22 वर्षीय युवती को बाघ ने घसीटकर मार डाला
सोनोरी में ‘पिंकी’ नरभक्षी बाघिन का कहर

* वन विभाग की मौजूदगी और पहले से मिली सूचना के बावजूद नहीं बच सकी उर्मिला की जान
* कुछ घंटे पहले दो बकरियों को बनाया था शिकार, चरवाहे ने कुल्हाड़ी से किया प्रतिकार कर बचाई जान
* सांसद व विधायकों ने वन विभाग को चेताया, ड्रोन से तलाश जारी
* आक्रोशित ग्रामीणों ने वाहनों पर किया पथराव, वनविभाग को दी तत्काल कार्रवाई की चेतावनी
* बाघिन को तत्काल नहीं पकड़े जाने पर उग्र आंदोलन का दिया गया अल्टीमेटम
अमरावती/दि.7 – अमरावती जिले में पिछले कुछ दिनों से आतंक का पर्याय बनी ‘पिंकी’ नामक नरभक्षी बाघिन ने रविवार, 6 सितंबर को चांदूरबाजार तहसील के सोनोरी गांव में एक और इंसानी जान ले ली. खेत में पशुओं के लिए घास/चारा लेने गई 22 वर्षीय उर्मिला बाजीराव इवने पर घात लगाकर बाघिन ने हमला किया और उसे घसीटकर घनी झाड़ियों में ले गई, जहां उसकी मौत हो गई. देर शाम युवती का क्षत-विक्षत शव बरामद होने के बाद सोनोरी सहित आसपास के गांवों में दहशत के साथ वन विभाग के खिलाफ जबरदस्त आक्रोश फैल गया. घटना की गंभीरता इसलिए और बढ़ गई है, क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की सूचना सुबह ही वन विभाग को दे दी गई थी. इतना ही नहीं, युवती पर हमला होने के दौरान वन विभाग की टीम आसपास मौजूद होने की बात भी सामने आई है. इसके बावजूद बाघिन युवती को अपना शिकार बनाकर जंगल में फरार हो गई. इस कथित लापरवाही से भड़के ग्रामीणों ने वन विभाग के वाहन पर पथराव कर उसकी तोड़फोड़ कर दी. तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल और गांव में अतिरिक्त बंदोबस्त तैनात किया.
* परिसर मे़ं सुबह से ही मंडरा रहा था खतरा
रविवार सुबह से ही सोनोरी शिवार में बाघिन की गतिविधियां देखे जाने से ग्रामीणों में भय था. गांव से सटे ई-क्लास जमीन के झाड़ीदार जंगल में करीब 10 से 11.30 बजे के बीच सोमा पराते नामक चरवाहा अपनी बकरियां चरा रहा था. इसी दौरान अचानक उसके सामने बाघिन आ गई और उसने बकरियों के झुंड पर झपट्टा मारा. अचानक सामने आए बाघ को देखकर सोमा घबरा गया, लेकिन उसने प्रसंगावधान नहीं खोया. उसने झाड़ियों का सहारा लिया और खुद को बचाने के लिए गांव की ओर भागने का प्रयास किया.
उपलब्ध जानकारी के अनुसार सोमा ने प्रतिरोध करते हुए हाथ में मौजूद कुल्हाड़ी के डंडे से बाघ के सिर पर वार भी किया. अचानक हुए इस प्रतिकार से बाघ कुछ क्षण पीछे हटा और सोमा अपनी जान बचाकर बकरियों के साथ गांव की ओर निकल सका. हालांकि इस हमले में दो बकरियां मारी गईं, जबकि एक अन्य बकरी के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है. सुबह की इस घटना ने ही ग्रामीणों को सतर्क कर दिया था. इसके बावजूद कुछ घंटों बाद एक युवती के उसी क्षेत्र में लापता होने की खबर ने पूरे गांव को हिला दिया.
* घास लेने निकली उर्मिला घर नहीं लौटी
जानकारी के अनुसार उर्मिला बाजीराव इवने रविवार सुबह अपने घर से खेत में पशुओं के चारे के लिए घास लेने निकली थी. वह सामान्यतः कुछ समय बाद घर लौट आती थी. लेकिन दोपहर तक उसके वापस नहीं आने पर परिजनों को चिंता हुई. परिजनों ने पहले आसपास के खेतों और रास्तों पर उसकी तलाश शुरू की. बाद में ग्रामीण भी खोजबीन में शामिल हो गए. गांव के लोगों ने अलग-अलग स्थानों पर उसकी तलाश की. कई घंटे की खोज के बाद खेत परिसर की घनी झाड़ियों में उर्मिला का शव दिखाई दिया. शव की स्थिति तथा शरीर पर मिले हमले के निशानों से आशंका जताई गई कि बाघिन ने उस पर हमला किया, उसे घसीटकर झाड़ियों के भीतर ले गई और वहीं उसकी जान ले ली. शव मिलने की खबर गांव में फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जमा हो गए.
* एक ही दिन में बकरियों के बाद युवती पर हमला
ग्रामीणों के अनुसार उर्मिला की मौत से कुछ घंटे पहले ही बाघिन ने दो बकरियों को मार डाला था. एक अन्य बकरी घायल हुई थी. लगातार एक ही इलाके में पशुओं और फिर इंसान पर हुए हमले ने ग्रामीणों की आशंका को सच साबित कर दिया कि बाघिन बेहद खतरनाक हो चुकी है. ग्रामीणों का कहना है कि जंगल और खेतों के बीच घनी झाड़ियों का लाभ उठाकर बाघिन लगातार स्थान बदल रही है. यही कारण है कि कैमरा ट्रैप लगाए जाने के बावजूद उसके वास्तविक मूवमेंट पर नजर रखना वन विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है.
* सुबह ही दी थी सूचना, फिर भी नहीं पहुंची टीम
सोनोरी और सुलतानपुर के पुलिस पाटिलों के अनुसार क्षेत्र में बाघ दिखाई देने की जानकारी वन विभाग को सुबह ही दे दी गई थी. ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना मिलने के बावजूद वन विभाग ने समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की. ग्रामीणों का सवाल है कि जब बाघिन की मौजूदगी पहले से सामने आ चुकी थी और बकरियों पर हमला भी हो चुका था, तो खेतों में जाने वाले ग्रामीणों को सुरक्षा क्यों नहीं दी गई? यदि वन विभाग की टीम तत्काल क्षेत्र में पहुंचकर बाघिन को पकड़ने या उसे सुरक्षित जंगल की ओर खदेड़ने की कार्रवाई करती, तो संभवतः उर्मिला की जान बच सकती थी.
* वन विभाग की मौजूदगी में हुआ हमला!
घटना का सबसे गंभीर पहलू यह बताया जा रहा है कि उर्मिला पर हमले के समय वन विभाग की टीम घटनास्थल के आसपास मौजूद थी. एक ओर बाघिन और दूसरी ओर वन विभाग की टीम होने के बावजूद बाघिन ने युवती पर हमला कर दिया और उसे घसीटते हुए जंगल में ले गई. घटना के बाद ग्रामीणों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. उनका कहना था कि जब कर्मचारियों के पास पर्याप्त सुरक्षा साधन और प्रभावी व्यवस्था नहीं है, तो वे ग्रामीणों की जान कैसे बचाएंगे.
* गुस्से में फूटा ग्रामीणों का आक्रोश, वाहन पर पथराव
उर्मिला की मौत की खबर फैलते ही सोनोरी में गुस्सा भड़क उठा. बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल और गांव में जमा हो गए. आक्रोशित लोगों ने वन विभाग के वाहन पर पथराव कर तोड़फोड़ की. ग्रामीणों का कहना था कि वन विभाग को लगातार बाघिन की गतिविधियों की जानकारी दी जा रही थी, लेकिन हर बार कार्रवाई में देरी हुई. उनका आरोप था कि यदि समय रहते ठोस कदम उठाए जाते, तो एक परिवार की बेटी को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती. स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस ने अतिरिक्त बंदोबस्त तैनात किया. ब्राह्मणवाड़ा थड़ी के थानेदार प्रशांत जाधव ने ग्रामीणों से शांति बनाए रखने और सावधानी बरतने की अपील की. उन्होंने लोगों से अकेले खेतों में न जाने, समूह में जाने तथा बच्चों को खेतों की ओर न भेजने की सलाह दी.
* मोर्शी से रिद्धपुर होते हुए सोनोरी पहुंची ‘पिंकी’
वन विभाग की प्रारंभिक जांच और घटनास्थल पर मिले पदचिह्नों के आधार पर सोनोरी में हमला करने वाली बाघिन को भांबोरा क्षेत्र में सक्रिय वही बाघिन माना जा रहा है. स्थानीय स्तर पर उसे ‘पिंकी’ नाम दिया गया है. बताया गया है कि यह बाघिन लगभग दो से ढाई वर्ष की है. पिछले दिनों मोर्शी तहसील के भांबोरा क्षेत्र में किसान पर हमला कर उसकी जान लेने के बाद वह करीब 20 से 22 किलोमीटर का क्षेत्र पार करते हुए रिद्धपुर की ओर बढ़ी और फिर सोनोरी क्षेत्र में पहुंची. शनिवार, 5 सितंबर को रिद्धपुर मार्ग पर कुछ शिक्षकों ने उसे देखा था. इसके बाद रिद्धपुर निवासी निंभोकर की गाय पर हमला कर उसे मार डालने की घटना भी सामने आई थी.
* 27 अगस्त से लगातार हमले
इस बाघिन के आतंक की कड़ी 27 अगस्त से जुड़ती बताई जा रही है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार 27 अगस्त को भांबोरा क्षेत्र में किसान चरणदास इखे पर बाघ ने हमला किया, जिसमें उनकी मौत हो गई. 29 अगस्त को कवठाल के खरेदी-विक्री संघ के संचालक स्वप्निल पाथरे के पशु झुंड पर हमला किया गया. एक गाय मारी गई, जबकि दूसरी घायल हुई. 2 सितंबर को शिरलस निवासी प्रणित महादेवराव मावले के खेत की झोपड़ी के पास बछड़े पर हमला कर उसे मार दिया गया. 5 सितंबर को रिद्धपुर क्षेत्र में निंभोकर की गाय को बाघिन ने मार डाला. 6 सितंबर को सुबह के वक्त सोनोरी क्षेत्र में बकरियों पर हमला कर दो बकरियों को मार डाला तथा एक को घायल किया. वहीं 6 सितंबर को शाम के समय खेत में चारा लेने गई उर्मिला बाजीराव इवने को बाघिन ने अपना शिकार बना लिया. इन घटनाओं ने पूरे मोर्शी-चांदूरबाजार क्षेत्र में भय का वातावरण पैदा कर दिया है.
* सांसद बलवंत वानखड़े ने वन विभाग को फटकारा
घटना की जानकारी मिलते ही सांसद बलवंत वानखड़े ने वन विभाग के अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई करने की मांग की. उन्होंने उपवन संरक्षक के. आर. अर्जुना को निर्देश दिया कि नरभक्षी बाघिन को जल्द से जल्द पकड़ा जाए और सोनोरी तथा आसपास के गांवों को दहशत से मुक्त किया जाए. सांसद वानखडे ने स्पष्ट किया कि अब केवल निगरानी या कैमरा ट्रैप लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई जरूरी है.
* विधायक प्रवीण तायड़े का कड़ा रुख
उर्मिला की मौत के बाद अचलपुर निर्वाचन क्षेत्र के विधायक प्रवीण तायड़े भी तत्काल सोनोरी पहुंचे. ग्रामीणों से बातचीत के दौरान उन्होंने वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के घटनास्थल पर समय पर नहीं पहुंचने पर तीखी नाराजगी जताई. उन्होंने अधिकारियों को फोन पर स्पष्ट शब्दों में कहा कि पहले वरिष्ठ वन अधिकारियों को स्वयं मौके पर भेजा जाए, तब तक वे घटनास्थल से नहीं हटेंगे. विधायक ने आरोप लगाया कि मोर्शी में किसान की जान जाने के बाद भी वन विभाग ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की और अब चांदूरबाजार में बाघिन ने आतंक मचा दिया है. उन्होंने चेतावनी दी कि बाघिन को तत्काल जेरबंद नहीं किया गया तो पूरे तहसील में जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा. साथ ही पीड़ित परिवार को अधिकतम आर्थिक सहायता और ग्रामीणों को सुरक्षा देने की मांग की.
* बाघ को नहीं पकड़ा, तो वन कार्यालय में गणपति बैठाएंगे
– विधायक बच्चू कडू ने वनविभाग को दिया अल्टीमेटम
विधायक बच्चू कडू ने भी घटना पर वन विभाग को जमकर घेरा. उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से वन्यजीवों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं. पहले वन्यप्राणियों के कारण किसानों की फसल और पशुधन का नुकसान हो रहा था, अब इंसानों की जान भी जाने लगी है. विधायक कडू ने चेतावनी दी कि यदि आगामी 10 से 15 दिनों में नरभक्षी बाघिन को जेरबंद नहीं किया गया, तो वन विभाग के कार्यालय में गणपति बप्पा की स्थापना कर एक दिन का उत्सव मनाते हुए तीव्र आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने प्रशासन को आगाह किया कि मामले को हल्के में लेना महंगा पड़ सकता है.
* ड्रोन से तलाश, लेकिन बाघिन अब भी पकड़ से बाहर
उर्मिला की मौत के बाद वन विभाग ने बाघिन की तलाश के लिए रेस्क्यू टीम को सक्रिय किया है. आधुनिक ड्रोन कैमरों के माध्यम से घने जंगल, झाड़ियों और नालों वाले क्षेत्रों की हवाई निगरानी की जा रही है. परतवाड़ा के आरएफओ निशा मोकाशे और मोर्शी की आरएफओ योगिता मगर सहित वन कर्मचारियों की टीम देर रात तक घटनास्थल और आसपास के क्षेत्र में डटी रही. अचलपुर की एसडीपीओ ईशानी आनंद भी मौके पर पहुंचीं और ग्रामीणों से संवाद कर कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की. हालांकि, बाघिन के लगातार स्थान बदलने के कारण समाचार लिखे जाने तक उसका कोई ठोस सुराग नहीं मिल सका था.
* पिंजरे में बंद करो, नहीं तो पूरी तहसील सड़क पर उतरेगी
उर्मिला की मौत के बाद सोनोरी सहित आसपास के गांवों में ग्रामीणों का एक ही सवाल है कि आखिर इस बाघिन को कब पकड़ा जाएगा. ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि नरभक्षी बाघिन को तत्काल जेरबंद नहीं किया गया तो पूरा तहसील सड़क पर उतरकर आंदोलन करेगा. खेतों में जाने वाले किसानों, पशुपालकों और महिलाओं में भय इतना बढ़ गया है कि लोग अकेले खेतों में जाने से बच रहे हैं. एक ही दिन में पहले पशुओं और फिर इंसान पर हुए हमले ने वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. अब ग्रामीणों की निगाहें वन विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं. उर्मिला की मौत ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि लगातार चेतावनियों, पशुओं पर हमलों और बाघिन की मौजूदगी की जानकारी के बावजूद यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो अगला शिकार कौन होगा.





