गणेशोत्सव में ‘धिंगाना’ और गौतमी पाटील की ‘लावणी’ पर विवाद

सांसद मेधा कुलकर्णी भड़कीं, अश्लील अंगविक्षेप कराने पर जताई आपत्ति

* बोलीं-उत्सव धार्मिकता की बजाय विकृत रूप न लें
पुणे./दि.31 – गणेशोत्सव और अन्य धार्मिक आयोजनों में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण तथा मनोरंजन के नाम पर होने वाले कार्यक्रमों को लेकर भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी ने कड़ा रुख अपनाया है. पुणे में गणेशोत्सव के दौरान नृत्यांगना गौतमी पाटील को आमंत्रित किए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताते हुए सवाल उठाया कि ऐसे कार्यक्रमों का धार्मिक उत्सव से आखिर क्या संबंध है.
सांसद मेधा कुलकर्णी ने कहा कि उत्सवों का स्वरूप धीरे-धीरे बदलकर ऐसा हो रहा है, जिससे आम नागरिकों के साथ-साथ पर्यावरण और पशु-पक्षियों को भी परेशानी हो रही है. तेज आवाज में डीजे और लाउडस्पीकर बजाने से बीमार, बुजुर्ग और घरों में आराम कर रहे लोगों को परेशानी होती है. इसलिए उत्सवों के दौरान नियमों का पालन और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण जरूरी है.
लावणी नर्तिका गौतमी पाटील को गणेशोत्सव में बुलाए जाने पर कुलकर्णी ने कहा कि यदि धार्मिक आयोजन के नाम पर इस तरह के नृत्य और अंगविक्षेप किए जा रहे हैं, तो इसे धार्मिकता नहीं कहा जा सकता. उन्होंने धार्मिक आयोजनों में मर्यादा बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि वे स्वयं आस्तिक हैं और धर्म को मानती हैं, लेकिन धर्म के नाम पर होने वाले किसी भी ऐसे आयोजन का समर्थन नहीं किया जा सकता, जो उत्सव के मूल उद्देश्य से भटक जाए. उनके अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण और भगवान गणेश के नाम पर होने वाले आयोजनों में उनके विचारों और धार्मिक मूल्यों को समझना भी आवश्यक है.
सांसद मेधा कुलकर्णी ने कहा कि स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि किसी व्यक्ति को अपनी इच्छा के अनुसार दूसरों को परेशान करने की छूट मिल जाए. यदि किसी के उत्सव और मनोरंजन से दूसरे नागरिकों के स्वास्थ्य, आराम या अधिकार प्रभावित होते हैं, तो यह उचित नहीं है. उन्होंने विशेष रूप से बीमार और बुजुर्ग नागरिकों का उल्लेख करते हुए कहा कि रात-दिन तेज आवाज में डीजे, प्लाज्मा और बड़े साउंड सिस्टम का इस्तेमाल दूसरों के लिए परेशानी का कारण बनता है. ऐसे मामलों में आयोजकों को संवेदनशीलता दिखानी चाहिए. नवरात्रि के दौरान डांडिया और गरबा कार्यक्रमों में अश्लील या आपत्तिजनक गीत बजाए जाने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई. उनका कहना है कि धार्मिक आयोजनों को अपनी मूल भावना और मर्यादा के अनुरूप मनाया जाना चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि नियम किसी एक धर्म या समुदाय के लिए नहीं, बल्कि सभी के लिए समान होने चाहिए. किसी भी धर्म का त्योहार, जयंती या पुण्यतिथि हो, सड़क पर ऐसा आयोजन नहीं होना चाहिए जिससे आम नागरिकों को परेशानी हो.
भाजपा सांसद मेधा कुलकर्णी ने पुणे के गणेश मंडलों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे नागरिकों की परेशानी को ध्यान में रखते हुए उत्सव मनाएं. उन्होंने कहा कि शहर के घनी आबादी वाले इलाकों, सोसायटियों और बाहरी क्षेत्रों में बड़ी संख्या में गणेश मंडल सक्रिय हैं. ऐसे में तेज आवाज में डीजे और अश्लील गीतों का इस्तेमाल नागरिकों के लिए गंभीर परेशानी बन सकता है. उन्होंने गणेश मंडलों से धार्मिक वातावरण में उत्सव मनाने और अनावश्यक शोर-शराबे से बचने की अपील की. कुलकर्णी ने स्पष्ट किया कि उत्सव मनाने का अधिकार सभी को है, लेकिन इस अधिकार का इस्तेमाल इस तरह नहीं होना चाहिए कि उससे किसी दूसरे व्यक्ति के अधिकारों का उल्लंघन हो.

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