20 दिन में टूटा परिवार फिर जुड़ा
85 वर्षीय तुलशीराम आजोबा को बेटे का मिला सहारा

* अमरावती मनपा के आधार केंद्र की सराहनीय पहल
अमरावती/दि.14- अमरावती महानगरपालिका और पब्लिक एज्युकेशन एंड वेलफेयर सोसायटी द्वारा संचालित आधार शहरी बेघर निवारा केंद्र, बडनेरा ने एक बार फिर मानवता की मिसाल पेश की है. पिछले 20 दिनों से केंद्र में आश्रय ले रहे 85 वर्षीय तुळशीराम पांडूजी गादे को बुधवार को उनके बेटे के सुपुर्द कर सम्मानपूर्वक विदाई दी गई. केंद्र की टीम के प्रयासों से न केवल एक बुजुर्ग को सहारा मिला, बल्कि टूट चुका परिवार भी फिर से जुड़ गया.
तुलशीराम आजोबा जब आधार केंद्र पहुंचे थे, तब वे बेहद घबराए और भावुक अवस्था में थे. पेशाब संबंधी परेशानी के कारण उन्हें यूरिन बैग लगा हुआ था. वे लगातार रो रहे थे. केंद्र के संचालक और व्यवस्थापकों ने उनका समुपदेशन कर उन्हें भरोसा दिलाया कि वे अकेले नहीं हैं और जरूरत पड़ने पर केंद्र हमेशा उनके साथ खड़ा रहेगा. कुछ ही दिनों में उनके चेहरे पर मुस्कान लौटने लगी. बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी पीड़ा साझा की. उन्होंने बताया कि पत्नी के निधन के बाद उन्होंने अपने बच्चों का पालन-पोषण किया था. बाद में दूसरी शादी के बाद सौतेले बच्चों ने उन्हें बातों में लेकर घर बिकवा दिया और उस राशि से अपने नाम पर घर ले लिया. इसके बाद उन्हें घर से बाहर कर दिया गया. पहली पत्नी के बेटे ने भी उन्हें स्वीकार करने से इनकार कर दिया. आखिरकार पुलिस ने उन्हें आधार केंद्र का पता दिया.
* समुपदेशन से बेटे ने मानी गलती
आधार केंद्र की टीम ने तुलशीराम आजोबा की पहली पत्नी के बेटे से संपर्क साधा. बातचीत और समुपदेशन के बाद बेटे ने अपनी गलती स्वीकार की और उन्हें अपने राजापेठ स्थित घर ले जाने के लिए तैयार हो गया. ट्रांसपोर्ट व्यवसाय से जुड़े उनके बेटे स्वयं चारपहिया वाहन से पिता को लेने आधार केंद्र पहुंचे.
* विदाई के समय छलक पड़े आंसू
बेटे के साथ जाने के समय तुलशीराम आजोबा एक बार फिर भावुक होकर रो पड़े. इस अवसर पर केंद्र की व्यवस्थापिका ज्योति राठोड ने उन्हें ढांढस बंधाते हुए कहा कि वे चिंता न करें और भविष्य में किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर दोबारा आधार केंद्र आएं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र के लोग हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे. इसके बाद आजोबा को उनके बेटे के सुपुर्द किया गया.
* मानवता की मिसाल बना आधार केंद्र
इस सराहनीय कार्य में निवारा केंद्र के संचालक राजीव बसवनाथे, व्यवस्थापिका ज्योति राठोड, केयरटेकर रोहित घोंगडे, विलास थोरात और किशोर मरकाम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. आधार केंद्र केवल बेसहारा लोगों को आश्रय देने तक सीमित नहीं है, बल्कि बिछड़े लोगों को उनके परिवार से मिलाने और टूटे रिश्तों को फिर से जोड़ने का कार्य भी कर रहा है. तुळशीराम आजोबा की कहानी इस मानवीय पहल का जीवंत उदाहरण है.





