चार महीनों में कुष्ठ रोग के 123 नए मरीज मिले

ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे ज्यादा मामले

* समय पर जांच और इलाज से पूरी तरह ठीक हो सकता है रोग
अमरावती/दि.12 जिले में कुष्ठ रोग को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे खोज अभियान में चिंताजनक आंकड़े सामने आए हैं. अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच चार महीनों में जिले में कुष्ठ रोग के 123 नए मरीज सामने आए हैं. इनमें सबसे अधिक 83 मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से मिले हैं. इसके बाद मनपा क्षेत्र में 25 और अन्य शहरी क्षेत्रों में 15 मरीजों की पहचान हुई.
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, कुष्ठ रोग माइकोबैक्टीरियम लेप्री नामक बैक्टीरिया के कारण होता है. यह मुख्य रूप से त्वचा, नसों और आंखों को प्रभावित कर सकता है. समय पर बीमारी की पहचान और उपचार नहीं होने पर मरीज में स्थायी विकलांगता का खतरा बढ़ सकता है.
* ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अभियान की जरूरत
स्वास्थ्य विभाग की ओर से कुष्ठ रोगियों की खोज के लिए जिले में अभियान चलाया जा रहा है. अप्रैल से जुलाई के दौरान किए गए सर्वेक्षण में ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक मरीज पाए गए. इसके मद्देनजर ग्रामीण इलाकों में सक्रिय कुष्ठ रोग खोज अभियान, त्वचा रोग जांच शिविर और जनजागरूकता अभियान को और प्रभावी बनाने की आवश्यकता बताई गई है.
* इन लक्षणों को नजरअंदाज न करें
कुष्ठ रोग के प्रमुख लक्षणों में शरीर पर पीले या लाल रंग के सुन्न धब्बे, हाथ-पैरों में झुनझुनी अथवा सुन्नपन और नसों से संबंधित संवेदनशीलता में कमी शामिल हो सकती है. ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराना जरूरी है.
* पूरी तरह इलाज संभव
कुष्ठ रोग का उपचार संभव है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार समय पर बीमारी का पता चलने और नियमित उपचार लेने से मरीज संक्रमण से मुक्त होकर सामान्य जीवन जी सकता है. जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में मल्टी ड्रग थेरेपी नि:शुल्क उपलब्ध है. कुष्ठ रोग विभाग की सहायक संचालक डॉ. पूनम मोहकार ने बताया कि अप्रैल से जुलाई तक जिले में कुल 123 नए मरीज सामने आए हैं. उन्होंने लोगों से शरीर पर असामान्य या सुन्न धब्बे दिखाई देने पर बिना संकोच नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जांच कराने की अपील की.
* 2027 तक कुष्ठ रोग उन्मूलन का लक्ष्य
केंद्र सरकार ने देश से कुष्ठ रोग को समाप्त करने के लिए 2027 तक उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसके लिए समय पर मरीजों की पहचान, नियमित उपचार और जनजागरूकता को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से लक्षणों को नजरअंदाज न करने और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर नि:शुल्क जांच व उपचार का लाभ लेने की अपील की है.

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