खुदाई और सड़क मरम्मत शुल्क माफ, अब सड़कें टूटने पर जिम्मेदारी किसकी?

सीजीडी पाइपलाइन बिछाने के लिए अनुमति प्रक्रिया आसान

* मनपा के राजस्व पर पड़ सकता है असर
अमरावती /दि.18 – शहर में सीएनजी-पीएनजी पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार को गति देने के लिए राज्य सरकार ने अनुमति प्रक्रिया को आसान कर दिया है. इससे गैस कंपनियों को पाइपलाइन बिछाने के लिए सड़क खुदाई की अनुमति जल्द मिलने का रास्ता साफ हुआ है. हालांकि, इस निर्णय का सीधा असर अमरावती महानगरपालिका के राजस्व पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है.
पहले सार्वजनिक सड़कों की खुदाई अथवा सार्वजनिक संपत्ति पर किसी प्रकार का काम करने के लिए संबंधित कंपनी या एजेंसी को महानगरपालिका से अनुमति लेना पड़ता था. इसके साथ ही सड़क खुदाई तथा सड़क की मरम्मत के लिए निर्धारित शुल्क भी जमा करना पड़ता था. इस शुल्क से महानगरपालिका को राजस्व प्राप्त होता था, जिसका उपयोग सड़क और सार्वजनिक संपत्तियों के रखरखाव में किया जाता था. 27 मार्च को जारी सरकारी आदेश के अनुसार, सीजीडी पाइपलाइन के लिए अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाया गया है. संबंधित प्रस्ताव पर 24 घंटे के भीतर निर्णय नहीं होने पर ‘डीम्ड अप्रूवल’ यानी अनुमति प्राप्त मानी जाने का प्रावधान किया गया है. इससे पाइपलाइन बिछाने के काम में होने वाली प्रशासनिक देरी कम होने की उम्मीद है.
* विकास के नाम पर महानगरपालिका के राजस्व में कटौती?
सीएनजी-पीएनजी नेटवर्क का विस्तार निश्चित रूप से नागरिकों के लिए उपयोगी है. इससे घरेलू और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को गैस आपूर्ति की सुविधा बढ़ेगी. लेकिन दूसरी ओर सवाल यह उठ रहा है कि स्थानीय स्वराज्य संस्था के राजस्व में कमी की भरपाई कैसे होगी. सड़क खुदाई और रोड रेस्टोरेशन से संबंधित शुल्क तथा विभिन्न परमिट फीस माफ किए जाने से कंपनियों को आर्थिक राहत मिलेगी, लेकिन महानगरपालिका को होने वाले संभावित राजस्व नुकसान की भरपाई के संबंध में स्पष्ट वित्तीय प्रावधान दिखाई नहीं देता. ऐसे में सुविधा कंपनियों को मिलने के साथ महानगरपालिका के आर्थिक संसाधनों पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
* कोंडेश्वर से पाइपलाइन बिछाने का काम जारी
शहर में कोंडेश्वर बस डिपो से लगभग 14 किलोमीटर की दूरी तक भूमिगत गैस पाइपलाइन बिछाने का काम शुरू हो चुका है. बताया गया है कि इस परियोजना का करीब 50 से 60 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और निर्धारित समय के अनुसार इसे 30 तारीख तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
* सड़कें टूटने के बाद मरम्मत कौन करेगा?
सबसे बड़ा सवाल सड़क की गुणवत्ता को लेकर है. सरकारी निर्देशों के अनुसार संबंधित सीजीडी कंपनियों को खुदाई के बाद अपने खर्च पर सड़क और सार्वजनिक संपत्ति को यथासंभव पूर्व स्थिति में बहाल करना होगा. इसके लिए कंपनियों से गारंटी लेने के निर्देश भी दिए गए हैं. हालांकि, पाइपलाइन बिछाने के बाद सड़क की मरम्मत वास्तव में कितनी गुणवत्तापूर्ण होती है, यह महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा. सड़क की खुदाई के बाद यदि कुछ समय में दोबारा गड्ढे या दरारें उत्पन्न होती हैं, तो उनकी मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी होगी और इसकी निगरानी कैसे की जाएगी, इस पर स्पष्टता जरूरी है.
* महानगरपालिका के सामने गुणवत्ता नियंत्रण की चुनौती
शुल्क माफ होने के बावजूद सड़क की खुदाई और पुनर्स्थापना के काम की गुणवत्ता पर नियंत्रण रखने की जिम्मेदारी महानगरपालिका प्रशासन की रहेगी. ऐसे में निगम को यह सुनिश्चित करना होगा कि पाइपलाइन कंपनियां सड़क को केवल औपचारिक रूप से नहीं, बल्कि निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुसार पूर्व स्थिति में लाएं.
* 24 घंटे काम की अनुमति
सीजीडी कंपनियों को आवश्यकता के अनुसार 24 घंटे काम करने की अनुमति भी दी गई है. पाइपलाइन बिछाने, सड़क की खुदाई और उसके बाद पुनर्स्थापना के लिए संबंधित विभागों के बीच समन्वय का प्रावधान किया गया है. इससे परियोजना को तेजी से पूरा करने में मदद मिल सकती है, लेकिन रात के समय होने वाले काम के दौरान यातायात, सुरक्षा और नागरिकों की सुविधा का भी ध्यान रखना जरूरी होगा. अब मुख्य सवाल यही है कि गैस पाइपलाइन विस्तार से नागरिकों को सुविधा मिलने के साथ महानगरपालिका के राजस्व और शहर की सड़कों की गुणवत्ता पर पड़ने वाले असर की भरपाई किस तरह की जाएगी.

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