अतिवृष्टि से बर्बाद संतरा बागों के लिए 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजे की मांग

राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस ने मोर्शी तहसील कार्यालय पर किया प्रदर्शन

* संयुक्त सर्वे कर तत्काल सहायता देने की मांग
मोर्शी /दि.4 मोर्शी तहसील के हिवरखेड राजस्व मंडल में 30 और 31 जुलाई को हुई अतिवृष्टि से संतरा उत्पादक किसानों को भारी नुकसान हुआ है. बागों में बड़े पैमाने पर फल झड़ गए, पेड़ों की शाखाएं टूट गईं और फसल को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचा. इसे देखते हुए राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस ने प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये विशेष आर्थिक सहायता देने की मांग की है.
इस मांग को लेकर राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस के तालुका अध्यक्ष रुपेश वालके के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने तहसील कार्यालय पहुंचकर उपविभागीय अधिकारी, तहसीलदार, उपविभागीय कृषि अधिकारी और तालुका कृषि अधिकारी को ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में बताया गया कि हिवरखेड राजस्व मंडल में लगभग 12 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में संतरे की खेती होती है और यह मोर्शी तहसील का सबसे बड़ा संतरा उत्पादक क्षेत्र है. लेकिन हाल की अतिवृष्टि से आंबिया बहार को भारी नुकसान पहुंचा है. फलों के झड़ने के साथ कई बागों में पेड़ों की शाखाएं टूट गईं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा. किसानों का कहना है कि उन्होंने खाद, दवाइयों, सिंचाई, मजदूरी और बागों के रखरखाव पर लाखों रुपये खर्च किए थे, लेकिन अचानक हुई बारिश ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया. इससे अनेक किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं.
* संयुक्त पंचनामा कर शीघ्र रिपोर्ट भेजने की मांग
ज्ञापन में प्रशासन से मांग की गई है कि हिवरखेड राजस्व मंडल के सभी प्रभावित गांवों का संयुक्त सर्वे और पंचनामा कर तत्काल शासन को रिपोर्ट भेजी जाए तथा प्रत्येक प्रभावित संतरा उत्पादक किसान को प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की विशेष सहायता मंजूर की जाए. इस दौरान शशांक आमदरे, अनिकेत राऊत, मयूर ढवली, विजय कडू, शिरीष काले, अंकुश कोल्हे, नरेंद्र नांदुरकर, कांचन कुकडे, मनीष गुडधे सहित राष्ट्रवादी युवक कांग्रेस के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे. रुपेश वालके ने कहा कि हिवरखेड क्षेत्र में संतरा उत्पादकों को अभूतपूर्व नुकसान हुआ है. केवल पंचनामा कर औपचारिकता पूरी करने के बजाय सरकार को तत्काल सर्वेक्षण कर प्रभावित किसानों को प्रति हेक्टेयर 50 हजार रुपये की विशेष आर्थिक सहायता प्रदान करनी चाहिए, ताकि संकटग्रस्त किसानों को राहत मिल सके.

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