विधायक प्रवीण पोटे पाटिल मानवता के गौरीशंकर

विवार, 12 जुलाई को सर्वशाखीय माली संघ ऋणानुबंध परिवार की ओर से पूर्व पालकमंत्री एवं वर्तमान विधायक प्रवीण पोटे-पाटिल के सार्वजनिक अभिनंदन समारोह का आयोजन किया गया है. इस अवसर पर प्रस्तुत है समाजभूषण प्रा. श्रीकृष्ण बनसोड़ का लेख.
महात्मा ज्योतिराव फुले ने मानवता, समानता और बंधुत्व का जो संदेश दिया, वह आज भी समाज को दिशा देता है. आज के समय में भी कुछ जनप्रतिनिधि ऐसे हैं, जो अपने निजी स्वार्थ से ऊपर उठकर उपेक्षित, वंचित और जरूरतमंद समाज के उत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं. दूसरों के सुख में अपना सुख खोजने वाले ऐसे व्यक्तित्वों में पूर्व मंत्री एवं वर्तमान विधायक प्रवीण पोटे-पाटिल का नाम प्रमुखता से लिया जाता है. छात्र जीवन से ही उनकी रुचि सामाजिक कार्यों में रही. शिक्षा पूर्ण करने के बाद उन्होंने व्यवसाय के क्षेत्र में कदम रखा और अपनी मेहनत, लगन तथा दूरदृष्टि के बल पर सफलता प्राप्त की. किंतु व्यवसाय से अधिक उन्होंने समाजसेवा को महत्व दिया. दृष्टिबाधित, दिव्यांग, मूक-बधिर तथा आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की शिक्षा, भोजन, वस्त्र और आवास जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए उन्होंने सदैव उदारतापूर्वक सहयोग किया है.
वर्ष 2015 में अमरावती जिले के पालकमंत्री के रूप में कार्य करते हुए भी उन्होंने आम जनता से अपना आत्मीय संबंध कभी टूटने नहीं दिया. उनके सरल, स्नेहपूर्ण और मिलनसार स्वभाव ने लोगों के साथ उनके रिश्तों को और अधिक मजबूत बनाया. महात्मा ज्योतिराव फुले तथा महान शिक्षाविद् डॉ. पंजाबराव देशमुख के विचारों और शैक्षणिक कार्यों से प्रेरित होकर उन्होंने पी. आर. पोटे शिक्षण संस्था की स्थापना की. उनका उद्देश्य था कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, वे शिक्षित, आत्मनिर्भर और संस्कारित नागरिक बनें. इसी भावना से महाविद्यालय को ज्ञान का मंदिर और विद्यार्थियों को देवतुल्य मानते हुए संस्था में विभिन्न शैक्षणिक, सांस्कृतिक तथा सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों का नियमित आयोजन किया जाता है.
प्रवीण पोटे-पाटिल का मानना है कि समाज में पढ़ने की संस्कृति विकसित होना अत्यंत आवश्यक है. इसी उद्देश्य से मातोश्री स्व. सूर्यकांतादेवी रामचंद्र पोटे उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार तथा रामचंद्र पोटे स्मृति पुरस्कार के माध्यम से साहित्यकारों और रचनाकारों का सम्मान किया जाता है. आध्यात्मिक प्रवृत्ति के धनी प्रवीण पोटे-पाटिल ने संत साहित्य और प्राचीन धार्मिक ग्रंथों से नैतिक मूल्यों को आत्मसात किया है. उनका विश्वास है कि संतों के विचार समाज को सदाचार, सेवा और मानवता की प्रेरणा देते हैं. विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से वे इन मूल्यों को समाज तक पहुँचाने का कार्य निरंतर करते रहे हैं.
प्रत्येक राजनीतिक दल की अपनी विचारधारा और कार्यशैली होती है. स्वाभाविक रूप से विभिन्न दलों के नेताओं के बीच वैचारिक मतभेद भी होते हैं. प्रवीण पोटे-पाटिल की भी अपनी स्पष्ट राजनीतिक विचारधारा है, किंतु उन्होंने कभी वैचारिक मतभेदों को व्यक्तिगत संबंधों के बीच नहीं आने दिया. सभी राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ उन्होंने सदैव आत्मीय और सम्मानपूर्ण संबंध बनाए रखे. उन्होंने मतभेद को कभी मनभेद नहीं बनने दिया तथा सभी जाति, धर्म और संप्रदाय के लोगों के साथ विश्वास और आत्मीयता का रिश्ता कायम रखा. यही कारण है कि अमरावती स्थानीय स्वशासन संस्था विधान परिषद निर्वाचन में वे लगातार तीन बार विजय प्राप्त करने में सफल रहे.
प्रवीण पोटे-पाटिल के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषता उनकी निष्पक्षता है. वे किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, धर्म, वर्ग या राजनीतिक विचारधारा के आधार पर भेदभाव नहीं करते. समानता, न्याय और मानवीय मूल्यों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता सदैव स्पष्ट दिखाई देती है. पालकमंत्री रहते हुए उन्होंने सकारात्मक सोच, संवेदनशील प्रशासन और जनहितकारी निर्णयों के माध्यम से अपनी अलग पहचान बनाई. बहुआयामी व्यक्तित्व, मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण व्यवहार और समाज के प्रति समर्पण के कारण प्रवीण पोटे-पाटिल आज भी जनमानस के बीच सम्मान का स्थान रखते हैं. मैं उनके उज्ज्वल, सफल और जनसेवा से परिपूर्ण राजनीतिक जीवन की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ.
– प्रा. श्रीकृष्ण बनसोड़,
समाजभूषण.

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