ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को प्राथमिकता
‘उमेद’ से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति

मुंबई /दि.27 – ग्रामीण महिलाओं को केवल बचत समूहों तक सीमित न रखते हुए उन्हें खेती, व्यवसाय और उद्यमिता की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए राज्य सरकार विभिन्न स्तरों पर प्रयास कर रही है. महाराष्ट्र राज्य ग्रामीण जीवनोन्नति अभियान ‘उमेद’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को आधुनिक कृषि तकनीक, कृषि निविष्टियां और विभिन्न व्यवसायों के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं. इससे महिलाओं को स्थायी आय के साधन मिलने के साथ ही उनका आर्थिक स्वावलंबन भी बढ़ रहा है. यह बात मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कही.
* 408 कृषि औजार बैंक स्थापित
‘उमेद’ अभियान के तहत कृषि औजार बैंक एक महत्वपूर्ण पहल है. छोटे भू-धारक महिला किसानों को महंगी कृषि मशीनरी खरीदने के बजाय किराये पर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह योजना संचालित की जा रही है. वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान राज्य के 34 जिलों के 351 तहसीलों में 408 कृषि औजार बैंक स्थापित किए गए हैं. इससे लगभग 40,800 महिला किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है. इन केंद्रों पर विभिन्न कृषि उपकरणों के साथ ट्रैक्टर की सुविधा भी उपलब्ध है. महिला स्वयं सहायता समूहों, ग्राम संघों, प्रभाग संघों तथा महिला किसान उत्पादक कंपनियों के माध्यम से इन औजार बैंकों का संचालन किया जा रहा है. इससे ये केंद्र सामुदायिक स्वामित्व और प्रबंधन वाले कृषि सेवा केंद्रों के रूप में विकसित हो रहे हैं.
* खेती की लागत में कमी, उत्पादकता में बढ़ोतरी
महंगी कृषि मशीनरी खरीदने की आवश्यकता नहीं होने से महिला किसानों का पूंजीगत खर्च कम हो रहा है. आधुनिक मशीनों की मदद से बुआई, अंतरवर्ती खेती और कटाई जैसे कार्य समय पर पूरे होने से खेती की कार्यक्षमता बढ़ रही है. वहीं, कृषि उपकरण किराये पर देने से सामुदायिक संस्थाओं को नियमित आय का स्रोत मिल रहा है. उपकरणों के संचालन, रखरखाव और परिवहन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा हो रहे हैं.
* 54 महिला उत्पादक कंपनियां दे रहीं कृषि निविष्टियां
कृषि निविष्टियों के क्षेत्र में भी ‘उमेद’ ने महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा किए हैं. राज्य की 54 महिला किसान उत्पादक कंपनियों के पास बीज और उर्वरक बिक्री के लिए आवश्यक लाइसेंस हैं. इनके माध्यम से करीब 54 हजार महिला सदस्यों को सेवाएं दी जा रही हैं. महिला किसान उत्पादक कंपनियां किसानों की मांग को एकत्रित कर बड़े पैमाने पर बीज, खाद और अन्य कृषि निविष्टियों की खरीद करती हैं. सामूहिक खरीद के कारण गुणवत्तापूर्ण सामग्री समय पर और उचित दर पर उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है.
* राशन दुकान से ईंट निर्माण तक महिलाओं की भागीदारी
‘उमेद’ अभियान ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण को कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रखा है. स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से राशन दुकान, सीमेंट एजेंसी, ईंट निर्माण, केरोसिन एजेंसी और टाइल्स निर्माण जैसे व्यवसाय भी महिलाएं चला रही हैं. राज्य में 32 स्वयं सहायता समूहों की 58 महिलाएं राशन दुकानें, जबकि एक स्वयं सहायता समूह की 23 महिलाएं सीमेंट बिक्री का व्यवसाय संभाल रही हैं. दो समूहों की 24 महिलाएं ईंट निर्माण के व्यवसाय से जुड़ी हैं. इसके अलावा दो महिलाएं केरोसिन एजेंसी और दो महिलाएं टाइल्स निर्माण का व्यवसाय चला रही हैं.
* बचत समूहों से उद्यमिता की ओर बढ़ता कदम
‘उमेद’ के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं का सफर अब बचत और ऋण की पारंपरिक व्यवस्था से आगे बढ़कर उद्यमिता की ओर हो रहा है. व्यवसाय प्रबंधन, वित्तीय समावेशन और बाजार से जुड़ाव के लिए संस्थागत सहयोग मिलने से महिलाओं की निर्णय क्षमता और आर्थिक आत्मनिर्भरता बढ़ रही है. ग्रामीण क्षेत्रों में ही रोजगार और नियमित आय के अवसर मिलने से परिवार की आय में महिलाओं का योगदान बढ़ रहा है. साथ ही गांव के नागरिकों को आवश्यक वस्तुएं और सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो रही हैं. महिला स्वयं सहायता समूहों की सामूहिक शक्ति, आधुनिक कृषि तकनीक और उद्यमिता को संस्थागत समर्थन मिलने से ‘उमेद’ अभियान ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.





