नाबालिग से अप्राकृतिक यौन अत्याचार के आरोपी को 20 साल की सजा
5 हजार रुपए जुर्माना, नहीं भरने पर छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास

मोर्शी /दि.20– नाबालिग बच्चे को जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ अप्राकृतिक यौन अत्याचार करने के मामले में वरूड स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है. जुर्माना नहीं भरने पर आरोपी को छह माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा.
यह घटना 26 फरवरी 2021 की है. मोर्शी तहसील के हिवरखेड़ निवासी शामू उर्फ झामू शंकरराव घागरे (40) ने खेल रहे एक नाबालिग बच्चे को जान से मारने की धमकी देकर उसके साथ अप्राकृतिक यौन अत्याचार किया था. शिकायत के आधार पर मोर्शी पुलिस थाने में धारा 377, 506 तथा पॉक्सो अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था.
* भौतिक और तकनीकी सबूत जुटाए
मामले की जांच महिला पुलिस उपनिरीक्षक माया वैश्य ने की. जांच के दौरान पुलिस ने भौतिक एवं तकनीकी सबूत, गवाहों के बयान और अन्य कानूनी साक्ष्य एकत्र किए. इन साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया. वरूड स्थित अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश अमिताभ ए. पंचभाई ने मामले में प्रस्तुत सबूत और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी करार दिया. न्यायालय ने पॉक्सो अधिनियम की धारा 4(3) के तहत आरोपी को 20 वर्ष के कारावास और 5 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई.
* वरिष्ठ अधिकारियों ने की मामले की समीक्षा
मामले की सुनवाई के दौरान मोर्शी के पुलिस निरीक्षक राहुल आठवले ने प्रकरण को विशेष रूप से अपनाते हुए समय-समय पर इसकी समीक्षा की. उन्होंने शासकीय विधि अधिकारी एड. प्रशांत देशमुख और पैरवी अधिकारी पुलिस हवलदार पूनम होले को आवश्यक मार्गदर्शन दिया. पैरवी अधिकारी पूनम होले ने भी गवाहों को न्यायालय में बयान दर्ज कराते समय आवश्यक जानकारी और मार्गदर्शन प्रदान किया. मामले की पुलिस अधीक्षक निकेतन कदम, अपर पुलिस अधीक्षक दत्ता तोटेवाड़ और उपविभागीय पुलिस अधिकारी उमेश पाटील ने भी समय-समय पर समीक्षा की और जांच अधिकारियों को आवश्यक मार्गदर्शन दिया. पुलिस अधिकारियों ने कहा कि न्यायालय के इस फैसले से पीड़ित पक्ष को न्याय मिला है





