मुथूट फिनकॉर्प घोटाले में पहला बड़ा ‘ब्रेक-थ्रू’

शुभम वासेवाय से 90 ग्राम सोना बरामद

* ग्राहकों के आभूषण बेचने के आरोप को मिला आधार
* शुभम ने दो सराफा कारोबारियों को बेचा था ग्राहकों का सोना
* तीनों आरोपियों की आज खत्म हुई पीसीआर अवधि, अदालत में हुई पेशी
* और बरामदगी की उम्मीद में पुलिस ने अदालत से मांगी रिमांड बढ़ाने की अनुमति
* जांच व पुछताछ में अब और भी सोना रिकवर होने की बढी उम्मीदें
* करोड़ों के घोटाले की परतें धीरे-धीरे खुल रहीं
अमरावती/दि.10 – अमरावती के एसटी बस स्टैंड रोड स्थित वीमाको टॉवर में संचालित मुथूट फिनकॉर्प शाखा में सामने आए बहुचर्चित गोल्ड लोन और वित्तीय घोटाले की जांच में सिटी कोतवाली पुलिस को अब तक की सबसे महत्वपूर्ण सफलता मिली है. जांच के दौरान मुख्य आरोपी एवं शाखा प्रबंधक शुभम वासेवाय की निशानदेही पर पुलिस ने 90 ग्राम सोना बरामद किया है. प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह सोना उन आभूषणों का हिस्सा माना जा रहा है, जिन्हें ग्राहकों ने गोल्ड लोन के लिए शाखा में गिरवी रखा था.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक शुभम वासेवाय ने पूछताछ के दौरान स्वीकार किया कि उसने कुछ सोना शहर के दो सराफा कारोबारियों को बेचा था. इसके बाद पुलिस टीम ने दोनों सोनारों के यहां पहुंचकर संबंधित सोना जब्त कर लिया. इस बरामदगी को जांच में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है, क्योंकि अब तक कथित हेराफेरी और ग्राहकों के सोने के गायब होने की शिकायतें तो सामने आ रही थीं, लेकिन उसके भौतिक साक्ष्य पुलिस के हाथ नहीं लगे थे.
* पहली रिकवरी से मजबूत हुआ पुलिस का दावा
घोटाले के उजागर होने के बाद से लगातार यह सवाल उठ रहा था कि ग्राहकों के गिरवी रखे गए आभूषण आखिर कहां गए. पुलिस को संदेह था कि शाखा के रिकॉर्ड में दर्ज सोने और वास्तविक रूप से शाखा में उपलब्ध सोने के बीच बड़ा अंतर हो सकता है. अब 90 ग्राम सोने की बरामदगी ने यह साबित कर दिया है कि ग्राहकों के आभूषणों के साथ अनियमितताएं हुई हैं और उन्हें शाखा के बाहर खपाने का प्रयास किया गया. जांच अधिकारियों का मानना है कि यदि 90 ग्राम सोना बेचा गया है, तो यह पूरी कहानी का केवल एक छोटा हिस्सा हो सकता है. अभी तक प्राप्त शिकायतों, ऑडिट रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच के आधार पर यह आशंका व्यक्त की जा रही है कि घोटाले में कई सौ ग्राम से लेकर कई किलो सोना शामिल हो सकता है.
* 57 शिकायतें, हर दिन बढ़ रहा घोटाले का दायरा
मामले के सामने आने के बाद अब तक 57 से अधिक शिकायतें पुलिस के पास पहुंच चुकी हैं. कई शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्होंने लोन की राशि जमा कर दी थी, लेकिन उन्हें उनका सोना वापस नहीं मिला. कुछ लोगों का कहना है कि उन्हें कंप्यूटरीकृत रसीद के बजाय हस्तलिखित रसीदें दी गईं, जबकि कई मामलों में भुगतान कंपनी के रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हुआ. पुलिस अधिकारियों का मानना है कि अभी भी कई पीड़ित सामने नहीं आए हैं. सामाजिक प्रतिष्ठा, बदनामी और कानूनी प्रक्रिया के झंझट के कारण कुछ लोग शिकायत दर्ज कराने से बच रहे हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में शिकायतों की संख्या और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
* पूछताछ में शुभम लगातार बदल रहा बयान
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार शुभम वासेवाय पूछताछ के दौरान बार-बार अपना बयान बदल रहा है. कभी वह दावा करता है कि कुछ सोना उसके पास सुरक्षित रखा गया है, तो कभी कहता है कि उसने सोना किसी परिचित या मित्र को दिया है. कुछ मौकों पर उसने कथित रूप से यह भी कहा कि हेराफेरी की गई राशि का हिस्सा विभिन्न निवेशों में लगाया गया. पुलिस का मानना है कि आरोपी जानबूझकर जांच को भ्रमित करने का प्रयास कर रहा है. इसके बावजूद पूछताछ से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर पुलिस लगातार नए स्थानों की जांच कर रही है.
* आज खत्म हुई पुलिस रिमांड, बढ़ सकती है अवधि
मामले में गिरफ्तार तीनों आरोपी शुभम वासेवाय (शाखा प्रबंधक), सूरज अनिल खैरकर व धीरज पंचमराव सिरसाट की पुलिस कस्टडी रिमांड आज सोमवार 10 अगस्त को समाप्त हो गई. सिटी कोतवाली पुलिस ने तीनों आरोपियों को अदालत में पेश कर पुलिस हिरासत की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया है. पुलिस का कहना है कि हालिया सोना बरामदगी के बाद जांच को नई दिशा मिली है. अब कई महत्वपूर्ण कड़ियां सामने आ रही हैं, जिनकी पुष्टि के लिए आरोपियों से और पूछताछ आवश्यक है. इसलिए पुलिस रिमांड बढ़ाए जाने की संभावना प्रबल मानी जा रही है.
* दो सोनार भी जांच के घेरे में
हालांकि अभी तक दोनों सराफा कारोबारियों के खिलाफ किसी प्रकार की आपराधिक भूमिका की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस यह जांच कर रही है कि उन्होंने सोना खरीदते समय आवश्यक दस्तावेजों और स्रोत की जांच की थी या नहीं. यदि जांच में यह सामने आता है कि उन्हें सोने के संदिग्ध होने की जानकारी थी या उन्होंने नियमों का पालन नहीं किया, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है. पुलिस फिलहाल उनके बयान दर्ज कर रही है और लेन-देन से संबंधित दस्तावेजों की जांच कर रही है.
* ‘डबल गेम’ की थ्योरी को मिला बल
जांच में पहले ही यह आशंका व्यक्त की गई थी कि ग्राहकों द्वारा गिरवी रखे गए पूरे सोने को मुथूट फिनकॉर्प के रिकॉर्ड में नहीं दर्शाया जाता था. आरोप है कि ऋण स्वीकृति के लिए आवश्यक मात्रा दर्ज करने के बाद अतिरिक्त सोने का कथित रूप से अन्यत्र उपयोग किया जाता था. कुछ मामलों में यह भी संदेह है कि ग्राहकों का सोना दूसरी वित्तीय संस्थाओं में गिरवी रखकर उसके बदले धनराशि प्राप्त की गई. 90 ग्राम सोने की बरामदगी के बाद इस तथाकथित डबल गेम की संभावना और मजबूत हुई है.
* संपत्तियों और बैंक खातों की भी जांच
पुलिस अब केवल सोने की बरामदगी तक सीमित नहीं है. जांच एजेंसियां आरोपियों के बैंक खातों, निवेश, संपत्तियों और हाल के वर्षों में किए गए आर्थिक लेन-देन की भी पड़ताल कर रही हैं. सूत्रों के अनुसार जांच में ऐसे संकेत मिले हैं कि कथित हेराफेरी की रकम का उपयोग जमीन, प्लॉट, फ्लैट और अन्य संपत्तियां खरीदने में किया गया हो सकता है. यदि यह पुष्टि होती है तो पुलिस इन संपत्तियों को जब्त करने की दिशा में भी कार्रवाई कर सकती है.
* आर्थिक अपराध शाखा को सौंपा जा सकता है मामला
घोटाले का आकार लगातार बढ़ने, शिकायतों की संख्या बढ़ने और करोड़ों रुपये की संभावित हेराफेरी के मद्देनजर यह संभावना भी व्यक्त की जा रही है कि जांच को आगे चलकर आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंपा जा सकता है. वित्तीय रिकॉर्ड, गोल्ड लोन खातों, संपत्ति निवेश और विभिन्न लेन-देन की जटिलता को देखते हुए विशेषज्ञों की मदद भी ली जा रही है. मुथूट फिनकॉर्प द्वारा प्रस्तुत ऑडिट रिपोर्ट का भी विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है.
* सबसे बड़ा सवाल अब भी कायम
हालांकि 90 ग्राम सोने की बरामदगी से जांच को महत्वपूर्ण सफलता मिली है, लेकिन कई बड़े सवाल अभी भी अनुत्तरित हैं कि, कुल कितना सोना और कितनी नकद राशि हेराफेरी की गई, क्या ग्राहकों के सोने को व्यवस्थित रूप से बेचा गया या अन्यत्र गिरवी रखा गया, क्या तीनों आरोपी ही पूरे नेटवर्क के केंद्र में हैं या उनके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय था, कथित रूप से गायब बाकी सोना कहां है तथा क्या अन्य कर्मचारियों या बाहरी व्यक्तियों की भी भूमिका रही है. इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में पुलिस पूछताछ, अतिरिक्त बरामदगी और वित्तीय जांच के बाद सामने आ सकते हैं.
फिलहाल, 90 ग्राम सोने की बरामदगी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुथूट फिनकॉर्प घोटाला केवल रिकॉर्ड की गड़बड़ी का मामला नहीं, बल्कि ग्राहकों के भरोसे, उनकी जमा पूंजी और बहुमूल्य आभूषणों से जुड़े एक गंभीर आर्थिक अपराध का मामला है. अब अमरावती सहित पूरे विदर्भ की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां बाकी गायब सोना और कथित करोड़ों रुपये की हेराफेरी का सच कब तक सामने लाती हैं.

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