फर्जी पासिंग वाले ट्रकों की तलाश में जुटी क्राईम ब्रांच

ट्रान्सपोर्ट नगर व एमआयडीसी परिसर में की जाएगी पडताल

* मालवाहक ट्रकों की बहुतायत वाले क्षेत्रों पर रहेगी कडी नजर
* चेसिस पट्टी ठोंकी रहनेवाले ट्रकों को खोजने अभियान शुरू
* अमरावती आरटीओ से दूसरे राज्यों के ट्रकों की फर्जी पासिंग का मामला हुआ था उजागर
अमरावती/दि.13- अमरावती के प्रादेशिक परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में सामने आए दूसरे राज्यों के मालवाहक ट्रकों की कथित फर्जी पासिंग और पंजीयन घोटाले के खुलासे के बाद अब शहर पुलिस की अपराध शाखा (क्राइम ब्रांच) ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है. मामले की गंभीरता को देखते हुए शहर के ट्रांसपोर्ट नगर, एमआईडीसी औद्योगिक क्षेत्र तथा मालवाहक वाहनों की बड़ी आवाजाही वाले अन्य स्थानों पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है.
सूत्रों के अनुसार क्राइम ब्रांच की टीमें ऐसे ट्रकों की पहचान करने में जुटी हैं, जिनके चेसिस नंबरों में छेड़छाड़ की गई हो या जिन पर चेसिस पट्टी ठोंककर मूल पहचान छिपाने का प्रयास किया गया हो. क्राईम ब्रांच को आशंका है कि फर्जी दस्तावेजों और संदिग्ध पासिंग प्रक्रिया के माध्यम से बड़ी संख्या में वाहन वैध दिखाकर सड़कों पर चलाए जा रहे हो सकते हैं.
ज्ञात रहे कि, हाल ही में अमरावती आरटीओ से जुड़े एक मामले में यह सामने आया था और पता चला था कि अन्य राज्यों से लाए गए कुछ मालवाहक वाहनों की पासिंग और पंजीयन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं. प्रारंभिक जांच में दस्तावेजों की सत्यता, वाहन पहचान संख्या, इंजन नंबर तथा चेसिस नंबर से जुड़े कई सवाल खड़े हुए थे. इसके बाद पुलिस और परिवहन विभाग दोनों सतर्क हो गए हैं. जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि फर्जी पासिंग के माध्यम से वाहन पंजीकृत किए गए हैं तो इसके पीछे संगठित नेटवर्क की भूमिका भी हो सकती है. ऐसे में केवल दस्तावेजों की जांच ही नहीं, बल्कि वाहनों की भौतिक जांच भी आवश्यक मानी जा रही है.
ऐसे में इस पूरे मामले की सघन जांच करने तथा फर्जी पासिंग के साथ शहर सहित जिले की सडकों पर दौड रहे ट्रकों को पकडने के लिए शहर पुलिस की क्राइम ब्रांच की टीमें अब ट्रांसपोर्ट कंपनियों, ट्रक पार्किंग स्थलों, गोदाम परिसरों और औद्योगिक क्षेत्रों में खड़े मालवाहक वाहनों का रिकॉर्ड खंगाल रही हैं. विशेष रूप से उन ट्रकों को चिन्हित किया जा रहा है जिनके चेसिस नंबर संदिग्ध दिखाई देते हैं या जिन पर अतिरिक्त धातु पट्टी लगाकर मूल नंबर छिपाए जाने की आशंका है. अधिकारियों के अनुसार परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की जा सकती है. कई ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों से वाहन खरीद-बिक्री, पासिंग और फिटनेस प्रमाणपत्रों से संबंधित दस्तावेज मांगे जा रहे हैं.
इसके साथ ही यह भी पता चला है कि, इस मामले की जांच में जुटी जांच एजेंसियां वाहन निर्माताओं के रिकॉर्ड, राष्ट्रीय परिवहन डेटाबेस और विभिन्न राज्यों के आरटीओ कार्यालयों से भी जानकारी जुटा रही हैं. संदिग्ध वाहनों के इंजन और चेसिस नंबरों का मिलान कर यह पता लगाया जाएगा कि वाहन वास्तव में किस राज्य में पंजीकृत था और उसके दस्तावेजों में बाद में कोई बदलाव तो नहीं किया गया. विशेषज्ञों का कहना है कि चेसिस नंबर किसी भी वाहन की सबसे महत्वपूर्ण पहचान होती है. इसमें छेड़छाड़ कर वाहन की वास्तविक जानकारी छिपाई जा सकती है, जिससे चोरी के वाहन, दुर्घटनाग्रस्त वाहन या अवैध रूप से खरीदे गए वाहन भी वैध दिखाए जा सकते हैं.
सूत्रों के मुताबिक जांच अभी प्रारंभिक चरण में है, लेकिन आने वाले दिनों में कई और वाहनों को जांच के दायरे में लिया जा सकता है. क्राइम ब्रांच ने परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोगों को वैध दस्तावेज उपलब्ध रखने और जांच में सहयोग करने की अपील की है. जांच अधिकारी इस संभावना को भी खारिज नहीं कर रहे कि फर्जी पासिंग, नकली दस्तावेज, वाहन पहचान संख्या में फेरबदल और पंजीयन प्रक्रिया में अनियमितताओं के पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय हो सकता है. यदि जांच में ऐसे प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर तथा मोटर वाहन अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है.
फिलहाल क्राइम ब्रांच की टीमें शहर और जिले में सक्रिय होकर संदिग्ध ट्रकों की तलाश कर रही हैं. जांच एजेंसियों की नजर विशेष रूप से उन मालवाहक वाहनों पर है, जिनकी पहचान, पासिंग अथवा पंजीयन रिकॉर्ड में किसी प्रकार की विसंगति सामने आ रही है. मामले की आगे की जांच जारी है.

Back to top button