अपनी हद में रहें रवि राणा, भाजपा के मामलों में दखल देना बंद करें
महायुति में बढ़ती तल्खी आई खुलकर सामने, तिवसा से उठे विवाद ने जिले की राजनीति गरमाई

* भाजपा नेताओं का पत्रवार्ता में सामूहिक पलटवार
* विधायक वानखडे, पोटे और अडसड आए एक मंच पर
* पूछा – किसी की टिकट कटवाने या दिलवाने वाले आप कौन होते हैं?
* नवनीत राणा की हार के लिए भाजपा नहीं, राणा दंपत्ति की कार्यशैली को ठहराया जिम्मेदार
अमरावती/दि.7 – तिवसा निर्वाचन क्षेत्र में विगत विधानसभा चुनाव के समय भाजपा में रविराज देशमुख की टिकट काटने और आगामी विधानसभा चुनाव के समय रविराज देशमुख को टिकट दिलाते हुए तिवसा निर्वाचन क्षेत्र में बदलाव करने को लेकर विधायक रवि राणा द्वारा किए गए दावों पर भारतीय जनता पार्टी ने आज पूरी तरह से खुलकर और सामूहिक रूप से जवाब दिया है. भाजपा नेताओं ने एकजुट होकर पत्रवार्ता बुलाते हुए विधायक रवि राणा के उस बयान को तथ्यहीन और भ्रामक बताया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने रविराज देशमुख की टिकट कटवाई थी तथा भविष्य में राजनीतिक बदलाव कर उन्हें विधायक बनाने का प्रयास करेंगे.
विधायक रवि राणा द्वारा दिए गए बयान के बाद भाजपा में तीखी नाराजगी देखने को मिली. इसके जवाब में आयोजित पत्रकार परिषद में तिवसा के विधायक राजेश वानखडे, विधान परिषद सदस्य प्रवीण पोटे पाटिल, भाजपा ग्रामीण जिलाध्यक्ष एवं धामणगांव रेलवे के विधायक प्रताप अडसड सहित अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी एक मंच पर दिखाई दिए. इस दौरान प्रा. दिनेश सूर्यवंशी, तुषार भारतीय, जयंत डेहनकर, शिवराय कुलकर्णी, चेतन पवार, नितिन गुढ़धे पाटिल और विवेक गुल्हाने सहित बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित थे. पत्रकार परिषद में भाजपा नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पार्टी में उम्मीदवारों का चयन संसदीय बोर्ड और शीर्ष नेतृत्व द्वारा किया जाता है. किसी बाहरी व्यक्ति का उसमें कोई हस्तक्षेप या भूमिका नहीं होती. नेताओं ने रवि राणा से पूछा कि वे आखिर किस अधिकार और हैसियत से भाजपा की टिकटों को लेकर दावा कर रहे हैं.

* राणा कौन होते हैं, भाजपा में टिकट बांटने या काटनेवाले – राजेश वानखडे
तिवसा के विधायक राजेश वानखडे ने सबसे तीखा हमला बोलते हुए कहा कि वे हमेशा हिंदुत्ववादी विचारधारा से जुड़े रहे हैं. शिवसेना में विभाजन के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस तथा तत्कालीन प्रदेशाध्यक्ष और वर्तमान राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के नेतृत्व पर विश्वास व्यक्त करते हुए भाजपा का दामन थामा था. विधायक वानखडे ने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें तिवसा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा प्रत्याशी नवनीत राणा के प्रचार की जिम्मेदारी सौंपी थी. उन्होंने अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ पूरी निष्ठा से काम किया. उसी संगठनात्मक क्षमता और जनाधार को देखते हुए भाजपा नेतृत्व ने विधानसभा चुनाव में उनके नाम पर विचार किया और अंततः उन्हें टिकट प्रदान की. उन्होंने कहा कि उस समय टिकट के लिए रविराज देशमुख सहित कई नेता दावेदार थे, लेकिन अंतिम निर्णय भाजपा संसदीय बोर्ड और शीर्ष नेतृत्व ने लिया था.
विधायक वानखडे ने सवाल उठाते हुए कहा कि, विधायक रवि राणा को जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए कि भाजपा में उनकी भूमिका क्या है? क्या वे संसदीय बोर्ड के सदस्य हैं? क्या वे टिकट वितरण समिति का हिस्सा हैं? यदि नहीं, तो फिर किसी की टिकट कटवाने या दिलवाने का दावा किस आधार पर किया जा रहा है? उन्होंने आरोप लगाया कि रवि राणा अक्सर ऐसे बयान देकर राजनीतिक भ्रम पैदा करते हैं और स्वयं को वास्तविकता से अधिक प्रभावशाली साबित करने की कोशिश करते हैं.
इसके साथ ही विधायक राजेश वानखडे ने कहा कि भाजपा महायुति का सम्मान करती है और गठबंधन धर्म का पूरी निष्ठा से पालन कर रही है. लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि कोई सहयोगी दल का नेता भाजपा के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करे या पार्टी के निर्णयों का श्रेय लेने का प्रयास करे. उन्होंने कहा कि भाजपा हमेशा अपने सहयोगियों का सम्मान करती रही है, किंतु सम्मान का जवाब जिम्मेदारी और संयम से दिया जाना चाहिए.

* कुछ लोग गारुड़ी की राजनीति करते हैं, विधायक प्रवीण पोटे का तीखा व्यंग्य
इस पत्रवार्ता में विधान परिषद सदस्य प्रवीण पोटे पाटिल ने अपने चिरपरिचित अंदाज में रवि राणा पर तीखा व्यंग्य कसते हुए कहा कि, राजनीति में कुछ लोग गारुड़ी (संपेरे) की तरह होते हैं, जो सांप और नेवले की लड़ाई दिखाकर लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं. उनका पूरा राजनीतिक अस्तित्व विवाद खड़े करने और भ्रम फैलाने पर आधारित होता है. साथ ही विधायक पोटे ने आगे कहा कि, कुछ लोग बैलगाड़ी के नीचे चलने वाले उस कुत्ते की तरह होते हैं, जिसे यह भ्रम हो जाता है कि पूरी बैलगाड़ी वही खींच रहा है. उनके इस बयान पर उपस्थित कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रतिक्रिया दी.
इसके साथ ही विधायक प्रवीण पोटे ने कहा कि भाजपा देश की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है और उसका संगठनात्मक ढांचा अत्यंत मजबूत है. उन्होंने कहा कि, भाजपा को किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है. हमारी पार्टी कार्यकर्ताओं, विचारधारा और संगठन की ताकत पर खड़ी है. यहां टिकट वितरण किसी बाहरी व्यक्ति के कहने पर नहीं होता. उन्होंने दोहराया कि तिवसा से राजेश वानखडे को टिकट देना भाजपा नेतृत्व का निर्णय था और उसमें किसी अन्य व्यक्ति की कोई भूमिका नहीं थी.
विधायक प्रवीण पोटे ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले स्थानीय स्तर पर कुछ असहमतियां जरूर थीं, लेकिन पार्टी द्वारा नवनीत राणा को उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अनुशासन का परिचय देते हुए उनके समर्थन में काम किया. उन्होंने कहा कि चुनावी पराजय के पीछे भाजपा नहीं, बल्कि राणा दंपत्ति की कार्यशैली और अनेक लोगों के साथ पैदा हुई नाराजगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.
विधायक प्रवीण पोटे ने यह भी दावा किया कि अमरावती महानगरपालिका, नगरपालिका तथा नगर पंचायतों के चुनावों में भी ऐसी परिस्थितियों के कारण भाजपा को कई बार राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ा. हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय को लेकर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के पास शिकायत ले जाने की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा कि, यह स्थानीय स्तर का विषय है और स्थानीय स्तर पर ही इसका जवाब दिया जाएगा. वरिष्ठ नेतृत्व को इसमें शामिल करने की जरूरत नहीं है.

* राणा पहले अपना घर संभालें, जिलाध्यक्ष व विधायक प्रताप अडसड का दो टूक जवाब
भाजपा ग्रामीण जिलाध्यक्ष एवं धामणगांव रेलवे के विधायक प्रताप अडसड ने भी रवि राणा के बयान को पूरी तरह निराधार बताया. उन्होंने कहा कि भाजपा में उम्मीदवारों का चयन संसदीय बोर्ड और शीर्ष नेतृत्व करता है. किसी बाहरी व्यक्ति का उस प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं होता. विधायक अडसड ने कहा कि, रवि राणा के बयान में कोई तथ्य नहीं है. उन्होंने बिना वजह विवाद खड़ा कर कार्यकर्ताओं के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास किया है. उन्होंने आगे कहा कि सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदारी और संयम आवश्यक है. विधायक अडसड ने तीखे शब्दों में कहा, दूसरों के घर में झांकने से पहले रवि राणा को अपने राजनीतिक दल और अपने घर की स्थिति संभालने पर ध्यान देना चाहिए. स्वयं का आकलन करना अधिक उचित होगा.
* नवनीत राणा की हार पर भाजपा का बड़ा बयान
पत्रवार्ता के दौरान भाजपा नेताओं ने लोकसभा चुनाव में नवनीत राणा की पराजय पर भी खुलकर अपनी बात रखी. राजेश वानखडे ने कहा कि भाजपा के प्रत्येक पदाधिकारी और कार्यकर्ता ने नवनीत राणा के समर्थन में पूरी ताकत झोंक दी थी. गांव-गांव, बूथ-बूथ और घर-घर तक भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रचार किया. पार्टी संगठन ने कहीं कोई कमी नहीं छोड़ी. उन्होंने कहा कि इसके बावजूद यदि नवनीत राणा को हार का सामना करना पड़ा, तो उसके लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा. विधायक वानखडे ने कहा, भाजपा ने पूरी ताकत से चुनाव लड़ा. लेकिन राणा दंपत्ति की कार्यशैली, कई लोगों के साथ वर्षों से चले आ रहे व्यक्तिगत विवाद और राजनीतिक टकराव का असर चुनाव परिणामों में दिखाई दिया. इसका भाजपा संगठन से कोई संबंध नहीं था.
* भाजपा की एकजुटता का प्रदर्शन, महायुति को भी संदेश
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह पत्रकार परिषद केवल रवि राणा के बयान का जवाब भर नहीं थी, बल्कि भाजपा की ओर से दिया गया एक स्पष्ट राजनीतिक संदेश भी था. पहली बार तिवसा, धामणगांव और विधान परिषद स्तर के प्रमुख नेता एक मंच पर आकर रवि राणा के खिलाफ खुलकर बोले. भाजपा नेताओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि पार्टी के संगठनात्मक निर्णयों, टिकट वितरण और राजनीतिक रणनीति का अधिकार केवल पार्टी नेतृत्व को है तथा किसी सहयोगी दल के नेता द्वारा उसका श्रेय लेने या हस्तक्षेप करने का प्रयास स्वीकार नहीं किया जाएगा.
इस घटनाक्रम ने यह भी संकेत दिया है कि आगामी मनपा, नगर परिषद, जिला परिषद और विधानसभा चुनावों से पहले महायुति के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं है. तिवसा की टिकट को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब अमरावती जिले की राजनीति में बड़े टकराव का रूप लेता दिखाई दे रहा है. फिलहाल भाजपा नेताओं ने एक स्वर में रवि राणा को संदेश दिया है कि भाजपा के आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और टिकटों पर दावा करने की राजनीति अब नहीं चलेगी.





