7.50 मीटर सड़क वाले ले-आउट की रजिस्ट्री प्रक्रिया फिर शुरू
विधायक सुलभा खोडके के प्रयासों से सैकड़ों भूखंडधारकों को राहत

अमरावती/दि.17- अमरावती जिले में वर्ष 2020 के बाद मंजूर 7.50 मीटर चौड़ी सड़क वाले ले-आउट के भूखंडों की खरीद-बिक्री और दस्तावेज पंजीयन (रजिस्ट्री) पर लगी रोक आखिरकार हट गई है. इसे लेकर गतरोज ही जिलाधिश कार्यालय द्वारा आदेश पत्र जारी किया गया. विशेष उल्लेखनिय है कि, इस मुद्दे को राज्य विधानसभा के हाल ही संपन्न मानसून सत्र में विधायक सुलभा संजय खोडके द्वारा प्रभावी तरीके से उठाया गया था और इसके लिए लगातार प्रयास भी किए गए थे. जिसके चलते राजस्व प्रशासन ने दस्त पंजीयन प्रक्रिया को पूर्ववत शुरू कर दिया है. इससे जिले के सैकड़ों भूखंडधारकों और संपत्ति खरीदारों को बड़ी राहत मिली है.
जानकारी के अनुसार, अमरावती शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में वर्ष 2020 के बाद मंजूर हुए ले-आउट्स में लगभग 70 प्रतिशत ले-आउट 7.50 मीटर चौड़ी सड़कों पर विकसित किए गए हैं. लेकिन सह जिला निबंधक श्रेणी-1 तथा मुद्रांक जिला अधिकारी कार्यालय द्वारा 13 मई 2026 को जारी एक पत्र के बाद इन भूखंडों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री प्रक्रिया रोक दी गई थी. जिससे प्रभावित प्लॉट धारकों एवं भूविकासकों को काफी तकलिफे हो रही थी. क्योंकि स्वीकृत लेआऊट के 6 मीटर व 7.5 मीटर चौडी सडकों पर स्थित प्लॉटों की रजिस्ट्री करना बंद कर दिया था. जिसकी वजह से सैकडों प्लॉटधारक, खरिददार व भूविकासक आर्थिक व कानुनी संकट में फंस गए थे. साथ ही कई नागरिक अपने संपत्तियों का वैधानिक हस्तांतरण नहीं कर पा रहे थे. जिसे लेकर कई नागरिकों व भूविकासकोें ने विधायक सुलभा खोडके से मुलाकात करते हुए उनका ध्यान इस समस्या की ओर दिलाया गया था. जिसके बाद विधायक सुलभा खोडके ने इस मुद्दे को बेहद प्रभावी तरीके से उठाया था.
* ईडब्ल्यूएस आरक्षण को लेकर बना था विवाद
रजिस्ट्री पर रोक का कारण आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के लिए आरक्षित भूखंडों से जुड़ी व्याख्या को बताया गया था. हालांकि भूखंडधारकों का कहना था कि एकीकृत विकास नियंत्रण एवं प्रोत्साहन नियमावली (यूडीसीपीआर) में 7.50 मीटर सड़क वाले सभी भूखंडों को केवल ईडब्ल्यूएस वर्ग के लिए आरक्षित रखने का कोई स्पष्ट प्रावधान नहीं है. नियमावली के प्रावधानों के अनुसार, 7.50 मीटर सड़क वाले भूखंडों के संबंध में अलग व्यवस्था निर्धारित है और उन्हें केवल ईडब्ल्यूएस श्रेणी तक सीमित करने का उल्लेख नहीं किया गया है. इसके बावजूद रजिस्ट्री प्रक्रिया रोक दिए जाने से सैकड़ों लोगों के जमीन संबंधी व्यवहार अटक गए थे और व्यापक नाराजगी पैदा हो गई थी.
* विधायक सुलभा खोडके ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा
इस मामले को गंभीरता से लेते हुए विधायक सुलभा खोडके ने हाल ही में संपन्न मानसून सत्र में औचित्य का मुद्दा उठाकर सरकार का ध्यान आकर्षित किया. उन्होंने कहा कि रजिस्ट्री प्रक्रिया बंद होने से आम नागरिकों, भूखंडधारकों और खरीदारों को भारी आर्थिक एवं व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. उन्होंने सरकार से मांग की कि वर्ष 2020 के बाद मंजूर ले-आउट्स में 7.50 मीटर सड़क वाले भूखंडों की खरीद-बिक्री और रजिस्ट्री प्रक्रिया बिना विलंब पुनः शुरू की जाए.
* विभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में बनी समिति
मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्व प्रशासन ने विभागीय आयुक्त, अमरावती की अध्यक्षता में एक समिति गठित की. समिति की सिफारिशों और कानूनी पहलुओं पर विचार के बाद निर्देश जारी किए गए कि 7.50 मीटर अथवा उससे कम चौड़ाई वाली सड़क के भूखंडों के दस्तावेज पंजीयन के समय संबंधित खरीदार का ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र अथवा वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम होने का प्रमाणपत्र दस्तावेजों के साथ संलग्न किया जाए. साथ ही दस्तावेज में आवश्यक शर्तों और विवरणों का उल्लेख कर यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी नियम का उल्लंघन न हो. इसके बाद निबंधन अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं के अनुसार रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी की जाए.
* भूखंडधारकों ने जताया आभार
नए निर्देशों के बाद सह जिला निबंधक श्रेणी-1 तथा मुद्रांक जिला अधिकारी कार्यालय, अमरावती ने 7.50 मीटर सड़क वाले भूखंडों की दस्त पंजीयन प्रक्रिया पुनः शुरू कर दी है. इससे लंबे समय से रजिस्ट्री का इंतजार कर रहे सैकड़ों भूखंडधारकों को राहत मिली है. निर्णय के बाद अमरावती के अनेक भूखंडधारकों और नागरिकों ने विधायक सुलभा खोडके का आभार व्यक्त करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की है. उनका कहना है कि समय पर हस्तक्षेप नहीं होता तो हजारों लोगों के जमीन संबंधी व्यवहार और निवेश प्रभावित हो सकते थे.