विदर्भ की ट्रांसजेंडर महिला वकील शिवानी सुरकार ने रचाया विवाह

प्रेम ने बदली परंपराओं की तस्वीर

* चार साल की दोस्ती, संघर्ष, बिछड़ने और फिर साथ आने की कहानी बनी जीवनसाथी बनने की मिसाल
* कोर्ट मैरिज के बाद हिंदू रीति-रिवाज से लिए सात फेरे, समाज को दिया स्वीकार्यता और समानता का संदेश
वर्धा/अमरावती/दि.3 – प्रेम जब सच्चा हो तो वह सामाजिक रूढ़ियों, पूर्वाग्रहों और तमाम बाधाओं को पीछे छोड़ देता है. ऐसी ही एक प्रेरणादायी कहानी वर्धा से सामने आई है, जहां विदर्भ की पहली ट्रांसजेंडर महिला अधिवक्ता के रूप में पहचान बना चुकीं शिवानी सुरकार और बैंक कर्मचारी नितीन सोलंके ने अपने चार साल पुराने रिश्ते को विवाह का नाम देकर समाज के सामने एक नई मिसाल पेश की है. यह विवाह केवल दो व्यक्तियों के जीवन का नया अध्याय नहीं, बल्कि उस सोच को चुनौती भी है जो आज भी लैंगिक पहचान के आधार पर लोगों को स्वीकार करने में संकोच करती है. शिवानी और नितीन की शादी अब पूरे विदर्भ में चर्चा का विषय बनी हुई है और सोशल मीडिया पर भी लोगों की शुभकामनाओं का सिलसिला लगातार जारी है.
* दोस्ती से शुरू हुई थी प्रेम कहानी
जानकारी के मुताबिक, करीब चार वर्ष पहले शिवानी और नितीन की मुलाकात हुई थी. शुरुआत सामान्य मित्रता से हुई, लेकिन समय के साथ दोनों एक-दूसरे को समझने लगे और यह रिश्ता गहरी आत्मीयता में बदल गया. जीवन के अनुभव, सपने और संघर्ष साझा करते-करते दोनों के बीच विश्वास का ऐसा रिश्ता बना जिसने उन्हें एक-दूसरे के और करीब ला दिया. हालांकि हर प्रेम कहानी की तरह इस रिश्ते का सफर भी आसान नहीं रहा. विचारों में अंतर, जीवनशैली और शिक्षा से जुड़े कुछ मतभेदों के चलते दोनों के बीच दूरियां भी आईं. एक समय ऐसा भी आया जब दोनों ने अलग-अलग राह चुन ली. लेकिन समय के साथ उन्हें यह एहसास हुआ कि वे एक-दूसरे के बिना अपने भविष्य की कल्पना नहीं कर सकते. धीरे-धीरे संवाद फिर शुरू हुआ और विश्वास की डोर पहले से कहीं अधिक मजबूत होती चली गई.
* सामाजिक दबाव और विरोध के बीच लिया बड़ा फैसला
रिश्ते को विवाह तक पहुंचाने का निर्णय दोनों के लिए आसान नहीं था. समाज की पारंपरिक सोच और परिवार के कुछ सदस्यों की असहमति उनके सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी थी. विशेष रूप से शिवानी को अपनी पहचान के कारण कई तरह के सवालों और सामाजिक दबावों का सामना करना पड़ा. इसके बावजूद दोनों ने अपने रिश्ते पर भरोसा बनाए रखा. उन्होंने तय किया कि वे किसी भी परिस्थिति में अपने फैसले से पीछे नहीं हटेंगे. आखिरकार दोनों ने अपने प्रेम को कानूनी और सामाजिक मान्यता देने का निर्णय लिया.
* पहले कोर्ट मैरिज, फिर वैदिक रीति से विवाह
25 जून को वर्धा में विशेष विवाह अधिनियम के तहत दोनों ने विधिवत कोर्ट मैरिज की. कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद 1 जुलाई को अमरावती के लाखनवाड़ी स्थित हिंदू मंदिर ट्रस्ट में परिवारजनों, मित्रों और करीबी लोगों की उपस्थिति में हिंदू रीति-रिवाज से विवाह संपन्न हुआ. वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दोनों ने सात फेरे लिए और एक-दूसरे का जीवनभर साथ निभाने का संकल्प लिया. विवाह समारोह भावनात्मक और प्रेरणादायी माहौल में संपन्न हुआ. इस दौरान उपस्थित लोगों ने नवदंपति को शुभाशीष देते हुए उनके सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की.
* विदर्भ की पहली ट्रांसजेंडर महिला अधिवक्ता
ज्ञात रहे कि, शिवानी सुरकार ने अपने संघर्ष और मेहनत के बल पर कानून के क्षेत्र में विशेष पहचान बनाई है. वे वर्धा न्यायालय के साथ-साथ नागपुर उच्च न्यायालय में भी अधिवक्ता के रूप में कार्य कर रही हैं. ट्रांसजेंडर समुदाय से आने के बावजूद उन्होंने सामाजिक पूर्वाग्रहों का सामना करते हुए शिक्षा और पेशेवर जीवन में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. शिवानी लंबे समय से सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय हैं और ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकारों तथा सम्मान के लिए भी आवाज उठाती रही हैं. उनके विवाह को कई सामाजिक संगठनों ने सकारात्मक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है.
* रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत विश्वास है
शिवानी और नितीन का कहना है कि उनके रिश्ते की असली नींव प्रेम से अधिक विश्वास और सम्मान है. दोनों का मानना है कि किसी भी संबंध को मजबूत बनाने के लिए एक-दूसरे को स्वीकार करना और हर परिस्थिति में साथ खड़े रहना सबसे महत्वपूर्ण होता है. शिवानी ने कहा कि नितीन ने उन्हें केवल जीवनसाथी के रूप में नहीं अपनाया, बल्कि हर संघर्ष में उनका साथ दिया. वहीं नितीन का कहना है कि इंसान की पहचान उसके चरित्र, संवेदनशीलता और विचारों से होती है, न कि केवल उसके लिंग से.
* समाज को दिया सकारात्मक संदेश
इस विवाह को केवल व्यक्तिगत खुशी तक सीमित नहीं माना जा रहा है. सामाजिक दृष्टि से भी इसे एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जा रहा है. दोनों का मानना है कि समाज में हर व्यक्ति को सम्मानपूर्वक जीवन जीने और अपनी पसंद के अनुसार जीवनसाथी चुनने का अधिकार मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि यदि परिवार और समाज सहयोग की भावना से आगे आएं तो अनेक लोगों का जीवन बेहतर हो सकता है. उनका विवाह इस बात का उदाहरण है कि प्रेम और स्वीकार्यता सामाजिक दीवारों को भी कमजोर कर सकती है.
* सोशल मीडिया पर मिल रही बधाइयां
विवाह की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद लोगों ने बड़ी संख्या में नवदंपति को शुभकामनाएं दी हैं. अनेक सामाजिक संगठनों, अधिवक्ताओं, बैंक कर्मचारियों तथा ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों ने भी इस विवाह का स्वागत किया है. चार साल की दोस्ती, संघर्ष, बिछड़ने और फिर एक होने की यह कहानी अब केवल शिवानी और नितीन की नहीं रह गई है, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा बन गई है जो सामाजिक बाधाओं के बावजूद अपने सपनों और रिश्तों पर विश्वास बनाए रखते हैं.

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