जिले के 2,399 सार्वजनिक मंडलों में विराजेंगे ‘बाप्पा’
गणेशोत्सव को लेकर जबरदस्त उत्साह, प्रशासन भी तैयार

* 387 गांवों में ‘एक गांव, एक गणपति’ की पहल
* ऑनलाइन अनुमति की प्रक्रिया आज से हुई शुरू
* सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस ने जारी किए दिशा-निर्देश
अमरावती/दि.7– सार्वजनिक गणेशोत्सव को अब महज आठ दिन शेष हैं. ऐसे में अमरावती जिले में गणेशोत्सव मंडलों के साथ प्रशासन ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं. जिले में इस वर्ष 2,399 सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल सक्रिय रहने की संभावना है. इनमें 387 गांवों में ‘एक गांव, एक गणपति’ की संकल्पना को बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके माध्यम से गांवों में सामाजिक एकता और भाईचारे को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है. पुलिस विभाग के अनुसार, वर्ष 2025 में अमरावती शहर के नौ पुलिस थाना क्षेत्रों में कुल 590 सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल थे. इस वर्ष मंडलों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई गई है. वहीं ग्रामीण क्षेत्र के 31 पुलिस थाना क्षेत्रों में भी गणेशोत्सव की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं.
* गाडगेनगर में सबसे ज्यादा मंडल
अमरावती शहर में गाडगेनगर थाना क्षेत्र में सर्वाधिक 121 सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल हैं. इसके बाद राजापेठ और बडनेरा थाना क्षेत्र में 77-77 मंडल हैं. खोलापुरी गेट थाना क्षेत्र में 70 मंडल हैं. अन्य थाना क्षेत्रों में शहर कोतवाली में 32, भातकुली में 23, नागपुरी गेट में 13, वलगांव में 56, फ्रेजरपुरा में 61 तथा नांदगांवपेठ थाना क्षेत्र में 60 सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल शामिल हैं.
* ग्रामीण क्षेत्र में धारणी सबसे आगे
जिले के ग्रामीण क्षेत्र में 31 पुलिस थाना क्षेत्रों में कुल 1,416 सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडल हैं. इनमें धारणी थाना क्षेत्र में सबसे अधिक मंडल बताए गए हैं. इसके बाद मोर्शी में 106 तथा अंजनगांव सुर्जी में 96 मंडल हैं. ग्रामीण क्षेत्र में करीब 380 गांवों में ‘एक गांव, एक गणपति’ की संकल्पना को बढ़ावा दिया जा रहा है. तालुका मुख्यालयों में करीब 406 तथा गांवों में लगभग 940 सार्वजनिक मंडल होने की जानकारी सामने आई है.
* आज से ऑनलाइन अनुमति की प्रक्रिया
सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों को पुलिस विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है. पुलिस विभाग के अनुसार, सोमवार 7 सितंबर से ऑनलाइन अनुमति के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. मंडलों को आवश्यक जानकारी और दस्तावेजों के साथ समय पर आवेदन करने के निर्देश दिए गए हैं.
* सड़कों के गड्ढे भरने का काम शुरू
गणेशोत्सव और विशेष रूप से विसर्जन जुलूस को देखते हुए शहर की सड़कों की स्थिति सुधारने का काम भी शुरू किया गया है. बारिश के कारण अमरावती शहर में जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं और उनमें पानी जमा होने से नागरिकों को परेशानी हो रही है. मनपा प्रशासन ने इन गड्ढों को भरने का काम शुरू किया है. ग्रामीण पुलिस क्षेत्र में आशियाना क्लब से वडाली मार्ग होते हुए प्रथमेश जलाशय स्थित विसर्जन स्थल तक जाने वाले मार्ग पर भी गड्ढों की अस्थायी मरम्मत की गई है. दो दिन पहले इस मार्ग के गड्ढों में डामर और गिट्टी डालकर उन्हें भरने का काम किया गया.
* दस दिनों तक पुलिस पर रहेगा सुरक्षा का दबाव
गणेशोत्सव के दस दिनों के दौरान पुलिस प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बड़ी चुनौती रहती है. गणपति स्थापना से लेकर विसर्जन यात्रा तक शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक पुलिस बंदोबस्त करना पड़ता है. पुलिस विभाग के अनुसार, इन दस दिनों के दौरान लगभग 80 प्रतिशत पुलिस बल बंदोबस्त में व्यस्त रहता है. गणेश मंडलों के बीच होने वाले विवाद, यातायात व्यवस्था, विसर्जन मार्ग, भीड़ नियंत्रण तथा संवेदनशील क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को विशेष बंदोबस्त करना होगा.
* मंडलों के लिए जारी किए गए प्रमुख दिशा-निर्देश
प्रशासन और पुलिस विभाग ने सार्वजनिक गणेशोत्सव मंडलों के लिए विभिन्न दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इनमें गणेश प्रतिमा और मंडप की सुरक्षा की जिम्मेदारी मंडल की होगी. मंडप और आकर्षक सजावट वाले स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना आवश्यक होगा. चंदा एकत्र करने के लिए संबंधित धर्मादाय आयुक्त की अनुमति लेनी होगी. जबरन या दबाव डालकर चंदा वसूलने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी. महाप्रसाद के आयोजन के लिए एफडीए से आवश्यक अनुमति लेना होगा. गणेश प्रतिमा और मंडप की ऊंचाई को लेकर निर्धारित नियमों का पालन करना होगा. अवैध रूप से बिजली का उपयोग करने वाले मंडलों पर महावितरण की नजर रहेगी. मंडप और प्रतिमा की सुरक्षा के लिए आवश्यक अग्नि एवं अन्य सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा.
* ‘एक गांव, एक गणपति’ से सामाजिक एकता का संदेश
जिले के 387 गांवों में ‘एक गांव, एक गणपति’ की संकल्पना को मिल रहा समर्थन इस वर्ष के गणेशोत्सव की खास विशेषता माना जा रहा है. एक ही सार्वजनिक गणेश प्रतिमा स्थापित कर गांव के विभिन्न वर्गों और समूहों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है. इससे अनावश्यक प्रतिस्पर्धा और विवादों को कम करने के साथ सामाजिक एकता को मजबूत करने की उम्मीद है.





