शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के मामले में आरोपी बरी
सहायक आरटीओ अधिकारी से दुर्व्यवहार और धमकी देने के आरोप सिद्ध नहीं हुए, जिला न्यायालय का फैसला

अमरावती/दि.7 – अमरावती के गाडगे नगर पुलिस थाना क्षेत्र में दर्ज शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने के चर्चित मामले में स्थानीय जिला एवं सत्र न्यायालय क्रमांक-6 ने आरोपी सुनील दयालतराव इंगले को सभी आरोपों से दोषमुक्त करार देते हुए बरी कर दिया है. न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में भारतीय दंड संहिता की धारा 353, 387 और 506 के तहत लगाए गए आरोप सिद्ध न होने पर यह निर्णय सुनाया.
दोषारोप पत्र के अनुसार, शिकायतकर्ता उस समय अमरावती क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) में सहायक आरटीओ अधिकारी के पद पर कार्यरत थे, जबकि आरोपी सुनील इंगले आरटीओ कार्यालय में एजेंट के रूप में काम करता था. अभियोजन पक्ष के अनुसार, 21 जुलाई 2018 को शिकायतकर्ता अपने कार्यालय में कार्यरत थे, तभी आरोपी उनके केबिन में घुस आया और पैसों की मांग करने लगा. शिकायतकर्ता द्वारा मना किए जाने पर आरोपी ने कथित रूप से उनकी कॉलर पकड़कर धक्का-मुक्की की, गाली-गलौज की तथा जान से मारने की धमकी दी. शिकायतकर्ता का आरोप था कि इस घटना के कारण उनके शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न हुई. इसके बाद गाडगे नगर पुलिस थाने में आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया था.
मामले की सुनवाई के दौरान सरकारी पक्ष की ओर से चार गवाहों के बयान दर्ज कराए गए. वहीं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, अमरावती के अंतर्गत संचालित न्याय रक्षक कार्यालय की ओर से एड. रेहान हैदर को आरोपी का पक्ष रखने के लिए नियुक्त किया गया था. सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अभियोजन के साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में मौजूद विसंगतियों की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया. एड. रेहान हैदर ने तर्क दिया कि अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को संदेह से परे सिद्ध करने में असफल रहा है.
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद माननीय न्यायालय ने पाया कि आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोप पर्याप्त रूप से प्रमाणित नहीं हुए हैं. इसके चलते न्यायालय ने आरोपी सुनील दयालतराव इंगले को भारतीय दंड संहिता की धारा 353 (लोक सेवक को कर्तव्य पालन से रोकने के लिए बल प्रयोग), धारा 387 (जबरन वसूली के उद्देश्य से धमकी) तथा धारा 506 (आपराधिक धमकी) के आरोपों से निर्दोष बरी करने का आदेश दिया. इस प्रकरण में बचाव पक्ष की ओर से एड. रेहान हैदर ने सफल पैरवी की. न्यायालय के फैसले के बाद आरोपी को मामले से पूर्ण राहत मिल गई है.





