मनोज जरांगे पाटील ने पानी और सलाइन का किया त्याग

मराठा आरक्षण आंदोलन का आठवां दिन

* मांगें पूरी होने तक इलाज से इनकार, 12 सितंबर को मुंबई पहुंचने पर कायम
* सरकार के आश्वासन की समयसीमा खत्म होने पर फिर आक्रामक हुए जरांगे
जालना/दि.5 – मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अनशन कर रहे मनोज जरांगे पाटील ने सरकार के आश्वासन की समयसीमा पूरी होने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने पर एक बार फिर अपना रुख सख्त कर लिया है. जरांगे पाटील ने चिकित्सकीय उपचार लेने से इनकार करते हुए पानी और सलाइन लेना भी बंद कर दिया है. उन्होंने डॉक्टरों को स्वास्थ्य जांच करने की अनुमति देने से भी मना कर दिया है. उनका कहना है कि जब तक सरकार उनकी सभी मांगों को प्रत्यक्ष रूप से लागू नहीं करती, तब तक वे कुछ भी ग्रहण नहीं करेंगे और उपचार भी नहीं लेंगे.
जरांगे पाटील के अनुसार, सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने उनकी कुछ प्रमुख मांगों को दो दिनों के भीतर पूरा करने का आश्वासन दिया था. निर्धारित समय बीतने के बावजूद मांगों पर ठोस निर्णय या अमल नहीं होने से वे नाराज हैं. इसी के चलते उन्होंने दोबारा पानी और चिकित्सकीय उपचार बंद करने का निर्णय लिया. सरकारी प्रतिनिधिमंडल के आग्रह के बाद जरांगे कुछ समय के लिए पानी पीने और सलाइन लेने के लिए तैयार हुए थे. हालांकि, मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद उन्होंने फिर उपचार लेने से इनकार कर दिया.
जरांगे पाटील ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जब तक सरकार उनकी सभी मांगों को वास्तविक रूप से लागू नहीं करती, तब तक वे कुछ भी ग्रहण नहीं करेंगे. इस दौरान चिकित्सा दल ने उनसे बातचीत कर स्वास्थ्य की स्थिति पर चर्चा करने का प्रयास किया, लेकिन जरांगे अपने रुख पर कायम रहे. उनका अनशन अब आठवें दिन में पहुंच गया है. मंत्रियों के प्रतिनिधिमंडल की ओर से किए गए समझाने के प्रयास भी अब तक सफल नहीं हुए हैं. दूसरी ओर, प्रतिनिधिमंडल ने एक-दो दिन में मांगों पर निर्णय से अवगत कराने की भूमिका रखी है.
मनोज जरांगे पाटील ने अपना आंदोलन जारी रखने के साथ ही 12 सितंबर को मुंबई पहुंचने के अपने निर्णय पर भी कायम रहने की बात कही है. इससे मराठा आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राज्य की राजनीति के केंद्र में आ गया है. अब सरकार की ओर से अगले एक-दो दिनों में क्या निर्णय लिया जाता है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं. जरांगे पाटील के दोबारा पानी और उपचार बंद करने से आंदोलन की गंभीरता बढ़ गई है. एक ओर सरकार के सामने उनकी मांगों पर निर्णय लेने की चुनौती है, तो दूसरी ओर जरांगे पाटील सभी मांगों के लागू होने तक अनशन वापस लेने के लिए तैयार नहीं हैं. ऐसे में आने वाले एक-दो दिन मराठा आरक्षण आंदोलन की दिशा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं.

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