज लिंगाडे ने उठाया ‘कोणार्क’ को दिए गए ठेके में गडबडी का मुद्दा

* मंत्री उदय सामंत ने 90 दिन में विभागीय जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई का दिया आश्वासन
अमरावती/दि.11– अमरावती महानगरपालिका के बहुचर्चित कोणार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर घनकचरा प्रबंधन एवं सफाई ठेका मामले ने अब राज्य स्तर पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है. विधान परिषद में विधायक धीरज लिंगाडे और विधायक संजय खोडके ने इस मामले को जोरदार ढंग से उठाते हुए ठेका प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, नियमों के उल्लंघन तथा करोड़ों रुपये के आर्थिक नुकसान का आरोप लगाया. मामले की गंभीरता को देखते हुए उद्योग मंत्री उदय सामंत ने 90 दिनों के भीतर विभागीय आयुक्त स्तर पर जांच कराने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों पर कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया.
* 350 करोड़ के ठेके पर उठे सवाल
विधान परिषद में चर्चा के दौरान विधायकों ने आरोप लगाया कि अमरावती महानगरपालिका के प्रशासकीय कार्यकाल में शहर की सफाई और घनकचरा प्रबंधन के लिए कोणार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को दिया गया ठेका शुरुआत से ही विवादों में रहा है. उन्होंने कहा कि निविदा की मूल शर्तों और बाद में किए गए करारनामे में भारी अंतर दिखाई देता है, जिससे कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाया गया. विधायक धीरज लिंगाडे ने कहा कि यह मामला केवल एक ठेके का नहीं, बल्कि शहर के आठ से दस लाख नागरिकों के स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ा हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि ठेका मिलने के बाद भी कंपनी ने निविदा की कई शर्तों का पालन नहीं किया, जिसके कारण शहर में सफाई व्यवस्था चरमरा गई और नागरिकों की शिकायतें लगातार बढ़ती गईं.
* ‘पार्ट-बी’ का काम बिना मंजूरी शुरू होने का आरोप
चर्चा के दौरान यह मुद्दा भी उठाया गया कि घनकचरा प्रबंधन कार्य को दो हिस्सों-‘पार्ट-ए’ और ‘पार्ट-बी’-में विभाजित किया गया था. आरोप है कि ‘पार्ट-बी’ का कार्य औपचारिक रूप से स्वीकृत नहीं होने के बावजूद कंपनी ने उसका काम शुरू कर दिया. इतना ही नहीं, कंपनी को कामकाज में कई प्रकार की प्रशासनिक छूट भी प्रदान की गईं.
* नई गाड़ियों की शर्त, लेकिन इस्तेमाल पुरानी गाड़ियों का
विधायक संजय खोडके ने आरोप लगाया कि निविदा में नई गाड़ियां और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने की स्पष्ट शर्त थी, लेकिन कंपनी पुराने वाहनों के सहारे ही काम करती रही. उन्होंने कहा कि जब ठेका शुरू हुआ तब कंपनी के पास पर्याप्त वाहन और आवश्यक यंत्रसामग्री भी उपलब्ध नहीं थी, इसके बावजूद प्रशासन ने नियमों को दरकिनार कर उसे अतिरिक्त समय और सुविधाएं प्रदान कीं.
* चार महीने में ही दे दी गई 5 प्रतिशत बढ़ोतरी
मामले का सबसे गंभीर पहलू आर्थिक अनियमितता को बताया जा रहा है. विधायकों के अनुसार अनुबंध में एक वर्ष पूर्ण होने के बाद पांच प्रतिशत दरवृद्धि का प्रावधान था, लेकिन नवंबर 2025 में शुरू हुए ठेके में अप्रैल 2026 में ही पांच प्रतिशत वृद्धि दे दी गई. इससे महानगरपालिका पर करोड़ों रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा. विपक्षी सदस्यों ने सवाल उठाया कि आखिर इतनी जल्दबाजी में दरवृद्धि का लाभ क्यों दिया गया.
* अध्ययन समिति की रिपोर्ट भी हुई नजरअंदाज
दोनों विधायकों ने विधान परिषद में अपनी बात रखते हुए बताया कि, नगरसेवकों के लगातार विरोध और आमसभा में हुए हंगामे के बाद इस मामले की जांच के लिए एक अध्ययन समिति गठित की गई थी. समिति ने ठेका प्रक्रिया और कार्यप्रणाली में कई कमियां उजागर करते हुए सुधारात्मक सुझाव दिए थे, लेकिन आरोप है कि प्रशासन ने उन सुझावों पर कोई कार्रवाई नहीं की.
* मंत्री उदय सामंत ने मानी अनियमितताओं की बात
विधान परिषद में जवाब देते हुए मंत्री उदय सामंत ने स्वीकार किया कि निविदा प्रक्रिया और करारनामे में कुछ विसंगतियां सामने आई हैं. उन्होंने यह भी माना कि स्थायी समिति ने इस ठेके पर आपत्तियां दर्ज की थीं तथा कुछ निर्णय समिति की मंजूरी के बिना लिए गए थे. सामंत ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच विभागीय आयुक्त के माध्यम से कराई जाएगी और 90 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्राप्त कर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी.

* महापौर और जनप्रतिनिधियों ने किया जांच का स्वागत
अमरावती के महापौर श्रीचंद तेजवानी ने कहा कि यदि सफाई ठेके में किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है. शहर की स्वच्छता और नागरिकों की शिकायतों का समाधान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है. स्थायी समिति के सभापति अविनाश मार्डीकर ने कहा कि उन्होंने पहले ही इस ठेके को लेकर 31 महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए थे और अध्ययन समिति की रिपोर्ट भी प्रस्तुत की थी. अब जांच के आदेश से प्रशासनिक कार्यप्रणाली का वास्तविक स्वरूप सामने आएगा. वहीं सभागृह नेता चेतन गावंडे ने राज्य सरकार के निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि यह मामला जनधन के उपयोग से जुड़ा है. ठेका प्रक्रिया और करारनामे में मौजूद त्रुटियों की गहन जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए.
* जांच रिपोर्ट पर टिकी शहरवासियों की नजर
कोणार्क सफाई ठेका मामले में विधान परिषद में हुई तीखी बहस और सरकार द्वारा विभागीय जांच के आदेश के बाद अब अमरावती की जनता की निगाहें आगामी 90 दिनों पर टिक गई हैं. जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो प्रशासनिक स्तर पर बड़ी कार्रवाई होने की संभावना जताई जा रही है. यह मामला आने वाले दिनों में अमरावती की राजनीति और महानगरपालिका प्रशासन दोनों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है.

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