थोड़ी-सी सावधानी से रहें मौसमी बीमारियों से दूर

मानसून में बच्चों की देखभाल

* डॉ. नितिन सेठ ने बताए बचाव के उपाय
* गंभीर लक्षण दिखें तो तुरंत चिकित्सक से करें संपर्क
अमरावती/दि.4 बारिश का मौसम बच्चों के लिए जितना आनंददायक होता है, उतना ही संक्रमण और मौसमी बीमारियों का खतरा भी साथ लेकर आता है. ऐसे में अभिभावकों की थोड़ी-सी सतर्कता बच्चों को डेंगू, मलेरिया, वायरल बुखार, डायरिया और त्वचा संबंधी संक्रमण जैसी बीमारियों से बचा सकती है.
बाल एवं नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन सेठ ने बताया कि मानसून के दौरान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है. इस मौसम में सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार, डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया, दस्त, उल्टी, टाइफाइड, कंजंक्टिवाइटिस तथा त्वचा एवं फंगल संक्रमण के मामले बढ़ जाते हैं. समय पर सावधानी बरतने से इन बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है. डॉ. सेठ ने सलाह दी कि बच्चों को बार-बार साबुन से हाथ धोने की आदत डालें, बाहर से आने पर हाथ-पैर अच्छी तरह साफ करवाएँ तथा नाखून छोटे रखें. भोजन हमेशा ताजा और घर का बना दें. खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, कटे हुए फल और दूषित पानी से बचें. पीने के लिए उबला या शुद्ध पानी ही दें तथा जंक फूड और अधिक तैलीय भोजन से दूरी रखें. उन्होंने कहा कि बारिश के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है. इसलिए घर के आसपास पानी जमा न होने दें, बच्चों को पूरी बाँह के कपड़े पहनाएँ तथा मच्छरदानी या बच्चों के लिए सुरक्षित मच्छररोधी उत्पाद का उपयोग करें. यदि बच्चा बारिश में भीग जाए तो तुरंत उसके कपड़े बदलें और शरीर व बाल अच्छी तरह सुखाएँ.
डॉ. सेठ के अनुसार बच्चों के आहार में मौसमी फल, हरी सब्जियाँ, दाल, दूध, दही (यदि बच्चा स्वस्थ हो), अंडा एवं अन्य प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें. पर्याप्त पानी पिलाएँ और बच्चों की पूरी नींद सुनिश्चित करें, क्योंकि अच्छी नींद रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करती है. डॉ. नितिन सेठ ने कहा कि बारिश का मौसम खुशियों का मौसम है, लेकिन थोड़ी-सी लापरवाही बच्चों को बीमार कर सकती है. स्वच्छता, संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और सही देखभाल अपनाकर अधिकांश मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है.

* तुरंत डॉक्टर से कब मिलें?
– तेज बुखार 3 दिन से अधिक रहे.
– बच्चा बहुत सुस्त लगे या बार-बार बेहोश जैसा हो.
– साँस लेने में तकलीफ हो.
– लगातार उल्टी या दस्त हों.
– बच्चा पानी पीने से मना करे या पेशाब कम आए.
– दौरा (फिट) पड़े.
– शरीर पर लाल चकत्ते, खून के धब्बे या नाक/मसूड़ों से खून आए.
– डेंगू या मलेरिया की आशंका हो.

* घरेलू उपाय
– सर्दी-जुकाम में
– 6 महीने से बड़े बच्चों को गुनगुना पानी दें.
– 1 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों को 1-2 चम्मच शहद दिया जा सकता है. (1 वर्ष से कम आयु के बच्चों को शहद बिल्कुल न दें.)
– बड़े बच्चों में सावधानीपूर्वक भाप (स्टीम) देने से राहत मिल सकती है.
– नॉर्मल सलाइन नेजल ड्रॉप्स नाक साफ रखने में सहायक हैं.

* गले में खराश
– बड़े बच्चे गुनगुने नमक वाले पानी से गरारे कर सकते हैं.
– गुनगुने तरल पदार्थ दें.

* दस्त होने पर
– ओआरएस थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार दें.
– स्तनपान जारी रखें.
– केला, चावल, दही (यदि सहन हो) और खिचड़ी जैसे हल्के भोजन दें.
– बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न दें.

* बुखार में
– पर्याप्त तरल पदार्थ दें.
– हल्के कपड़े पहनाएँ.
– डॉक्टर की सलाह अनुसार पैरासिटामोल दें.
– बच्चों को कभी भी एस्पिरिन न दें.

* क्या न करें?
– बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक न दें.
– स्वयं स्टेरॉयड या अन्य दवाएँ न दें.
– 1 वर्ष से कम आयु के बच्चों को शहद न दें.
– बच्चों को लंबे समय तक गीले कपड़ों में न रखें.
– खुले में मिलने वाले जूस, चाट एवं अस्वच्छ भोजन से बचें.

* डॉक्टर का संदेश
बारिश का मौसम आनंद का मौसम है, लेकिन थोड़ी-सी लापरवाही बच्चों को बीमार कर सकती है. स्वच्छता, संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण और सही देखभाल अपनाकर अधिकांश मौसमी बीमारियों से बचा जा सकता है. किसी भी गंभीर लक्षण पर तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क करें.
– डॉ. नितिन सेठ,
बाल एवं नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ.

Back to top button