चिखलदरा नगर परिषद में लोकतंत्र पर ताला?
सात महीनों में समितियों की सिर्फ दो बैठकें

* निष्क्रिय समितियों को तत्काल बर्खास्त करने की मांग
* नगराध्यक्ष के कामकाज पर गुट नेता का हमला
चिखलदरा/दि.13- चिखलदरा नगर परिषद के कामकाज को लेकर अब सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच टकराव के संकेत दिखाई देने लगे हैं. नगर परिषद चुनाव को सात महीने बीत जाने के बावजूद बांधकाम समिति, शिक्षा समिति, स्वास्थ्य समिति तथा महिला एवं बाल कल्याण समिति की बैठकें नियमित रूप से नहीं होने का गंभीर आरोप गुट नेता राजेश मांगलेकर ने लगाया है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ समितियों की केवल एक-दो बैठकें हुई हैं, जबकि कुछ समितियों की अब तक एक भी बैठक नहीं हुई.
मांगलेकर ने कहा कि समितियां केवल कागजों पर अस्तित्व में हैं और प्रत्यक्ष रूप से नगर परिषद की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को ही ताला लग गया है. नवंबर 2025 में नगर परिषद चुनाव के बाद दिसंबर से नया सदन अस्तित्व में आया. इसके बाद अब तक सात आमसभाएं अपेक्षित थीं, लेकिन केवल दो ही सभाएं होने का दावा राजेश मांगलेकर ने किया है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब विकास कार्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और महिला-बाल कल्याण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर निर्णय लेने वाली समितियों की बैठकें ही नहीं होंगी, तो शहर का विकास कैसे होगा? गुट नेता राजेश मांगलेकर ने आरोप लगाया कि समितियों की बैठकें नहीं लेना, प्रस्तावों को मंजूरी नहीं देना और जनप्रतिनिधियों को निर्णय प्रक्रिया से दूर रखना स्थानीय स्वराज्य संस्था की मूल लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम है. समितियां सक्रिय नहीं होने के कारण शहर के विकास कार्यों और नागरिकों की समस्याओं पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है.
उन्होंने कहा कि यदि समितियों की बैठकें नहीं होंगी तो विकास की प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ेगी. इस मामले की शिकायत अब सीधे मुख्यमंत्री और नगर विकास विभाग से करने की चेतावनी भी उन्होंने दी है. मांगलेकर ने अंजनगांव सुर्जी नगर परिषद के मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां जिस प्रकार निर्णय लिया गया, उसी तरह का निर्णय चिखलदरा नगर परिषद पर क्यों लागू नहीं किया जा रहा है, यह सवाल है. प्रशासन को अगले सात दिनों में कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए निष्क्रिय समितियों के संबंध में निर्णय लेना चाहिए. अन्यथा वरिष्ठ अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज कर चिखलदरा में आक्रामक जन आंदोलन खड़ा किया जाएगा, ऐसा इशारा उन्होंने दिया.
* समितियों की निष्क्रियता से विकास कार्यों पर सवालिया निशान
चिखलदरा नगर परिषद की विभिन्न समितियां शहर के विकास का महत्वपूर्ण आधार मानी जाती हैं. बांधकाम, स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला-बाल कल्याण जैसे विषयों पर निर्णय इन्हीं समितियों के माध्यम से लिए जाते हैं. लेकिन सात महीनों में इन समितियों की बैठकें नहीं होने के आरोपों के बाद नगर परिषद की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े हो गए हैं. अब प्रशासन इन आरोपों पर क्या भूमिका लेता है, इस ओर शहरवासियों का ध्यान लगा हुआ है.
* समितियों की बैठकें नहीं होंगी तो विकास कैसे होगा?
दिसंबर से नगर परिषद का सदन अस्तित्व में आया. अब तक सात सभाएं होनी चाहिए थीं, लेकिन केवल दो ही सभाएं हुई हैं. विभिन्न समितियों के सभापतियों ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया. इससे शहर के विकास पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है. इसी विषय को लेकर मुख्यमंत्री के पास शिकायत की जाएगी. अंजनगांव सुर्जी नगर परिषद में भी इसी प्रकार शिकायत की गई थी और वहां क्या निर्णय हुआ, यह सभी जानते हैं. वही निर्णय यहां भी लागू हो सकता है.
– राजेश मांगलेकर,
गुट नेता, चिखलदरा नगर परिषद.
* आचार संहिता के कारण समितियों की बैठकें प्रभावित हुईं
हर समिति की बैठक हो चुकी है. आमसभा भी नियमित रूप से आयोजित की जा रही है. यदि किसी सभापति ने बैठक नहीं ली है तो उसे तत्काल आयोजित किया जाएगा. आचार संहिता के कारण कुछ बैठकें नहीं हो पाईं. चिखलदरा नगर परिषद में विकास कार्यों को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जिन समितियों की बैठकें नहीं हुई हैं, उन्हें जल्द से जल्द बैठक लेकर विकास कार्यों को गति देने के निर्देश दिए गए हैं.
– शेख अब्दुल शेख हैदर,
नगराध्यक्ष, चिखलदरा नगर परिषद.





