अमरावती मनपा में सफाई ठेका होगा ‘रिकॉल’!
कोणार्क कंपनी को मिला ठेका अब पडा खतरे में

* पी. गोपीनाथ कंपनी ने नागपुर हायकोर्ट में दायर की थी याचिका
* हायकोर्ट ने आज सुनवाई के दौरान दिया मौखिक आदेश
* आज शाम तक लिखित फैसला आने की पूरी उम्मीद
* कल मनपा आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले ने बुलाई मनपा की आपात बैठक
* निविदा रिकॉल के बाद नए ठेकेदार की नियुक्ती तक कोणार्क के पास ही रहेगा साफसफाई का जिम्मा
* पूरा ठेका होगा रिकॉल या पार्ट-ए व पार्ट-बी को रिकॉल किया जाएगा, यह अभी तय नहीं
अमरावती/दि.2 – अमरावती महानगरपालिका के इतिहास के सबसे चर्चित और विवादित सफाई ठेकों में शामिल कोणार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रा. लि. का करोड़ों रुपये का सफाई ठेका अब संकट में दिखाई दे रहा है. नागपुर खंडपीठ में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट द्वारा दिए गए मौखिक निर्देशों के बाद मनपा प्रशासन, कोणार्क कंपनी और राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है. सूत्रों के अनुसार, न्यायालय ने सफाई ठेके की निविदा प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए ठेका रिकॉल (निविदा वापस लेकर पुनः प्रक्रिया शुरू करने) की दिशा में कदम उठाने के संकेत दिए हैं. अब सभी की निगाहें न्यायालय के लिखित आदेश और मनपा प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं.
बता दे कि, यह पूरा मामला उस समय शुरू हुआ था, जब सफाई ठेके की निविदा प्रक्रिया में शामिल पी. गोपीनाथ कंपनी ने अमरावती मनपा द्वारा कोणार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर को दिए गए एकल सफाई ठेके को चुनौती देते हुए नागपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. याचिका में निविदा प्रक्रिया की पारदर्शिता, पात्रता शर्तों और ठेका आवंटन की वैधता पर प्रश्न उठाए गए थे. गुरुवार को न्यायमूर्ति अनिल किलोर और रजनीश व्यास की दो सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई में पी. गोपीनाथ कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अश्विन देशपांडे और वेदांत पांडे ने पक्ष रखा, जबकि मनपा और कोणार्क कंपनी की ओर से अधिवक्ता राहुल धर्माधिकारी ने युक्तिवाद किया. सूत्रों के अनुसार सुनवाई के दौरान न्यायालय ने याचिकाकर्ता की अपील को सुनवाई योग्य मानते हुए उसे स्वीकार करने की बात कही और निविदा प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं. अदालत के मौखिक रुख के बाद यह संभावना प्रबल हो गई है कि मनपा को निविदा प्रक्रिया दोबारा शुरू करनी पड़ सकती है.
आज नागपुर हायकोर्ट द्वारा सुनवाई के दौरान दिए गए मौखिक आदेश के बाद फिलहाल सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि यदि न्यायालय के निर्देशों के अनुसार कार्रवाई होती है तो क्या पूरा सफाई ठेका वापस लिया जाएगा या केवल पार्ट-ए और पार्ट-बी को रिकॉल किया जाएगा. मनपा सूत्रों के अनुसार इस संबंध में अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है. कानूनी राय लेने के बाद ही प्रशासन अगला कदम तय करेगा. यह भी संभावना जताई जा रही है कि मनपा हाईकोर्ट के आदेश के विरुद्ध उच्च स्तर पर अपील का विकल्प भी तलाश सकती है.
अदालत द्वारा दिए गए निर्देशानुसार यदि अमरावती मनपा मेंं सफाई ठेके की निविदा रिकॉल होती भी है तो तत्काल प्रभाव से सफाई व्यवस्था प्रभावित नहीं होगी. सूत्रों के अनुसार नई निविदा प्रक्रिया पूरी होने और नए ठेकेदार की नियुक्ति होने तक शहर की सफाई और कचरा संकलन का कार्य कोणार्क कंपनी के पास ही रहने की संभावना है, ताकि शहर में स्वच्छता व्यवस्था चरमराए नहीं.
* शुरू से विवादों में रहा है कोणार्क का ठेका
उल्लेखनिय है कि, कोणार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर को दिया गया सफाई ठेका शुरू से ही विवादों के घेरे में रहा है. शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कचरा संकलन, सफाई व्यवस्था और घंटागाड़ियों की उपलब्धता को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं. कंपनी पर आरोप लगे कि उसने अनुबंध के अनुसार पर्याप्त वाहन और कर्मचारी उपलब्ध नहीं कराए. कई जनप्रतिनिधियों और नागरिक संगठनों ने भी कंपनी के कामकाज पर सवाल उठाए.
* विधान परिषद तक पहुंचा था मामला
कोणार्क कंपनी के खिलाफ शिकायतें बढ़ने के बाद यह मामला महाराष्ट्र विधान परिषद तक पहुंच गया था. विधायक संजय खोडके और धीरज लिंगाडे ने सदन में सफाई व्यवस्था और ठेका प्रक्रिया को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए थे. वहीं विधायक रवि राणा ने भी शिकायत दर्ज कराते हुए विभागीय जांच की मांग की थी. इसके बाद जुलाई माह में कंपनी के कार्यों की विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए थे. हालांकि लंबे समय तक जांच समिति गठित नहीं होने से प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में रही.
* स्थायी समिति की मंजूरी पर भी उठे थे सवाल
विवादों और जांच के बीच अमरावती मनपा की स्थायी समिति ने हाल ही में कोणार्क के पार्ट-बी प्रस्ताव को मंजूरी दी थी. दिलचस्प बात यह रही कि 29 जून को जिस प्रस्ताव को स्थायी समिति ने रोक दिया था, उसी प्रस्ताव को लगभग 45 दिन बाद मंजूरी दे दी गई. इस निर्णय के बाद कंपनी के लंबित बिलों के भुगतान का रास्ता साफ हुआ था. विपक्षी पार्षदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा था कि जब जांच लंबित है तो मंजूरी देने की जल्दबाजी क्यों की गई.
* 1.37 करोड़ के दंड का भी रहा विवाद
कंपनी पर अनुबंध उल्लंघन के आरोपों के चलते लगभग 1.37 करोड़ रुपये का दंड प्रस्तावित किए जाने की चर्चा भी सामने आई थी. बाद में दंड राशि में कमी किए जाने की खबरों ने भी विवाद को और बढ़ा दिया था. इस पूरे मामले ने मनपा प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए.
* मनपा आयुक्त ने बुलाई आपात बैठक
हाईकोर्ट की सुनवाई की जानकारी सामने आते ही मनपा प्रशासन सक्रिय हो गया है. जानकारी के अनुसार मनपा आयुक्त डॉ. मंगेश गोंदावले ने शुक्रवार के लिए अधिकारियों की आपात बैठक बुलाई है. बैठक में न्यायालय के संभावित लिखित आदेश, कानूनी विकल्प, अपील की संभावना और आगे की प्रशासनिक रणनीति पर चर्चा की जाएगी.
* शहर की राजनीति में फिर गरमाया मुद्दा
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद शहर की राजनीति में भी यह मुद्दा फिर से गर्मा गया है. विपक्षी दल और कई सामाजिक संगठन इसे अपनी बात सही साबित होने का संकेत मान रहे हैं, जबकि प्रशासन और कोणार्क कंपनी लिखित आदेश का इंतजार कर रहे हैं. यदि न्यायालय का अंतिम आदेश निविदा प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने के पक्ष में आता है, तो यह अमरावती मनपा के हालिया इतिहास की सबसे बड़ी प्रशासनिक और कानूनी घटनाओं में से एक साबित हो सकता है. वहीं यदि मनपा अपील का रास्ता अपनाती है, तो यह मामला और लंबी कानूनी लड़ाई में बदल सकता है. फिलहाल पूरे शहर की निगाहें हाईकोर्ट के लिखित फैसले और मनपा प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं.
प्रशासक राज में शुरू हुई थी पूरी प्रक्रिया
अमरावती महानगरपालिका ने शहर में घर-घर कचरा संकलन, घनकचरा परिवहन, सड़क सफाई और स्वच्छता व्यवस्था को एकीकृत एवं अधिक जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से व्यापक निविदा प्रक्रिया शुरू की थी. उस समय मनपा में निर्वाचित सभागृह अस्तित्व में नहीं था और प्रशासनिक नियंत्रण प्रशासक के तौर पर मनपा आयुक्त के हाथों में था. उस समय मनपा प्रशासन का दावा था कि एकल ठेकेदार व्यवस्था से कार्यों में समन्वय बढ़ेगा, जवाबदेही सुनिश्चित होगी और शहर की सफाई व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी. इसी प्रक्रिया के तहत अक्तूबर-नवंबर 2025 में निविदा प्रक्रिया चलाते हुए जनवरी 2026 में मुंबई की कोणार्क इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी को घनकचरा संकलन एवं परिवहन का महत्वपूर्ण ठेका प्रदान किया गया. लेकिन ठेका मंजूर होते ही विपक्षी दलों, स्थानीय ठेकेदारों, सामाजिक संगठनों तथा कई जनप्रतिनिधियों ने निविदा प्रक्रिया पर सवाल उठाने शुरू कर दिए. कोणार्क कंपनी को ठेका दिए जाने के बाद आरोप लगाए गए कि निविदा की कुछ शर्तें विशेष कंपनियों को लाभ पहुंचाने वाली थीं. बाद में कंपनी के कामकाज को लेकर भी लगातार शिकायतें सामने आने लगीं. आरोप लगाए गए कि करार के अनुसार आवश्यक संख्या में वाहन उपलब्ध नहीं कराए गए, कई क्षेत्रों में घंटागाड़ियों की कमी रही तथा सफाई कर्मचारियों की संख्या भी अनुबंध के अनुरूप नहीं थी. शहर के विभिन्न प्रभागों में नियमित कचरा संकलन नहीं होने, बरसात के दौरान कचरे के ढेर जमा होने, नालों की सफाई प्रभावित होने तथा नागरिकों को परेशानियों का सामना करने की शिकायतें लगातार सामने आती रहीं. जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया कि मनपा प्रशासन कंपनी की कथित अनियमितताओं पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं कर रहा है.
* स्थायी समिति ने पहले रोका, फिर दी मंजूरी
29 जून को स्थायी समिति के समक्ष कोणार्क कंपनी के ‘पार्ट-बी’ कार्यों को प्रशासनिक मंजूरी देने का प्रस्ताव रखा गया था. उस समय कंपनी के खिलाफ चल रहे विवादों और संभावित जांच का मुद्दा सामने आने पर प्रस्ताव को रोक दिया गया. हालांकि बाद में 17 अगस्त को हुई बैठक में यही प्रस्ताव मंजूर कर दिया गया. इसके साथ ही झोन क्रमांक 1, 2, 4 और 5 में घर-घर कचरा संकलन एवं स्वच्छता कार्यों के लिए कंपनी का रास्ता साफ हो गया. समिति ने यह शर्त भी लगाई कि कंपनी को अनुबंध के अनुसार वाहन, कर्मचारी और अन्य संसाधन उपलब्ध कराने होंगे.
* शहरवासियों की सबसे बड़ी चिंता, सफाई व्यवस्था प्रभावित तो नहीं होगी?
पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा प्रश्न शहर की स्वच्छता व्यवस्था को लेकर खड़ा हो गया है. यदि ठेका रद्द होता है और नई निविदा प्रक्रिया शुरू करनी पड़ती है, तो उसके पूर्ण होने में कई महीने लग सकते हैं. ऐसे में घर-घर कचरा संकलन, घनकचरा परिवहन और सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है. प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि न्यायिक और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच शहर की सफाई व्यवस्था बाधित न होने पाए. इसी कारण संभावना जताई जा रही है कि अंतिम निर्णय आने तक वर्तमान व्यवस्था को अंतरिम रूप से जारी रखा जा सकता है.





