डॉ हिशाम इनामदार के साहस को अमरावती युनानी डॉक्टर्स एसोसिएशन ने किया सम्मानित
जिला स्त्री रुग्णालय का हादसा

* अपनी जान दांव पर लगा कर 36 बच्चों को मौत के मुंह से बचाने में साहस दिखाया
अमरावती /दि.1– पिछले सोमवार 24 अगस्त को सुबह साढ़े तीन बजे का वक्त था. अमरावती शहर गहरी नींद में सोया हुआ था. जिला स्त्री अस्पताल (डफरीन) के नवजात शिशु गहन चिकित्सा विभाग में परिचारिका ललिता कासदेकर रोज की तरह बहुत ही सावधानी से नवजात बच्चों की देखभाल कर रही थीं. चारों तरफ शांति पसरी हुई थी. तभी अचानक एक वेंटिलेटर में भीषण धमाका हुआ.
छत पर लगी इमरजेंसी वॉटर सिस्टम जलकर खाक हो गई. वेंटिलेटर के टुकड़े-टुकड़े हो गए. कुछ ही पलों में पूरे वार्ड में काले घने धुएं के गुबार उठने लगे.आंखों के सामने मौत का तांडव दिख रहा था. लेकिन अपनी जान बचाने के बजाय वहां मौजूद दो डाक्टर दो परिचारिकाओं व मेडिकल स्टाफ ने जो हिम्मत दिखाई, वो अमरावती के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखी जाएगी. हमारे हाथ भले ही जल जाएं, लेकिन इन्क्यूबेटर में बंद किसी भी मासूम को मरने नहीं देंगे. इसी एक जिद के साथ डफरीन हॉस्पिटल के इन फरिश्तों ने 36 बच्चों की जान बचाई.
वेंटिलेटर में धमाका होने के बाद जब आग की लपटों ने घेर लिया था, तब ही परिचारिका ललिता कासदेकर ने बहुत संयम दिखाया. उन्हें तुरंत समझ आ गया कि वार्ड में फैली सेंट्रल ऑक्सीजन प्लांट की पाइपलाइन की वजह से आग का बड़ा धमाका हो सकता है. उन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर तुरंत वरिष्ठ डॉक्टरों व सुरक्षा कर्मचारियों को चिल्लाकर बताया व सेंट्रल ऑक्सीजन प्लांट को तुरंत बंद करवाया. ऑक्सीजन प्लांट बंद करने में अगर कुछ मिनट की भी देरी होती, तो पूरी इमारत आग की चपेट में आ जाती और बहुत बड़ा हादसा हो जाता.
* सभी ने वार्ड में लगाई दौड़
ललिता की आवाज सुनकर इंचार्ज अधिकारी डॉ. हिशाम इनामदार, डॉ मिनल औघड़ परिचारिका माधुरी धुमाळे, आकाश चव्हाण, जयश्री थिंकर, रिता दाहे के साथ दीपाली गंभीर व सुरेखा धनविजय ने बिना कुछ सोचे सीधे आग की तरफ दौड़ लगा दी. आग और धुएं के बीच इस टीम ने अपनी जान पर खेलकर सीधे धमाका हुए वार्ड से 9 नवजात बच्चों को बाहर निकाला. दुर्भाग्य से आग की तीव्रता के कारण 3 बच्चों की जान नहीं बचाई जा सकी.
* डॉ हिशाम इनामदार ने साहस व हिम्मत दिखाई
इसी दौरान बचाव कार्य में भागदौड़ करने व आग के धुएं की वजह से डॉ. हिशाम इनामदार चक्कर खाकर गिर पड़े. हिम्मत से काम लिया उन्होंने ने अपने आप को संभाला व हिम्मत से बचाव कार्य में डटे रहे. बच्चों को आग से खींचकर निकालते समय परिचारिका ललिता कासदेकर और सुरेखा धनविजय के हाथ गंभीर रूप से जल गए. अपने जख्मों के दर्द को भुलाकर ये महिला कर्मचारी बच्चों को बचाने के लिए दौड़ती रहीं. इस पूरी मेडिकल व सुरक्षा टीम की अथक हिम्मत की वजह से आज 36 मासूमों की जान बच पाई है. पूरे जिले में इन फरिश्तों की तारीफ हो रही है. डॉ हिशाम इनामदार सर व उनकी पुरी टिम के साहस को देखते हुए अमरावती युनानी डॉक्टर्स एसोसिएशन ने डॉ हिशाम इनामदार सर को सम्मानित किया. सत्कार करते समय अमरावती युनानी डॉक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ मसूद रफत सर , उपाध्यक्ष डॉ फिरोज खान सर, सचिव डॉ असलम भारती, डॉ इक़बाल पठान सर, डॉ जैनूल अबेदिन, डॉ मोहम्मद आसिफ, डॉ जमील खान, डॉ मोहम्मद आकिब, डॉ मोहम्मद साकिब, अदि मौजूद थे.





