दो नवजात आग में जले, एक का धुएं में दम घुटा

डफरीन की उस ‘काली रात’ का पोस्टमार्टम खुलासा

* तीनों मौतों का प्राथमिक कारण आया सामने
* पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली मौत की भयावह तस्वीर
* अंतिम रिपोर्ट और विसरा जांच का इंतजार
अमरावती/दि.2 – जिला महिला अस्पताल (डफरीन) के नवजात शिशु गहन चिकित्सा कक्ष में 24 अगस्त की तड़के हुए अग्निकांड में तीन नवजातों की मौत को लेकर प्राथमिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने हादसे की भयावहता सामने ला दी है. रिपोर्ट के अनुसार, दो नवजातों की मौत गंभीर रूप से झुलसने के कारण हुई, जबकि तीसरे नवजात ने आग से निकले धुएं के कारण दम तोड़ दिया. हालांकि, चिकित्सकीय जांच अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है. तीनों शवों के विसरा और अन्य आवश्यक नमूने सुरक्षित रखे गए हैं. इसलिए फिलहाल सामने आए निष्कर्षों को प्राथमिक माना जा रहा है. अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की अंतिम पुष्टि होगी.
* 75.5 प्रतिशत तक जल गया था बच्ची का शरीर
मृत नवजातों में किरण बेठेकर की नौ दिन की बच्ची भी शामिल थी. प्राथमिक पोस्टमार्टम के दौरान उसके शरीर का 75.5 प्रतिशत हिस्सा जला हुआ पाया गया. आग के कारण उसके हाथ-पैर समेत शरीर के विभिन्न हिस्सों में गंभीर चोटें और जलने के निशान थे. रिपोर्ट में गंभीर रूप से जलने से हुई चोटों को उसकी मौत का प्रमुख कारण बताया गया है. घटना के समय बच्ची वेंटिलेटर पर उपचाराधीन थी. वेंटिलेटर में विस्फोट के बाद आग फैलने से वह उसकी चपेट में आई थी.
* दूसरे नवजात का 20 प्रतिशत शरीर झुलसा
गायत्री चोपडे के नौ दिन के नवजात का करीब 20 प्रतिशत शरीर झुलस गया था. पोस्टमार्टम में गंभीर जलने की चोटों के साथ आग का धुआं श्वसन मार्ग में जाने की बात भी सामने आई. इस नवजात की मौत गंभीर रूप से जलने तथा धुएं के कारण सांस लेने में आई बाधा के संयुक्त प्रभाव से होने की जानकारी प्राथमिक रिपोर्ट में सामने आई है.
* चार प्रतिशत जलने के बावजूद नहीं बची एक दिन की जिंदगी
पूजा बोरगे के महज एक दिन के नवजात की मौत का कारण आग से निकला धुआं बताया गया है. उसके शरीर पर लगभग चार प्रतिशत जलने के निशान पाए गए. हालांकि शरीर का अपेक्षाकृत कम हिस्सा जला था, लेकिन आग से निकला धुआं नाक के रास्ते श्वसन मार्ग में पहुंचने के कारण उसे सांस लेने में गंभीर परेशानी हुई. प्राथमिक रिपोर्ट के अनुसार दम घुटने से उसकी मौत हुई.
* अब पोस्टमार्टम के बाद जांच के केंद्र में ये सवाल
तीनों नवजातों की मौत के प्राथमिक कारण सामने आने के बाद अब जांच का अगला चरण और महत्वपूर्ण हो गया है. जांच एजेंसियों के सामने सवाल है कि, वेंटिलेटर में विस्फोट आखिर किस कारण हुआ, क्या वेंटिलेटर में तकनीकी खराबी पहले से मौजूद थी, आग लगने के बाद फायर अलार्म और अग्निशमन प्रणाली ने समय पर काम किया, क्या फायर कंट्रोल रूम तक तत्काल पहुंच संभव थी, क्या अस्पताल के कर्मचारियों को फायर सिस्टम चलाने का पर्याप्त प्रशिक्षण मिला था, क्या नवजातों को सुरक्षित निकालने के लिए आपातकालीन व्यवस्था पर्याप्त थी, फायर एवं इलेक्ट्रिकल ऑडिट वास्तव में कब और किस स्तर पर हुआ था, यदि सुरक्षा व्यवस्था सुचारु थी तो आग के दौरान उसका प्रभावी इस्तेमाल क्यों नहीं हो सका.
* अंतिम रिपोर्ट से तय होगी तस्वीर
डफरीन अग्निकांड की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय सत्यशोधन समिति ने घटनास्थल का निरीक्षण कर अस्पताल प्रशासन, चिकित्सकों, नर्सों, तकनीकी कर्मचारियों और अन्य संबंधित लोगों से जानकारी जुटाई है. वेंटिलेटर, विद्युत व्यवस्था, अग्निशमन प्रणाली और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था की भी जांच की जा रही है. अब प्राथमिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ तकनीकी जांच और सुरक्षित नमूनों की रिपोर्ट को जोड़कर हादसे की पूरी तस्वीर तैयार की जाएगी. इसके बाद यह तय करना महत्वपूर्ण होगा कि तीन नवजातों की मौत केवल एक आकस्मिक तकनीकी दुर्घटना थी अथवा इसके पीछे सुरक्षा संबंधी चूक, प्रशासनिक लापरवाही या अन्य किसी स्तर की जिम्मेदारी भी थी. तीन मासूमों की मौत के कारण सामने आ गए हैं, लेकिन उनकी मौत के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों और व्यक्तियों की पहचान होना अभी बाकी है.

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