विभागीय समिती ने अमरावती पहुंचकर शुरू की जांच
‘डफरीन’ अग्निकांड की जांच हेतु तीन समितियां

* ड्युटी स्टाफ से 7 सदस्यीय समिती कर रही पूछताछ
* राज्यस्तरीय समिती के भी जल्द अमरावती पहुंचने की संभावना
* जिलाधीश येरेकर की अध्यक्षता के तहत जिलास्तरीय समिती गठीत
अमरावती/दि.25 – अमरावती के जिला महिला अस्पताल (डफरीन) के एनआईसीयू/एसएनसीयू विभाग में सोमवार तड़के हुए भीषण अग्निकांड में तीन नवजात शिशुओं की मौत के बाद सरकार और प्रशासन ने जांच प्रक्रिया तेज कर दी है. हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने और संभावित लापरवाही की जिम्मेदारी तय करने के लिए अब एक नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग स्तरों पर जांच शुरू कर दी गई है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर द्वारा घटना के तुरंत बाद उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए गए थे. इसके तहत राज्यस्तरीय, विभागीय और जिलास्तरीय तीन समितियां गठित की गई हैं, जो तकनीकी, प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी सभी पहलुओं की अलग-अलग जांच करेंगी. ऐसे में अब पूरे राज्य की नजर इन समितियों की रिपोर्ट और उसके आधार पर होने वाली कार्रवाई पर टिकी हुई है.
* विभागीय जांच समिति ने संभाला मोर्चा
स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित विभागीय जांच समिति मंगलवार सुबह अमरावती पहुंची और डफरीन अस्पताल में जांच शुरू कर दी. इस सात सदस्यीय समिति का नेतृत्व स्वास्थ्य विभाग की सहसंचालक (अस्पताल) डॉ. स्मिता गोलाईत (मुंबई) कर रही हैं. समिति में अमरावती विभाग की स्वास्थ्य सहसंचालक डॉ. तरंग तुषार वारे (अकोला) सहित तकनीकी विशेषज्ञ, अभियंता और अन्य अधिकारी शामिल हैं. समिति ने सबसे पहले आग से प्रभावित एनआईसीयू कक्ष का निरीक्षण किया, जहां वेंटिलेटर में विस्फोट के बाद आग फैलने की बात सामने आई है. निरीक्षण के दौरान समिति ने जले हुए उपकरणों, विद्युत व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा तंत्र और यूनिट की संरचना का बारीकी से अध्ययन किया.
* ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और नर्सों से पूछताछ
जांच समिति ने हादसे के समय ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों, नर्सों और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों से भी विस्तृत पूछताछ शुरू कर दी है. घटना के दौरान किसने सबसे पहले आग देखी, बचाव कार्य कैसे शुरू हुआ, फायर अलार्म और सुरक्षा उपकरणों ने काम किया या नहीं, तथा आग फैलने की गति कितनी थी-इन सभी पहलुओं पर जानकारी एकत्र की जा रही है. समिति सदस्य एक-एक कर्मचारी से अलग-अलग बातचीत कर रहे हैं ताकि घटनाक्रम का सटीक पुनर्निर्माण किया जा सके. इस दौरान डफरीन अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारी डॉ. अरुण सोलंके भी समिति के साथ मौजूद रहे.
* स्वास्थ्य संचालक की अध्यक्षता में राज्यस्तरीय समिति
बता दे कि, घटना के तुरंत बाद स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर ने स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त डॉ. संजय काटकर की अध्यक्षता में सात सदस्यीय राज्यस्तरीय जांच समिति गठित करने की घोषणा की थी. इस समिति में स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सा शिक्षा विभाग, महावितरण, तकनीकी विशेषज्ञों तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है. समिति को आग लगने के कारणों, वेंटिलेटर की तकनीकी स्थिति, विद्युत प्रणाली, फायर ऑडिट और प्रशासनिक जिम्मेदारियों की जांच कर निर्धारित समय में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है. सूत्रों के अनुसार राज्यस्तरीय समिति के सदस्य भी जल्द ही अमरावती पहुंचकर स्वतंत्र जांच शुरू कर सकते हैं.
* जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिलास्तरीय जांच
राज्य और विभागीय जांच के साथ-साथ जिला प्रशासन ने भी स्वतंत्र जांच शुरू कर दी है. कलेक्टर आशीष येरेकर की अध्यक्षता में गठित जिलास्तरीय समिति पूरे घटनाक्रम की स्थानीय स्तर पर जांच कर रही है. यह समिति अस्पताल प्रशासन, अग्निशमन विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग, विद्युत विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियों से जानकारी जुटा रही है. विशेष रूप से यह देखा जा रहा है कि अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था में कहीं कोई चूक तो नहीं हुई थी और यदि हुई तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है.
* तीन समितियां, एक ही लक्ष्य-सच्चाई तक पहुंचना
डफरीन अग्निकांड की जांच के लिए एक साथ तीन समितियों का गठन इस बात का संकेत है कि सरकार और प्रशासन इस मामले को अत्यंत गंभीरता से ले रहे हैं. तीनों समितियां अलग-अलग दृष्टिकोण से जांच करेंगी. जिसके तहत राज्यस्तरीय समिति तकनीकी और नीतिगत जिम्मेदारियों की जांच करेगी. विभागीय समिति अस्पताल प्रबंधन, उपकरणों और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करेगी. जिलास्तरीय समिति स्थानीय प्रशासनिक और सुरक्षा व्यवस्थाओं की पड़ताल करेगी. इन जांचों के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आग का वास्तविक कारण क्या था और क्या किसी स्तर पर लापरवाही या सुरक्षा मानकों की अनदेखी हुई थी.
* रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजर
डफरीन अग्निकांड ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था, अस्पतालों की अग्नि सुरक्षा और उपकरणों के रखरखाव को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. तीन नवजातों की मौत के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर यह हादसा कैसे हुआ और इसके लिए जिम्मेदार कौन है. तीन अलग-अलग जांच समितियों की रिपोर्ट आने के बाद ही इस प्रश्न का उत्तर सामने आएगा. पीड़ित परिवारों, नागरिकों और जनप्रतिनिधियों की मांग है कि इस बार जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि दोषियों की जवाबदेही तय कर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े.
* फायर सिस्टम की भी होगी स्वतंत्र जांच – सीएस डॉ. पवार
– सभी 36 नवजात सुरक्षित, स्वास्थ्य विभाग रख रहा नजर
इस बीच जिला शल्य चिकित्सक डॉ. विनोद पवार ने बताया कि अस्पताल में स्थापित फायर सेफ्टी सिस्टम की स्वतंत्र तकनीकी जांच निजी विशेषज्ञों के माध्यम से कराई जाएगी. उन्होंने कहा कि यह जांच विशेष रूप से इस बात पर केंद्रित होगी कि आग लगने के दौरान फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम क्यों सक्रिय नहीं हुए तथा सुरक्षा व्यवस्था में कहीं तकनीकी खामी तो नहीं थी. फायर सिस्टम की रिपोर्ट भी जांच समितियों के निष्कर्षों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
सीएस डॉ. विनोद पवार ने यह भी स्पष्ट किया कि हादसे के बाद विभिन्न अस्पतालों में स्थानांतरित किए गए सभी 36 नवजात शिशु सुरक्षित और स्वस्थ हैं. उन्होंने बताया कि इन बच्चों को पीडीएमसी, रिम्स, होप, मुरके, पारिजात और अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. स्वास्थ्य विभाग उनकी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम नियमित रूप से उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है.