20 ग्राम-20 ग्राम सोना निकालकर चलता रहा खेल!
मुथूट घोटाले में हुआ नया खुलासा

* ऑडिट रिपोर्ट में खुलासे, 1.700 किलो सोना बरामद
* एक और सोनार से रिकवरी की तैयारी
* अब तक 150 से अधिक शिकायतें आयी सामने
* करोड़ों की संपत्तियां जांच के घेरे में
* आरोपियों की संपत्तियां होंगी जब्त
अमरावती/दि.18 – अमरावती की विमको टावर स्थित मुथूट फिनकॉर्प शाखा में सामने आए बहुचर्चित गोल्ड लोन घोटाले की जांच में रोज नए खुलासे हो रहे हैं. अब तक 150 से अधिक शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जबकि पुलिस जांच और कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे यह घोटाला प्रारंभिक अनुमान से कहीं अधिक बड़ा दिखाई दे रहा है. मामले में अब तक 1 किलो 700 ग्राम सोने के आभूषण बरामद किए जा चुके हैं, वहीं आरोपियों द्वारा कथित रूप से फर्जीवाड़े की रकम से खरीदी गई करोड़ों रुपये की संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है.
सिटी कोतवाली पुलिस के अनुसार, मुथूट फिनकॉर्प द्वारा कराए गए आंतरिक ऑडिट में यह बात सामने आई है कि ग्राहकों द्वारा गिरवी रखे गए सोने में कथित रूप से हेराफेरी की जाती थी. जांच में पता चला है कि यदि कोई ग्राहक 100 ग्राम सोना गिरवी रखता था, तो रिकॉर्ड में केवल 80 ग्राम सोने के आधार पर ऋण प्रक्रिया की जाती थी और शेष 20 ग्राम सोना कथित मिलीभगत से अलग निकाल लिया जाता था. यही तरीका लंबे समय तक अपनाए जाने की आशंका जताई जा रही है. ऑडिट रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि जब ग्राहक अपना कर्ज चुकाकर सोना वापस लेने पहुंचते थे, तब उनसे पूरी राशि वसूल कर ली जाती थी, लेकिन सोना लौटाने के बजाय उन्हें केवल कच्ची रसीद देकर टालमटोल की जाती थी. कई ग्राहकों ने पुलिस को दिए बयानों में इसी प्रकार की शिकायतें दर्ज कराई हैं. अब तक प्राप्त शिकायतों की संख्या 150 के पार पहुंच चुकी है.
जांच के दौरान पुलिस ने शहर के विभिन्न सराफा कारोबारियों के यहां छापेमारी कर बड़ी मात्रा में सोना बरामद किया है. हाल ही में एक सोनार के पास से 1 किलो 260 ग्राम सोना जब्त किया गया, जबकि इससे पहले दो अन्य कारोबारियों के यहां से 89.2 ग्राम सोना बरामद हुआ था. वहीं आज करीब 360 ग्राम सोना जब्त किया गया. इस प्रकार कुल 1 किलो 700 ग्राम सोने के आभूषण पुलिस के कब्जे में आ चुके हैं. बरामद दागिनों में मंगलसूत्र, चेन, अंगूठियां, बांगड़ियां और अन्य आभूषण शामिल हैं. पुलिस के मुताबिक, अब दिलीप करूले नामक एक अन्य सोनार से भी रिकवरी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. इसके लिए पुलिस की एक टीम रवाना की गई है. जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि इस कार्रवाई से और बड़ी मात्रा में सोना बरामद हो सकता है तथा घोटाले के नेटवर्क से जुड़े कई अहम तथ्य सामने आ सकते हैं.
मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह भी है कि मुथूट फिनकॉर्प की ओर से भी सिटी कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है. हालांकि कानूनन एक ही मामले में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकतीं, इसलिए कंपनी द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट और ऑडिट रिपोर्ट को पहले से दर्ज प्रकरण के साथ जोड़ा जा रहा है. पुलिस का कहना है कि इन दस्तावेजों से जांच को और मजबूती मिलेगी.
* कमाई का अधिकांश हिस्सा शराब पार्टियों पर खर्च
जांच में यह भी सामने आया है कि घोटाले से अर्जित रकम का इस्तेमाल आरोपियों द्वारा आलीशान जीवनशैली पर किया जा रहा था. पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस कथित अवैध कमाई का एक हिस्सा परमिट रूम में आयोजित शराब पार्टियों पर खर्च किया जाता था. इतना ही नहीं, कई बार ऐसे आयोजनों में उन लोगों को भी शामिल किया जाता था, जिन्हें बाद में कथित तौर पर इस जाल में फंसाया जाना होता था. पुलिस इस पहलू की भी गहराई से जांच कर रही है.
आर्थिक जांच के दौरान मुख्य आरोपी और तत्कालीन शाखा प्रबंधक शुभम वासेवाय की संपत्तियों को लेकर भी चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. पुलिस के अनुसार उसने कथित फर्जीवाड़े की रकम से लगभग 2.15 करोड़ रुपये की कृषि भूमि, 25 लाख रुपये का प्लॉट तथा तीन अन्य भूखंडों के लिए एग्रीमेंट किए थे. इसके अलावा उसने एक कार भी खरीदी थी. वहीं एक अन्य आरोपी ने करीब 75 लाख रुपये का मकान और दो चारपहिया वाहन खरीदे थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने एफआईआर में एमपीआईडी एक्ट की धाराएं जोड़ दी हैं. इसके तहत आरोपियों द्वारा कथित रूप से फर्जीवाड़े की रकम से खरीदी गई संपत्तियों को जब्त कर न्यायालय की अनुमति से नीलाम किया जा सकता है. अधिकारियों का कहना है कि यदि यह प्रक्रिया पूरी होती है तो पीड़ित ग्राहकों को उनके नुकसान की भरपाई कराने में मदद मिल सकती है.
फिलहाल मामले में गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है. शाखा के अन्य कर्मचारियों और कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की भूमिका की भी जांच चल रही है. पुलिस को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में और बरामदगी, नए खुलासे तथा अतिरिक्त गिरफ्तारियां हो सकती हैं. बढ़ती शिकायतों और सामने आ रहे तथ्यों को देखते हुए यह मामला अब अमरावती के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जाने लगा है.





