स्वास्थ्य मंत्री से मिलने से पहले ही प्रहार के 7 कार्यकर्ता हिरासत में
डफरीन अस्पताल में जमकर नारेबाजी

* वेंटिलेटर सप्लाई करने वाली कंपनी और ठेकेदार पर एफआईआर की मांग
* तीन नवजातों की मौत के बाद आक्रोश भड़का
* मृतकों के परिजनों को 25-25 लाख रुपये मुआवजा देने की भी मांग
अमरावती/दि.24- जिला महिला अस्पताल (डफरीन) के एनआईसीयू में सोमवार तड़के करीब 3.30 बजे लगी भीषण आग में तीन नवजात शिशुओं की दर्दनाक मौत के बाद अस्पताल प्रशासन और संबंधित ठेकेदार-कंपनी के खिलाफ आक्रोश बढ़ता जा रहा है. इसी मामले में स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर से मुलाकात कर मांगों का ज्ञापन सौंपने पहुंचे प्रहार के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने मंत्री के आगमन से पहले ही हिरासत में ले लिया. इससे डफरीन अस्पताल परिसर में कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति निर्माण हो गई.
प्रहार के महानगर प्रमुख बंटी रामटेके के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में जोरदार नारेबाजी करते हुए घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की. कार्यकर्ताओं की प्रमुख मांग थी कि मृत नवजातों के परिजनों की लिखित शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की जाए तथा प्रत्येक मृतक के परिवार को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए.
* मंत्री से मिलने की अनुमति मांगी, पुलिस ने रोका
स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर के डफरीन अस्पताल पहुंचने से पहले प्रहार कार्यकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन से मंत्री से मुलाकात करने और अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने की अनुमति मांगी. हालांकि पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया. इसके बाद कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में ही जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी. इस दौरान बंटी रामटेके के साथ गणेशा मारोडकर, प्रशांत शिरभाते, चेतन बरडे, भीम ब्रिगेड के राजेश वानखड़े, क्रांति सेना के रितेश तेलमोरे सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे.
* ‘निकृष्ट वेंटिलेटर के कारण हुआ हादसा’-प्रहार
प्रहार नेताओं ने आरोप लगाया कि एनआईसीयू में इस्तेमाल की जा रही निकृष्ट दर्जे की वेंटिलेटर मशीन के कारण यह गंभीर हादसा हुआ है. उनका कहना था कि संबंधित वेंटिलेटर की आपूर्ति करने वाली कंपनी और ठेकेदार के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए. बंटी रामटेके ने आरोप लगाया कि वर्ष 2022-23 में भी इसी संबंधित कंपनी द्वारा निकृष्ट दर्जे के वेंटिलेटर की आपूर्ति किए जाने के बाद डफरीन अस्पताल में भीषण आग लगी थी, जिसमें नौ नवजात शिशुओं की मौत हुई थी. इसके बावजूद उसी कंपनी को दोबारा ठेका दिया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है. रामटेके ने कहा कि यदि पहले की घटना के बाद भी संबंधित कंपनी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और उसी कंपनी को दोबारा काम दिया गया, तो यह प्रशासन की गंभीर लापरवाही है. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की.
* पुलिस हिरासत में लिए जाने से कार्यकर्ता संतप्त
स्वास्थ्य मंत्री के आगमन का समय नजदीक आते ही पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेने का प्रयास किया. कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया. इसके बाद पुलिस ने प्रहार के सात कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया. कार्यकर्ताओं का कहना था कि वे किसी प्रकार का व्यवधान पैदा करने नहीं, बल्कि तीन मासूम नवजातों की मौत के मामले में जवाबदेही तय करने और पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने के लिए स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन सौंपना चाहते थे. मंत्री से मिलने से पहले ही हिरासत में लिए जाने से कार्यकर्ताओं में भारी रोष देखा गया.
* डॉ. अलीम पटेल को भी मंत्री से नहीं मिलने दिया
प्रहार कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद यूनायटेड रिपब्लिकन फोरम के अध्यक्ष डॉ. अलीम पटेल, किरण गुडधे, प्रहार के प्रवक्ता जीतू दुधाने सहित अन्य लोग भी स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपना चाहते थे. हालांकि पुलिस ने उन्हें भी मंत्री से मिलने की अनुमति नहीं दी. इससे इन कार्यकर्ताओं में भी तीव्र नाराजगी देखी गई. उनका कहना था कि इतने गंभीर मामले में जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों को अपनी बात स्वास्थ्य मंत्री तक पहुंचाने का अवसर दिया जाना चाहिए था.
* तीन नवजातों की मौत ने खड़े किए गंभीर सवाल
डफरीन के एनआईसीयू में आग लगने से तीन नवजातों की मौत की घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था, मेडिकल उपकरणों की गुणवत्ता और उनकी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. अब प्रहार सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों ने दोषियों पर एफआईआर, मृतक परिवारों को मुआवजा तथा अस्पताल में उपयोग किए जा रहे उपकरणों की उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज कर दी है.





