गौरी और हर्षा के परिजनों से नहीं मिले राजनेता
राजापेठ फ्लाईओवर हादसा

* केवल लीपापोती हो रही
* मानवीय संवेदना लुप्त होने की सर्वत्र चर्चा
अमरावती/दि.30 – राजापेठ फ्लाईओवर पर हुए मंगलवार शाम के भयंकर और हिलाकर रख देनेवाले हादसे की सर्वत्र चर्चा हो रही है. दुख के साथ-साथ अमरावतीवासियों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा. ऐसे में यह भी देखा गया कि, फ्लाईओवर के स्पॉट पर जाकर देखने की होड मची है. जनप्रतिनिधियों में यह प्रचलन दिखाई पड रहा है. किंतु किसी भी राजनेता ने आज दोपहर तक हादसे के पीडित परिवारों से जाकर मिलने की संवेदना नहीं दिखाई है. जो अमरावती के लीडरान की लुप्त होती मानवीय संवेदना का परिचायक बन रही है. बल्कि इसे शर्म की बात कहना कदाचित उचित रहेगा.
मंगलवार की उस अमंगल दोपहरी में गौरी धर्माले और हर्षा गावंडे राजापेठ में यातायात बेतरतीब होने से भीषण हादसे का शिकार हो गई. ट्रक द्वारा कुचले जाने से दोनों इस तरह घायल हुई कि, अस्पताल ले जाने के बाद भी चिकित्सक उनके प्राण बचा नहीं सके. भयंकर और दिनदहाडे हुई सडक दुर्घटनाने समस्त अमरावती को झकझोरकर रख दिया. गौरी धर्माले अभियांत्रिकी की छात्रा थी. दोनों मौसी-भांजी का निधन निसंदेह पत्थरदिल व्यक्ति को भी झकझोर गया. हादसे के बाद होनेवाली कार्रवाई और लीपापोती जमकर चल रही है.
मौके पर पुलिस के आला अफसरान तो पहुंचे ही. एक के बाद एक राजनेताओं का भी वहां जाना और अवलोकन करना बदस्तूर है. किंतु किसी भी राजनेता ने धर्माले अथवा गावंडे परिवार को जाकर सांत्वना बंधाने की जहमत अब तक नहीं उठाई है. जबकि इससे पहले हुई अनेक दुर्घटनाओं, हत्या, हत्या के प्रयास और इस तरह की दुर्भाग्यजनक घटना के पीडितों के घरों पर राजनेता आनन-फानन में पहुंचते थे. उसके छायाचित्र, शॉर्ट वीडियो मुख्य माध्यमों से लेकर सोशल माध्यमों पर प्रसारित और वायरल किए जाते थे. इतना ही नहीं तो पीडित परिवारों, वारिसों को सरकारी सहायता दिलाने का भी आश्वासन दिया जाता. कई अवसरों पर शासकीय सहायता के लाखों के चेक एक साथ जनप्रतिनिधि परिजनों को सौंपते.
गौरी धर्माले और हर्षा गावंडे इस मामले में भी अभागी कही जा सकती है. अब तक किसी भी दल के नेता ने धर्माले या गावंडे परिवार के घर पहुंचने, उन्हें ढांढस बंधाने का काम नहीं किया है. शासकीय सहायता की बात दूर. अमरावती मंडल से चर्चा और बातचीत में अमरावती के अनेक सुधि पाठकों ने अपेक्षा जताई है कि, दोनों परिवारों को ढांढस बंधाने के साथ उनके संग खडे होना आवश्यक है. हो सके तो आर्थिक सहायता भी शासन की ओर से दी जानी चाहिए. लोगों का कहना रहा कि, इस घटना के पीडितों से राजनेताओं को कोई राजनीतिक लाभ फिलहाल की घडी में होता नहीं दिखाई पड रहा, कदाचित इसलिए अब तक सभी राजनेता, जनप्रतिनिधि उदासीन है. सत्ता पक्ष के अलावा विपक्ष के नेताओं ने भी इतनी संवेदना नहीं दिखाई कि, वे जाकर गावंडे या धर्माले परिवार को सांत्वना के दो शब्द कहें. गौरी और हर्षा के परिजन किसी भी राजनेता के समर्थक या कार्यकर्ता नहीं होना भी उनके लिए दुर्भाग्यजनक कहा जा सकता है. कोई छोटे-बडे दल का भी कार्यकर्ता रहता, तो अब तक राजनेता उनके घर पर दस्तक देता.





