जादू-टोने के शक में बुजुर्ग की पीट-पीटकर हत्या
भंडारा जिले में अंधविश्वास के चलते एक की जान गई

* मासल गांव की घटना, चार आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज
* एक सप्ताह तक मौत से जूझते रहे 65 वर्षीय बलराम लांजेवार
* नागपुर मेडिकल में तोड़ा दम, पुलिस कर रही मामले की जांच
भंडारा/दि.7 – विज्ञान और तकनीक के आधुनिक दौर में भी अंधविश्वास किस तरह इंसानी जान ले रहा है, इसका दर्दनाक उदाहरण भंडारा जिले के लाखांदूर तहसील स्थित मासल गांव में सामने आया है. जादू-टोना करने के संदेह में 65 वर्षीय एक बुजुर्ग की लाठी-डंडों से बेरहमी से पिटाई कर दी गई. गंभीर रूप से घायल बुजुर्ग ने एक सप्ताह तक जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष किया, लेकिन अंततः नागपुर के सरकारी मेडिकल अस्पताल में उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई. मृतक की पहचान बलराम लांजेवार (65) के रूप में हुई है. इस मामले में पुलिस ने चार आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है.
पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार मासल गांव में रहने वाले बलराम लांजेवार पर पड़ोस में रहने वाली एक विवाहित महिला पर जादू-टोना करने का संदेह व्यक्त किया गया था. इसी शक के आधार पर 30 जुलाई को गांव के चार लोगों ने उन्हें घेर लिया और लाठियों तथा डंडों से बेरहमी से हमला कर दिया. हमले में बलराम लांजेवार गंभीर रूप से घायल हो गए. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आरोपियों ने उन पर तब तक हमला किया, जब तक वे बेहोश होकर जमीन पर नहीं गिर पड़े.
घटना की सूचना मिलते ही लाखांदूर पुलिस थाने के सहायक पुलिस निरीक्षक आशीष गंद्रे, उपनिरीक्षक निशांत जुनोनकर और उनकी टीम मौके पर पहुंची. घायल बुजुर्ग को पहले लाखांदूर ग्रामीण अस्पताल में भर्ती कराया गया. हालत बिगड़ने पर उन्हें भंडारा जिला सामान्य अस्पताल रेफर किया गया. वहां भी स्थिति गंभीर बनी रहने के कारण चिकित्सकों ने उन्हें नागपुर स्थित शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय एवं अस्पताल (मेडिकल) भेज दिया.
नागपुर मेडिकल अस्पताल में बलराम लांजेवार का लगातार उपचार चल रहा था. चिकित्सकों ने उन्हें बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए, लेकिन गंभीर सिर और शरीर की चोटों के कारण उनकी हालत में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका. करीब एक सप्ताह तक जीवन के लिए संघर्ष करने के बाद गुरुवार, 6 अगस्त को उन्होंने अंतिम सांस ली. उनकी मौत की खबर मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई.
इस मामले में पीड़ित के पुत्र की शिकायत पर पुलिस ने पहले ही चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था. आरोपियों की पहचान गोपाल लांजेवार (45), विवेक लांजेवार (25), प्रमोद लांजेवार (40) और किशोर लांजेवार (40, सभी मासलगांव निवासी) के रूप में हुई है. न्यायालय ने उन्हें 5 अगस्त तक पुलिस हिरासत में भेजा था. हिरासत अवधि समाप्त होने के बाद चारों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. बलराम लांजेवार की मृत्यु के बाद पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत हत्या का आरोप जोड़ दिया है.
* अंधविश्वास पर फिर खड़े हुए सवाल
यह घटना एक बार फिर समाज में व्याप्त अंधविश्वास और जादू-टोने जैसी कुप्रथाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है. महाराष्ट्र में अंधश्रद्धा उन्मूलन कानून लागू होने के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसी घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं. सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि किसी व्यक्ति पर जादू-टोना करने का आरोप लगाकर हिंसा करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि मानवता के विरुद्ध भी है. जागरूकता और वैज्ञानिक सोच के अभाव में आज भी निर्दोष लोगों को ऐसी अफवाहों का शिकार होना पड़ रहा है.
बलराम लांजेवार की मौत के बाद मासल गांव और आसपास के क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है. ग्रामीणों का कहना है कि केवल संदेह के आधार पर किसी व्यक्ति की जान लेना अत्यंत निंदनीय है. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मामले की गहन जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी. एक निर्दोष बुजुर्ग की मौत ने फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अंधविश्वास के नाम पर इंसानी जान लेने की घटनाएं कब रुकेंगी और समाज वैज्ञानिक सोच को कब पूरी तरह स्वीकार करेगा.





