अमरावती में लेबलिंग उल्लंघन के 300 से अधिक मामले अदालत पहुंचे

पहले से सक्रिय था एफडीए, अब और तेज हुई कार्रवाई

* बड़ी कंपनियों के उत्पादों से लेकर चाय टपरी तक निगरानी
* आयुक्त तुकाराम मुंढे के कार्यभार संभालने के बाद खाद्य सुरक्षा अभियान को मिली नई गति
अमरावती/दि.6 – महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण को लेकर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) की कार्रवाई इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है. हालांकि अमरावती में एफडीए की सक्रियता कोई नई बात नहीं है. विभाग लंबे समय से बड़ी कंपनियों के खाद्य उत्पादों, होटल-रेस्तरां, मिष्ठान भंडारों, डेयरी उत्पादों तथा मेडिकल स्टोर्स पर नियमित निगरानी रखता आया है. अब आयुक्त तुकाराम मुंढे के नेतृत्व में विभाग की कार्रवाई का दायरा और अधिक व्यापक हो गया है, जिसके तहत छोटे-बड़े सभी खाद्य प्रतिष्ठानों की गहन जांच शुरू की गई है.
एफडीए सूत्रों के अनुसार, अमरावती में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और लेबलिंग संबंधी नियमों के उल्लंघन पर पहले भी बड़े पैमाने पर कार्रवाई की गई थी. विभाग द्वारा विभिन्न कंपनियों और प्रतिष्ठानों के उत्पादों के नमूने लेकर उनकी जांच की जाती रही है. जांच के दौरान अनेक मामलों में यह पाया गया कि उत्पादों के लेबल पर जिन घटकों अथवा गुणवत्ता मानकों का उल्लेख किया गया था, वास्तविक उत्पाद उन मानकों पर खरे नहीं उतर रहे थे.
* लेबलिंग उल्लंघन के 300 से अधिक मामले अदालत में
एफडीए अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में विभाग ने पिछले वर्षों में 300 से अधिक प्रकरण अदालतों में दाखिल किए थे. इनमें से लगभग 70 मामलों में न्यायालय ने संबंधित प्रतिष्ठानों और कंपनियों के खिलाफ निर्णय सुनाते हुए दंडात्मक कार्रवाई तथा जुर्माना वसूली के आदेश दिए थे. विशेषज्ञों का कहना है कि खाद्य पदार्थों की लेबलिंग केवल औपचारिकता नहीं बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है. किसी भी उत्पाद के पैकेट पर उसके घटक, पोषण मूल्य, निर्माण तिथि, समाप्ति तिथि और अन्य आवश्यक जानकारी सही ढंग से दर्ज होना कानूनन अनिवार्य है. यदि उत्पाद में घोषित सामग्री और वास्तविक सामग्री में अंतर पाया जाता है तो इसे गंभीर उल्लंघन माना जाता है.
* होटल, मिठाई दुकानों और मेडिकल स्टोर्स पर रहती थी विशेष नजर
एफडीए की निगरानी केवल पैकेज्ड खाद्य पदार्थों तक सीमित नहीं रही है. विभाग द्वारा समय-समय पर शहर के प्रमुख होटलों, रेस्तरां, मिष्ठान भंडारों, बेकरी, डेयरी उत्पाद विक्रेताओं तथा मेडिकल स्टोर्स की भी जांच की जाती रही है. खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्वच्छता, भंडारण व्यवस्था तथा लाइसेंस संबंधी नियमों की समीक्षा नियमित रूप से की जाती है. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि उपभोक्ताओं को सुरक्षित और मानक स्तर के खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराना एफडीए की प्राथमिक जिम्मेदारी है. इसी उद्देश्य से समय-समय पर नमूना संग्रहण और निरीक्षण अभियान चलाए जाते रहे हैं.
* मुंढे के आने के बाद बढ़ा कार्रवाई का दायरा
हाल ही में एफडीए आयुक्त का पदभार संभालने वाले तुकाराम मुंढे ने पूरे राज्य में खाद्य सुरक्षा कानूनों के सख्त पालन के संकेत दिए हैं. उनके निर्देशों के बाद अमरावती सहित विदर्भ के विभिन्न जिलों में निरीक्षण अभियान और अधिक व्यापक रूप से चलाए जा रहे हैं. अब केवल बड़े प्रतिष्ठान ही नहीं बल्कि छोटे खाद्य विक्रेता, नाश्ते की गाड़ियां, फास्ट फूड सेंटर, सड़क किनारे लगने वाली चाय टपरियां, जूस सेंटर और अन्य असंगठित खाद्य व्यवसाय भी जांच के दायरे में आ गए हैं. अधिकारियों का मानना है कि खाद्य सुरक्षा के नियम सभी के लिए समान हैं और उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं किया जा सकता.
* प्रतिबंधित गुटखा और सुगंधित तंबाकू पर विशेष फोकस
एफडीए ने खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ प्रतिबंधित गुटखा, सुगंधित तंबाकू और अन्य निषिद्ध उत्पादों के खिलाफ भी अभियान तेज कर दिया है. विभागीय टीमें नियमित रूप से बाजारों, गोदामों और थोक विक्रेताओं की जांच कर रही हैं. अवैध रूप से ऐसे उत्पादों का भंडारण, परिवहन अथवा बिक्री करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है. हाल के महीनों में विदर्भ क्षेत्र में कई स्थानों पर लाखों रुपये मूल्य का प्रतिबंधित गुटखा और तंबाकू उत्पाद जब्त किए जा चुके हैं. अधिकारियों का कहना है कि इस प्रकार के अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे.
* उपभोक्ता हित सर्वोपरि
एफडीए अधिकारियों के अनुसार, विभाग का उद्देश्य केवल कार्रवाई करना नहीं बल्कि खाद्य व्यवसाय संचालकों में नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाना भी है. उपभोक्ताओं को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण और मानक स्तर के खाद्य पदार्थ उपलब्ध हों, इसके लिए निरीक्षण, नमूना परीक्षण और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी. खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में अमरावती में पहले से चल रही सख्त निगरानी अब और अधिक व्यापक रूप लेती दिखाई दे रही है. बड़े ब्रांडों से लेकर सड़क किनारे की छोटी खाद्य दुकानों तक, हर स्तर पर गुणवत्ता और कानून के पालन की कसौटी पर जांच की जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और अधिकारों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित हो सके.

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