’अमरावती मंडल’ की खबर का बड़ा असर
शहर में बिक रहे ’हल्के’ हेल्मेट के धंधे पर प्रशासन का शिकंजा

* रेलवे स्टेशन रोड स्थित शीतल लॉज पर यातायात पुलिस और आरटीओ का संयुक्त छापा,
* दो गोदामों से बड़ी संख्या में संदिग्ध ’दिल्लीमेड’ हेल्मेट जब्त
* एक मुक्के के वार में टूट गया हेल्मेट, गुणवत्ता पर गंभीर सवाल
* बिहार निवासी चार युवकों से पूछताछ, मानक प्रमाणन और दस्तावेजों की जांच शुरू
अमरावती/दि.30 – इस समय अमरावती शहर में दुपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट की अनिवार्यता का मुद्दा जबर्दस्त ढंग से चर्चा में और बिना हेलमेट पहने वाहन चलानेवाले दुपहिया चालकों के खिलाफ शहर पुलिस की यातायात शाखा द्बारा जबर्दस्त ढंग से कार्रवाई की जा रही है. जिससे बचने के लिए दुपहिया वाहन चालकों द्बारा धडाधड हेलमेट खरीदे जा रहे हैं. इसी बात का फायदा उठाते हुए शहर के लगभग सभी चौक-चौराहों पर हेलमेट बिक्री केन्द्र खुल गये है. जहां 200 से 500 रूपए की दरों पर हेलमेट की बिक्री हो रही है. लेकिन सडकों के किनारे बिकनेवाले हेलमेट की गुणवत्ता क्या है और वे किसी हादसे की स्थिति में सुरक्षा के लिहाज से कितने कारगर साबित हो सकते हैं. इसकी ओर किसी का कोई ध्यान नहीं है. जिसे लेकर दो दिन पहले ही दैनिक अमरावती मंडल ने बडी प्रमुखता के साथ खबर प्रकाशित की थी और उस खबर का बड़ा असर गत रोज उस समय सामने आया, जब शहर में खुलेआम बिक रहे हल्के और संदिग्ध गुणवत्ता वाले हेल्मेटों को लेकर प्रशासन हरकत में आया.
बता दें कि कल बुधवार 29 जुलाई की देर शाम को शहर यातायात पुलिस और क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) ने संयुक्त अभियान चलाकर रेलवे स्टेशन रोड स्थित शीतल लॉज में छापा मारा, जहां से कथित रूप से भारी मात्रा में घटिया गुणवत्ता वाले ’दिल्लीमेड’ हेल्मेट बरामद किए गए. कार्रवाई के दौरान लॉज में बनाए गए दो अलग-अलग गोदामों से हेल्मेट के दर्जनों बॉक्स जब्त किए गए. अधिकारियों ने मौके पर ही हेल्मेटों की गुणवत्ता की प्राथमिक जांच की. इस दौरान जब एक हेल्मेट की मजबूती परखी गई, तो वह सिर्फ एक मुक्के के वार में ही टूट गया, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिला कि हेल्मेट सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते और सड़क दुर्घटना की स्थिति में वाहन चालकों की जान बचाने के बजाय उनके लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं.
* चार परप्रांतीय युवक चला रहे थे बिक्री का नेटवर्क
प्राथमिक जांच में सामने आया कि चार परप्रांतीय युवक शहर के विभिन्न क्षेत्रों में इन हेल्मेटों की बिक्री कर रहे थे. कार्रवाई के दौरान जिन लोगों की पहचान हुई, उनमें मनोजकुमार राजेंद्रकुमार परिहार (राजीगंज, जिला पूर्णिया, बिहार), निरंजन विनोद चौधरी (जमालपुर, मुजफ्फरपुर, बिहार), धीरजकुमार प्रेमदास साह (भवानीपुर, प्रतापगंज, बिहार) तथा पप्पूकुमार बेनी साहू (मुरलीगंज, मधेपुरा, बिहार) शामिल हैं. पुलिस इनसे हेल्मेटों की खरीद, आपूर्ति श्रृंखला, निर्माता और वितरण नेटवर्क के संबंध में पूछताछ कर रही है.
* मानक प्रमाणन की होगी जांच
आरटीओ और पुलिस अधिकारियों ने जब्त किए गए हेल्मेटों के आईएसआई अथवा अन्य आवश्यक गुणवत्ता प्रमाणपत्र, निर्माण संबंधी दस्तावेज, बिल तथा परिवहन रिकॉर्ड की जांच शुरू कर दी है. यदि जांच में हेल्मेट नकली, बिना मानक या फर्जी प्रमाणन वाले पाए गए तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मोटर वाहन अधिनियम, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के नियमों तथा अन्य लागू कानूनों के तहत कठोर कार्रवाई की जा सकती है.
* यातायात पुलिस और आरटीओ की संयुक्त कार्रवाई
यह संयुक्त कार्रवाई शहर यातायात शाखा के पुलिस निरीक्षक नीलेश गावंडे, सिटी कोतवाली की पुलिस उपनिरीक्षक शरयू उबाले, परिवहन विभाग के मोटर वाहन निरीक्षक प्रमोद गोटे, सहायक मोटर वाहन निरीक्षक कांचन जाधव तथा पुलिस एवं आरटीओ के अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति में की गई. अधिकारियों ने पूरे परिसर की तलाशी लेकर हेल्मेटों के भंडारण और बिक्री से जुड़े दस्तावेज भी अपने कब्जे में लिए.
बॉक्स, फोटो- दो दिन पहले की खबर की कटिंग लगाए
* ’अमरावती मंडल’ की खबर के बाद जागा प्रशासन
उल्लेखनीय है कि दैनिक अमरावती मंडल ने दो दिन पहले शहर में फुटपाथों और अस्थायी दुकानों पर बिक रहे बेहद हल्के और संदिग्ध गुणवत्ता वाले हेल्मेटों का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था. समाचार में बताया गया था कि कम कीमत के नाम पर ऐसे हेल्मेट धड़ल्ले से बेचे जा रहे हैं, जिनसे दुर्घटना के समय सुरक्षा मिलने की संभावना बेहद कम है. खबर प्रकाशित होने के बाद संबंधित विभागों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संयुक्त छापेमारी की.
* सड़क सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला
विशेषज्ञों का मानना है कि घटिया गुणवत्ता वाले हेल्मेट केवल औपचारिकता पूरी करने का साधन बन जाते हैं. दुर्घटना के समय ऐसे हेल्मेट सिर की सुरक्षा करने में असफल रहते हैं, जिससे गंभीर चोट या मृत्यु का खतरा कई गुना बढ़ जाता है. ऐसे में प्रशासन की यह कार्रवाई सड़क सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
* और भी हो सकती हैं कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार, जांच अभी प्रारंभिक चरण में है. पुलिस और आरटीओ शहर के अन्य क्षेत्रों में भी ऐसे हेल्मेटों की बिक्री करने वाले कारोबारियों की जानकारी जुटा रहे हैं. यदि जांच में कोई बड़ा नेटवर्क सामने आता है तो आने वाले दिनों में शहर के अन्य गोदामों, दुकानों और अस्थायी विक्रय केंद्रों पर भी संयुक्त छापेमारी की जा सकती है. प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे केवल मानक गुणवत्ता वाले प्रमाणित हेल्मेट ही खरीदें और संदिग्ध हेल्मेट की बिक्री की सूचना तत्काल संबंधित विभाग को दें.
बॉक्स, फोटो –
* एक ही मुक्के के वार से खुल गया हेलमेट
यहां यह विशेष उल्लेखनीय है कि गत रोज शीतल लॉज पर मारे गये छापे के दौरान बरामद किए गये हेलमेट की गुणवत्ता को जांचने हेतु एक पुलिस कर्मी ने मजाक-मजाक में एक हेलमेट को सीधा रखते हुए उस पर मुक्के से प्रहार किया. कमाल की बात यह रही कि उक्त हेलमेट मुक्के का एक वार भी झेल नहीं पाया और उपर से पूरी तरह खुल गया. जिसके अंदर पतले थर्माकोल की शीट लगी दिखाई दी. इसे देखकर यह अनुमान लगाया जा सकता है कि, यदि ऐसे हेलमेट को पहनने के बाद वाहन चालक किसी सडक हादसे का शिकार होता है तो उसके सिर का क्या हाल हो सकता है. जाहीर तौर पर ऐसे हेलमेट की वजह से जान बचने की कोई गारंटी नहीं है.
अब तक शहर में बिक चुके हजारों हल्के हेलमेट
यहां इस बात की ओर भी ध्यान दिलाया जा सकता है कि आरटीओ व पुलिस महकमे द्बारा कहीं न कहीं सांप निकल जाने के बाद लाठी पीटने का काम किया गया है. क्योंकि अमरावती शहर की सडकों व चौराहों पर विगत करीब एक सप्ताह से निकृष्ट दर्जे वाले हल्के हेलमेट की बिक्री धडल्ले के साथ चल रही थी और अब तक पुलिसिया कार्रवाई के खौफ की वजह से शहर के हजारों दुपहिया चालकों द्बारा सस्ती दरों पर मिलनेवाले हल्के हेलमेटों की खरीदारी भी की जा चुकी है. जिसमें करोडों रूपयों का आर्थिक लेन देन भी हो चुका है. ऐसे में सबसे बडा सवाल यह है कि हल्के हेलमेट की प्रयोग की वजह से यदि आगे चलकर कोई अघटित घटना घटित होती है तो उसकी जिम्मेदारी किस पर रहेगी.