अपहरण और हत्या प्रकरण में चारों आरोपी बरी
दो वर्ष चली सुनवाई के बाद जिला न्यायालय का फैसला

* आरोप सिद्ध करने में असफल रहा अभियोजन पक्ष
अमरावती/दि.8– बहुचर्चित अपहरण और हत्या प्रकरण में जिला एवं सत्र न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए चारों आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया है. करीब दो वर्ष तक चली सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्यों के आधार पर सिद्ध करने में असफल रहा, जिसके चलते आरोपियों की निर्दोष मुक्तता का आदेश दिया गया. इस मामले में आरोपी आकाश उर्फ अवली चव्हाण, निखिल गजानन ठाकरे, सलमान खान उर्फ अफूवादे नियमद खान तथा गणेश विष्णु शिंदे के खिलाफ बडनेरा पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 602/2024 दर्ज किया गया था. उन पर अपहरण और उससे संबंधित गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.
प्रकरण के अनुसार शिकायतकर्ता गौरव विलासराव पाटील ने आरोप लगाया था कि प्रेमराज उर्फ मॉन्टी अनिल गोले पर हुए जानलेवा हमले के बाद उसके मित्र अजय विजय वानखेडे को अंतिम संस्कार स्थल से जबरन ले जाया गया था. बाद में अजय वानखेडे का शव मिलने से मामला और गंभीर हो गया था तथा पूरे क्षेत्र में इसकी व्यापक चर्चा हुई थी. जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने दोषारोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने विभिन्न साक्ष्य, दस्तावेज और गवाहों के बयान पेश किए. वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता शिरीष जाखड, संदेश मेश्राम और परवेज खान ने आरोपियों का पक्ष रखते हुए अभियोजन के साक्ष्यों पर सवाल उठाए.
न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और जांच संबंधी रिकॉर्ड का विस्तृत परीक्षण किया. सुनवाई के दौरान यह पाया गया कि आरोपियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप संदेह से परे प्रमाणित नहीं हो सके. इसके आधार पर न्यायालय ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(1), 104(1), 61(2) और 3(5) के तहत लगाए गए आरोपों से चारों आरोपियों को दोषमुक्त करार देते हुए बरी करने का आदेश दिया.
न्यायालय के इस फैसले के साथ लगभग दो वर्षों से चर्चा में रहे इस मामले का कानूनी रूप से पटाक्षेप हो गया. फैसले के बाद न्यायालय परिसर में दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच इस निर्णय को लेकर चर्चा का माहौल बना रहा.





