राज्य की सभी स्कूलों में साल में चार बार होगा ‘माता-पिता शैक्षणिक सम्मेलन’
शिक्षा विभाग का बड़ा फैसला, अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने पर जोर, शिक्षक संगठनों ने जताई नाराजगी

पुणे/दि. 31 – महाराष्ट्र सरकार ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति में अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य की सभी सरकारी, स्थानीय स्वराज्य संस्था संचालित तथा अनुदानित निजी स्कूलों में वर्ष में चार बार ‘माता-पालक शैक्षणिक सम्मेलन’ आयोजित करने का निर्णय लिया है. शिक्षा आयुक्तालय द्वारा जारी निर्देशों के अनुसार यह उपक्रम शैक्षणिक वर्ष 2026-27 से राज्यभर में लागू किया जाएगा. निर्देशों के अनुसार प्रत्येक वर्ष जुलाई, अक्टूबर, जनवरी और अप्रैल माह के पहले शनिवार को विद्यालय स्तर पर अभिभावक मेळावे आयोजित किए जाएंगे. प्राथमिक और माध्यमिक स्तर की सभी माध्यमों की स्कूलों को इस योजना में शामिल किया गया है.
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह कार्यक्रम पारंपरिक अभिभावक बैठक की तरह केवल औपचारिकता नहीं होगा. इसका उद्देश्य शिक्षकों और अभिभावकों के बीच नियमित संवाद स्थापित करना, विद्यार्थियों की शैक्षणिक समस्याओं को समझना तथा उनके सर्वांगीण विकास के लिए साझा रणनीति तैयार करना है. बैठक में विद्यार्थियों की पढ़ाई, विषयवार प्रगति, उपस्थिति, व्यवहार, अध्ययन की आदतें, घर का शैक्षणिक वातावरण और पढ़ने की रुचि जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी.
* पढ़ाई, स्वास्थ्य और सुरक्षा पर भी चर्चा
सम्मेलन में विद्यार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ उनके स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, सुरक्षा, बाल अधिकार और बाल संरक्षण जैसे विषयों पर भी अभिभावकों को जानकारी दी जाएगी. शिक्षा विभाग का मानना है कि विद्यार्थियों के विकास में स्कूल और परिवार दोनों की समान भूमिका होती है, इसलिए अभिभावकों की सहभागिता बढ़ाना आवश्यक है.
* सरकारी योजनाओं की मिलेगी जानकारी
अभिभावकों को विद्यार्थियों के लिए संचालित विभिन्न सरकारी योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी. इनमें मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, गणवेश, प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना, छात्र लाभ योजनाएं, डिजिटल शिक्षा, नए पाठ्यक्रम और अन्य शैक्षणिक सुविधाएं शामिल हैं. विद्यार्थियों के अन्य शैक्षणिक रिकॉर्ड अद्यतन रखने के लिए आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी भी दी जाएगी.
* ‘निपुण महाराष्ट्र’ अभियान से जोड़ा गया
शिक्षा विभाग ने इस पहल को ‘निपुण महाराष्ट्र’ अभियान से भी जोड़ा है. इसके तहत अभिभावकों को बच्चों की बुनियादी साक्षरता, लेखन और गणितीय कौशल विकसित करने के लिए घर पर सहयोग करने का मार्गदर्शन दिया जाएगा.
* स्कूल गतिविधियों में बढ़ेगा अभिभावकों का सहभाग
विभाग का उद्देश्य अभिभावकों को केवल बच्चों की पढ़ाई तक सीमित न रखते हुए स्कूल के वार्षिक कार्यक्रमों, प्रतियोगिताओं, शैक्षणिक यात्राओं और सांस्कृतिक गतिविधियों से भी जोड़ना है. इसके लिए स्कूल प्रबंधन समितियों और मुख्याध्यापकों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है.
* शिक्षक संगठनों ने उठाए सवाल
शिक्षा विभाग के इस निर्णय पर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है. उनका कहना है कि शिक्षकों पर पहले से ही जनगणना, मतदाता सूची पुनरीक्षण (एसआईआर) और अन्य प्रशासनिक कार्यों का अतिरिक्त बोझ है. ऐसे में एक और अनिवार्य कार्यक्रम से शिक्षण कार्य प्रभावित हो सकता है. शिक्षक प्रतिनिधि गिरीश सामंत ने शिक्षा आयुक्त को पत्र लिखकर कहा है कि शिक्षकों का बड़ा समय गैर-शैक्षणिक कार्यों में व्यतीत हो रहा है, जिससे विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है. उन्होंने मांग की है कि नए उपक्रमों को लागू करते समय शिक्षकों के कार्यभार पर भी विचार किया जाए.
* शिक्षा विभाग का दावा
शिक्षा विभाग का कहना है कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में सुधार, ड्रॉपआउट रोकने, अध्ययन संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और घर-स्कूल समन्वय बढ़ाने के लिए यह पहल महत्वपूर्ण साबित होगी. विभाग ने सभी स्कूलों को सम्मेलनों का विस्तृत रिकॉर्ड और प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए हैं. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने की यह पहल विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास में कितना प्रभावी योगदान देती है और शिक्षकों की बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच इसका क्रियान्वयन किस प्रकार होता है.





