विदर्भ में बारिश की लंबी बेरुखी, 40 प्रतिशत खेत अब भी प्यासे

बुआई की रफ्तार थमी, किसानों की बढ़ी चिंता

* बारिश नहीं हुई तो पहली बुआई भी पड़ सकती है दोबारा करनी
अमरावती /दि.13– महाराष्ट्र में जुलाई के पहले सप्ताह में हुई अच्छी बारिश के बाद खरीफ बुआई को गति मिली थी, लेकिन अब फिर से मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से विशेषकर विदर्भ क्षेत्र के किसानों की चिंता बढ़ गई है. बारिश की कमी के कारण पूर्व और पश्चिम विदर्भ के अनेक इलाकों में बुआई कार्य प्रभावित हुआ है. कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार विदर्भ में अब तक केवल लगभग 60 प्रतिशत क्षेत्र में ही बुआई हो सकी है, जबकि करीब 40 प्रतिशत कृषि क्षेत्र अभी भी पर्याप्त वर्षा की प्रतीक्षा कर रहा है. यदि आगामी दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो पहले चरण में की गई बुआई भी खराब होने और किसानों को दोबारा बुआई करने की नौबत आने की आशंका व्यक्त की जा रही है.
* राज्य में 59 प्रतिशत क्षेत्र में बुआई, लेकिन विदर्भ की चिंता बरकरार
राज्यभर में जुलाई के पहले सप्ताह में हुई बारिश से खरीफ बुआई का प्रतिशत तेजी से बढ़ा है. रविवार तक महाराष्ट्र में लगभग 84 लाख 61 हजार 69 हेक्टेयर क्षेत्र, यानी करीब 59 प्रतिशत क्षेत्र में बुआई पूरी हो चुकी है. हालांकि यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में काफी कम है. गत वर्ष इसी अवधि में राज्य के लगभग 82 प्रतिशत क्षेत्र में बुआई हो चुकी थी. सबसे अधिक बुआई अमरावती संभाग में दर्ज की गई है, जबकि कोकण, पुणे और कोल्हापुर संभाग अभी भी पिछड़े हुए हैं.
* बुआई में अमरावती संभाग सबसे आगे
विभिन्न संभागों में बुआई की स्थिति को लेकर कृषि विभाग की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक अमरावती संभाग में 76 प्रतिशत, छत्रपति संभाजीनगर संभाग में 65 प्रतिशत, इलातूर संभाग में 63 प्रतिशत, नाशिक संभाग में 56 प्रतिशत व नागपुर संभाग में 53 प्रतिशत बुआई पूरी हो चुकी ह््ै हालांकि अमरावती संभाग राज्य में अग्रणी दिखाई दे रहा है, लेकिन यहां भी किसानों की निगाहें अब आगामी बारिश पर टिकी हुई हैं.
* नागपुर संभाग में केवल 52 प्रतिशत बुआई
पूर्व विदर्भ यानी नागपुर संभाग में स्थिति अपेक्षाकृत अधिक चिंताजनक है. यहां लगभग 19 लाख 13 हजार 740 हेक्टेयर बुआई योग्य क्षेत्र है, जिसमें अब तक केवल 9 लाख 99 हजार 393 हेक्टेयर (52 प्रतिशत) क्षेत्र में बुआई हो पाई है. नागपुर संभाग में कपास की 5 लाख 45 हजार 763 हेक्टेयर, सोयाबीन की 1 लाख 98 हजार 755 हेक्टेयर, तुअर की 1 लाख 22 हजार 280 हेक्टेयर तथा धान की 1 लाख 28 हजार 475 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई होने की जानकारी है. पूर्वी विदर्भ क्षेत्र में पर्याप्त वर्षा नहीं होने से बड़ी संख्या में किसान अभी भी खेतों में बीज डालने का इंतजार कर रहे हैं.
* अमरावती संभाग में 76.67 प्रतिशत बुआई
अमरावती संभाग में कुल 24 लाख 30 हजार 784 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई पूरी हुई है, जो कुल लक्ष्य का लगभग 76.67 प्रतिशत है. अमरावती संभाग में मुख्य फसलों के तौर पर सोयाबीन की 11 लाख 6 हजार 305 हेक्टेयर तथा कपास की 8 लाख 90 हजार 949 हेक्टेयर क्षेत्र में बुआई की जा चुकी है. पश्चिम विदर्भ क्षेत्र में जून से अब तक औसत वर्षा के मुकाबले लगभग 83 प्रतिशत वर्षा दर्ज की गई है. विभाग में जून से अब तक 240.3 मिमी वर्षा अपेक्षित थी, जबकि वास्तविक वर्षा लगभग 199.6 मिमी दर्ज की गई. अमरावती जिले को छोड़कर अधिकांश जिलों में हाल के दिनों में उल्लेखनीय वर्षा नहीं हुई है.
* कृषि विभाग की सलाह के बाद भी किसानों ने शुरू की बुआई
कृषि विभाग ने किसानों को पर्याप्त और स्थिर वर्षा होने के बाद ही बुआई करने की सलाह दी थी. लेकिन बारिश के इंतजार में समय निकलने और मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए अनेक किसानों ने हल्की बारिश के बाद ही बुआई शुरू कर दी. अब बारिश रुक जाने से अंकुरण और फसल की प्रारंभिक वृद्धि पर खतरा मंडरा रहा है. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो कई क्षेत्रों में दोबारा बुआई करनी पड़ सकती है, जिससे किसानों का खर्च और आर्थिक संकट दोनों बढ़ेंगे.
* धान की रोपाई भी प्रभावित
कोकण क्षेत्र में धान की रोपाई भी अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी है. जुलाई में हुई बारिश के बाद नई पौध तैयार की गई है, लेकिन वह अभी रोपाई योग्य नहीं हुई है. कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जुलाई के अंतिम पखवाड़े में धान रोपाई को गति मिलने की संभावना है.
* गर्मी और उमस में भी बढ़ोतरी
बारिश की कमी का असर मौसम पर भी दिखाई देने लगा है. मौसम विभाग के अनुसार राज्य के अधिकांश हिस्सों में पिछले कुछ दिनों की तुलना में गर्मी और उमस बढ़ी है. मुंबई सहित कोकण क्षेत्र में रात के तापमान और उमस में भी वृद्धि दर्ज की गई है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसूनी गतिविधियां कमजोर होने के कारण उत्तर दिशा से आने वाली शुष्क हवाओं का प्रभाव महसूस किया जा रहा है. अगले दो से तीन दिनों में राज्य के अधिकतम तापमान में 1 से 2 डिग्री सेल्सियस तक वृद्धि होने की संभावना है.
* किसानों की निगाहें अब आसमान पर
विदर्भ सहित राज्य के कई हिस्सों में किसान अब पूरी तरह मानसून पर निर्भर हैं. खेत तैयार हैं, बीज उपलब्ध हैं, लेकिन पर्याप्त वर्षा के अभाव में बुआई कार्य प्रभावित हो रहा है. कृषि विभाग ने किसानों से जल्दबाजी में बुआई न करने और मौसम की स्थिति पर नजर रखने की अपील की है. यदि अगले सप्ताह के दौरान व्यापक और संतोषजनक वर्षा होती है तो खरीफ सीजन को राहत मिल सकती है. लेकिन बारिश की बेरुखी लंबी खिंची तो विदर्भ के हजारों किसानों के सामने फसल और आर्थिक नुकसान का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है.

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