कॉन्टमसॉफ्ट धोखाधड़ी मामले में कंपनी के सीईओ निखीलेश्वर क्षिरसागर को जमानत
1.84 करोड़ रुपये की कथित ठगी के मामले में पुणे जिला न्यायालय ने सशर्त राहत दी

* एड. आशीष चौबे का सफल युक्तीवाद आया काम
पुणे /दि.7– बहुचर्चित कॉन्टमसॉफ्ट टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित रोजगार धोखाधड़ी मामले में कंपनी के मुख्य आरोपी एवं सीईओ निखीलेश्वर क्षिरसागर को पुणे जिला एवं सत्र न्यायालय से सशर्त जमानत मिल गई है. बेरोजगार युवाओं को नौकरी, प्रशिक्षण और आकर्षक वेतन का झांसा देकर लगभग 1 करोड़ 84 लाख 46 हजार 532 रुपये की कथित ठगी करने के आरोप में दर्ज मामले में न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया.
दोषारोप पत्र के अनुसार, पुणे स्थित कॉन्टमसॉफ्ट टेक्नोलॉजी प्रा. लि. द्वारा बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देने और बाद में विभिन्न कंपनियों में नौकरी उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था. इस प्रक्रिया के तहत प्रशिक्षण शुल्क और अन्य मदों के नाम पर आवेदकों से राशि ली जाती थी. जांच एजेंसियों का आरोप है कि कंपनी और उससे जुड़े अन्य आरोपियों ने कथित रूप से युवाओं को नौकरी तथा वर्क फ्रॉम होम रोजगार दिलाने का आश्वासन देकर बड़ी मात्रा में धन एकत्र किया, लेकिन वादे पूरे नहीं किए.
जांच में यह भी सामने आया कि विभिन्न कंसल्टेंसी फर्मों के माध्यम से आवेदकों को जोड़ा जाता था और प्रत्येक उम्मीदवार के बदले कमीशन दिया जाता था. पुलिस के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया के माध्यम से कुल 1.84 करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई. मामले में आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं के तहत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया है.
बताया गया कि निखीलेश्वर क्षिरसागर ने पहले निचली अदालत से जमानत पाने का प्रयास किया था, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी. इसके बाद उन्होंने एड. आशीष वी. चौबे के माध्यम से जिला न्यायालय में जमानत याचिका दायर की.
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता चौबे ने तर्क दिया कि आरोपपत्र में उल्लिखित धाराओं के तहत अपराध का प्रत्यक्ष आधार पर्याप्त नहीं है तथा आरोपी के खिलाफ की गई कार्रवाई के कानूनी पहलुओं पर भी प्रश्न उठाए. उन्होंने अपने पक्ष के समर्थन में सर्वोच्च न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला भी दिया. वहीं सरकारी पक्ष ने मामले की गंभीरता, कथित आर्थिक नुकसान और बड़ी संख्या में प्रभावित युवाओं का हवाला देते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया. दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पुणे जिला न्यायालय ने निखीलेश्वर क्षिरसागर को निर्धारित शर्तों के साथ जमानत मंजूर कर दी.
मुख्य आरोपी की ओर से अधिवक्ता आशीष वी. चौबे ने पैरवी की, जबकि एड. डोईफोडे (पुणे) और एड. प्रियंका डोंगरे ने उनका सहयोग किया. मामले का परीक्षण और सुनवाई आगे भी जारी रहेगी तथा अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही होगा.





