डफरीन अस्पताल के फायर ऑडिट पर उठे गंभीर सवाल
जांच के केंद्र में आठ बड़े मुद्दे, पूरे महाराष्ट्र की निगाहें अमरावती पर

अमरावती/दि.24 – अमरावती के जिला स्त्री रुग्णालय यानी डफरीन अस्पताल के नवजात शिशु अतिदक्षता विभाग (एसएनसीयू/एनआयसीयू) में आज तड़के लगी भीषण आग ने न केवल तीन मासूम नवजातों की जान ले ली, बल्कि सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था, फायर ऑडिट और आपदा प्रबंधन प्रणाली पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं. इस दर्दनाक हादसे के बाद अब जांच कई महत्वपूर्ण तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं पर केंद्रित हो गई है. घटना के बाद सामने आए तथ्यों ने मामले को और गंभीर बना दिया है. जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, अग्निशमन विभाग तथा तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीमें जांच में जुटी हुई हैं. वहीं राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग तेज कर दी है.
हादसे के बाद सबसे अधिक चर्चा अस्पताल की फायर सेफ्टी व्यवस्था और फायर ऑडिट को लेकर हो रही है. सवाल यह उठ रहा है कि यदि अस्पताल का नियमित फायर ऑडिट किया गया था, तो फिर आग लगते ही सुरक्षा प्रणाली प्रभावी क्यों साबित नहीं हुई?विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए जा रहे प्रमुख सवालों में शामिल हैं कि, आग लगने के बाद स्प्रिंकलर सिस्टम स्वतः सक्रिय क्यों नहीं हुआ, फायर अलार्म ने समय रहते चेतावनी क्यों नहीं दी, आग को प्रारंभिक स्तर पर नियंत्रित क्यों नहीं किया जा सका, अग्निशमन उपकरण प्रभावी ढंग से काम क्यों नहीं कर पाए, वर्ष 2023 में हुई आग की घटना के बाद कौन-कौन से सुधारात्मक कदम उठाए गए थे, क्या उन सुधारों का वास्तविक पालन किया गया था, सुरक्षा उपकरणों की नियमित जांच और परीक्षण किया गया था या नहीं. इन सभी सवालों के जवाब अब जांच एजेंसियों और स्वास्थ्य विभाग को देने होंगे.
यहां यह विशेष उल्लेखनिय है कि, आज तडके घटित घटना के बाद डफरीन अस्पताल पहुंचे जिलाधिकारी आशीष येरेकर ने मीडिया के साथ कई महत्वपूर्ण जानकारियां साझा कीं. जिलाधिकारी येरेकर ने यह भी बताया कि वर्ष 2023 में भी इसी अस्पताल के एनआईसीयू में आग लगने की घटना हुई थी. उस समय भी फायर एक्सटिंग्विशर और स्प्रिंकलर सिस्टम अपेक्षित रूप से प्रभावी नहीं पाए गए थे. ऐसे में अब यह सवाल और गंभीर हो गया है कि पिछली घटना से सबक क्यों नहीं लिया गया. यदि उस समय आवश्यक सुधार और सुरक्षा उपाय पूरी तरह लागू किए गए होते, तो शायद इस बार तीन मासूम जिंदगियां बचाई जा सकती थीं.
* जांच के केंद्र में आठ बड़े सवाल
डफरीन अस्पताल अग्निकांड की जांच अब कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर केंद्रित हो गई है. प्रशासनिक और तकनीकी जांच टीमों के सामने फिलहाल कई प्रमुख सवाल हैं कि, क्या वास्तव में वेंटिलेटर में विस्फोट हुआ था, प्रारंभिक जानकारी में वेंटिलेटर में विस्फोट के बाद आग लगने की बात सामने आई है. जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा कि आग का वास्तविक स्रोत क्या था. आग लगने का वास्तविक कारण क्या था, क्या यह विद्युत शॉर्ट सर्किट था, उपकरण में तकनीकी खराबी थी या कोई अन्य कारण, इसका वैज्ञानिक परीक्षण किया जाएगा. फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम ने काम क्यों नहीं किया, यदि सुरक्षा प्रणाली कार्यरत थी, तो उसने आग लगते ही प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी, 2023 की घटना के बाद क्या सुधार किए गए थे, पिछली घटना के बाद बनाई गई रिपोर्ट और उस पर क्या कार्रवाई हुई. उपकरणों का नियमित रखरखाव हुआ था या नहीं, वेंटिलेटर, विद्युत प्रणाली, ऑक्सीजन लाइन और अन्य महत्वपूर्ण उपकरणों के मेंटेनेंस रिकॉर्ड की जांच की जाएगी. अस्पताल की दोनों लिफ्टें लंबे समय से बंद क्यों थीं, घटना के दौरान अस्पताल की दोनों लिफ्टों के बंद होने की जानकारी सामने आई है. इससे आपातकालीन निकासी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं. क्या अस्पताल आपदा प्रबंधन के लिए तैयार था, आपदा की स्थिति में अस्पताल के पास क्या मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) थी और उसका पालन हुआ या नहीं, इसकी भी समीक्षा होगी. क्या किसी स्तर पर प्रशासनिक लापरवाही हुई, जांच का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहेगा कि क्या किसी अधिकारी, तकनीकी एजेंसी या संबंधित विभाग की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ.
* पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हादसा
तीन नवजात बच्चों की मौत के बाद यह मामला केवल अमरावती तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि पूरे महाराष्ट्र में सरकारी अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था पर बहस छिड़ गई है. विभिन्न राजनीतिक दलों, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने घटना की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और राज्यभर के अस्पतालों का विशेष फायर ऑडिट कराने की मांग की है. उधर स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, अग्निशमन विभाग और तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम घटना की जांच में जुटी हुई है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह केवल एक दुर्घटना थी या इसके पीछे गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही छिपी हुई है. फिलहाल पूरे अमरावती की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि तीन मासूम जिंदगियों को निगल जाने वाली इस त्रासदी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है और क्या इस बार दोषियों की जवाबदेही तय हो पाएगी.
* जवाबदेही तय होगी या फिर दोहराई जाएगी कहानी?
डफरीन अस्पताल की इस त्रासदी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सुरक्षा ऑडिट केवल कागजों तक सीमित रह गए हैं? क्या अस्पतालों में स्थापित सुरक्षा प्रणालियों का नियमित परीक्षण होता है? और सबसे महत्वपूर्ण-क्या इस बार वास्तव में दोषियों की जवाबदेही तय होगी? फिलहाल स्वास्थ्य विभाग, जिला प्रशासन, अग्निशमन विभाग और तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम जांच में जुटी हुई है. जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि यह केवल एक दुर्घटना थी या इसके पीछे गंभीर तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही छिपी हुई थी. तीन मासूम जिंदगियों को निगल जाने वाली इस त्रासदी के बाद अब पूरे अमरावती ही नहीं, बल्कि पूरे महाराष्ट्र की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आखिर इस हादसे का जिम्मेदार कौन है और क्या इस बार व्यवस्था में वास्तविक सुधार देखने को मिलेगा.





