दशहरा मैदान हत्याकांड में आरोपी को दोहरे आजीवन कारावास की सजा

नारायण जाधव की हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय का फैसला

* दूसरा आरोपी सबूतों के अभाव में बरी
अमरावती/दि.2 – दशहरा मैदान परिसर में फरवरी 2024 में हुई नारायण तुकाराम जाधव की हत्या के मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी गोपाल उर्फ गोलू रामदास शिंदे (27) को हत्या का दोषी ठहराते हुए दो अलग-अलग धाराओं में आजीवन कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 302 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(वी) के तहत आरोपी को दोषी माना. प्रत्येक मामले में 2 हजार रुपये जुर्माना और जुर्माना नहीं भरने पर दो माह के सश्रम कारावास की अतिरिक्त सजा सुनाई गई है. यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजय शिंदे, न्यायालय क्रमांक 4 ने सुनाया. मामले में आरोपी राजू लक्ष्मण शिंदे (42) को अदालत ने निर्दोष बरी कर दिया.
मामला 12 फरवरी 2024 की शाम करीब 5 बजे का है. दसरा मैदान स्थित हनुमान मंदिर के पास नारायण तुकाराम जाधव अपने घर की पायरी पर बैठे थे. इसी दौरान आरोपी गोपाल शिंदे और राजू शिंदे वहां पहुंचे. अभियोजन के अनुसार, गोपाल ने नारायण की टिंगल की, जबकि राजू ने उन्हें गाली-गलौज की. इसके बाद नारायण पायरी से नीचे आए. इसी दौरान गोपाल शिंदे ने उन्हें जमीन पर पटक दिया और उनके चेहरे पर दो घूंसे मारे. आरोप है कि इसके बाद उसने पास पड़ी लकड़ी की काठी उठाकर नारायण के सिर पर जानलेवा वार किया. सिर पर गंभीर चोट लगने के बाद नारायण जाधव बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े. परिजनों ने उन्हें तत्काल उपचार के लिए अमरावती के इर्विन अस्पताल पहुंचाया. हालांकि, डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया. घटना के बाद मृतक के परिजन की शिकायत पर राजापेठ पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया. पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302, धारा 34 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था. मामले की जांच सहायक पुलिस आयुक्त जयदत्त भवर ने की.
जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया गया. अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए. मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने गोपाल शिंदे के खिलाफ अपराध सिद्ध माना. अदालत ने गोपाल शिंदे को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और 2 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. जुर्माना नहीं भरने पर दो माह का सश्रम कारावास भुगतना होगा. इसी तरह अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(वी) के तहत भी उसे दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 2 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई. जुर्माना अदा नहीं करने पर दो माह के सश्रम कारावास का प्रावधान किया गया है. वहीं, मामले के दूसरे आरोपी राजू लक्ष्मण शिंदे को अदालत ने दोषमुक्त कर दिया.
मामले में सरकार की ओर से सहायक सरकारी अभियोक्ता एड. प्रशांत विजयराव देशमुख ने पैरवी की. उन्होंने उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अभियोजन का पक्ष प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष रखा. इस कार्य में एएसआई दिलीप सावरकर तथा कोर्ट पैरवी अधिकारी पुलिस हेड कांस्टेबल अरुण हटवार ने सहयोग किया. अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी और पुलिस जांच के आधार पर अदालत ने आरोपी गोपाल शिंदे को दोषी ठहराते हुए यह फैसला सुनाया.

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