स्वास्थ्य उपसंचालक व जिला शल्य चिकित्सक सहित पांच अधिकारी निलंबित

डफरीन अग्निकांड मामले में कार्रवाई की पहली गाज गिरी

* उच्च स्तरीय समिती ने गतरोज ही राज्य सरकार को सौंपी थी अपनी रिपोर्ट
* रिपोर्ट मिलते ही सरकार ने पांच अधिकारियों के निलंबन आदेश किए जारी
* सार्वजनिक लोकनिर्माण विभाग के कुछ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गाज गिरना तय
* दो कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश, शो कॉज नोटीस जारी
अमरावती/दि.10 – जिला स्त्री अस्पताल के एसएनसीयू अग्निकांड में तीन नवजातों की मौत के मामले में राज्य सरकार ने कार्रवाई का पहला बड़ा कदम उठाया है. उच्चस्तरीय जांच समिति द्वारा गतरोज रिपोर्ट सौंपे जाते ही राज्य सरकार ने तुरंत स्वास्थ्य उपसंचालक और जिला शल्य चिकित्सक समेत पांच अधिकारियों को निलंबित कर दिया है. समिति की रिपोर्ट मिलते ही सरकार ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निलंबन आदेश जारी किए. निलंबित किए गए अधिकारियोें में स्वास्थ्य सेवा उपसंचालक डॉ. सुशीलकुमार वाकचोरे, डफरीन अस्पताल के प्रभारी वैद्यकीय अधीक्षक व जिला शल्य चिकित्सक डॉ. विनोद पवार, अतिरिक्त जिला शल्य चिकित्सक डॉ. अरुण सालुंके, प्रशासकीय अधिकारी संदीप तारगे तथा एक विद्युत मिस्त्री का समावेश है.
बता दे कि, विगत 24 अगस्त को डफरीन अस्पताल के एसएनसीयू में लगी भीषण आग में तीन नवजातों की मौत हुई थी. घटना के बाद सरकार ने 11 सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच समिति गठित की थी. समिति ने अस्पताल की अग्निसुरक्षा व्यवस्था, कर्मचारियों के प्रशिक्षण, फायर ऑडिट, तकनीकी व्यवस्था और प्रशासनिक स्तर पर हुई चूकों की जांच कर अपनी रिपोर्ट 7 सितंबर को सरकार को सौंपी थी. यद्यपि समिति की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने तत्काल पांच अधिकारियों के निलंबन का निर्णय लिया है. इनमें स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और डफरीन अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े अधिकारी शामिल हैं. कार्रवाई से स्पष्ट है कि सरकार ने मामले को गंभीर प्रशासनिक चूक के रूप में लिया है. निलंबित अधिकारियों की जिम्मेदारी और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का विस्तृत विवरण सरकार के आदेश में स्पष्ट होने के बाद ही सामने आएगा. फिलहाल निलंबन को जांच समिति की रिपोर्ट में सामने आई कथित लापरवाहियों से जोड़कर देखा जा रहा है.
* पीडब्ल्यूडी अधिकारियों पर भी कार्रवाई की तैयारी
डफरीन अग्निकांड में फायर ऑडिट और अग्निसुरक्षा व्यवस्था को लेकर सार्वजनिक लोकनिर्माण विभाग की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी. सूत्रों के अनुसार, पीडब्ल्यूडी के कुछ अधिकारियों पर भी कार्रवाई की गाज गिरना तय माना जा रहा है. अस्पताल में फायर सेफ्टी सिस्टम की जांच, उसके संचालन, रखरखाव और समय पर ऑडिट को लेकर पहले ही कई सवाल उठ चुके हैं. जांच समिति की रिपोर्ट में इन पहलुओं पर भी गंभीर टिप्पणियां होने की जानकारी सामने आई है. ऐसे में अब पीडब्ल्यूडी से जुड़े अधिकारियों पर संभावित कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
* दो कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश
जांच के दौरान अस्पताल में इस्तेमाल किए गए उपकरणों और संबंधित कंपनियों की भूमिका भी जांची गई. सूत्रों के अनुसार, समिति ने दो कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की सिफारिश की है. संबंधित कंपनियों को सरकार की ओर से शो-कॉज नोटिस जारी किए गए हैं. इन कंपनियों से जुड़े उपकरणों की गुणवत्ता, आपूर्ति और तकनीकी मानकों को लेकर उठे सवालों का जवाब अब संबंधित कंपनियों को देना होगा. उनके जवाब के बाद सरकार अंतिम कार्रवाई पर निर्णय लेगी.
* तीन मासूमों की मौत के बाद बढ़ा दबाव
24 अगस्त की रात डफरीन के एसएनसीयू में लगी आग ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और अस्पतालों की अग्निसुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. कर्मचारियों के प्रशिक्षण से लेकर फायर ऑडिट और उपकरणों की खरीद तक कई स्तरों पर सवाल उठे. घटना के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग लगातार होती रही. अब पांच अधिकारियों के निलंबन के साथ कार्रवाई की शुरुआत हो गई है. पीडब्ल्यूडी अधिकारियों पर प्रस्तावित कार्रवाई और दो कंपनियों को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया से यह मामला और व्यापक होने के संकेत हैं. सरकार की अगली कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच समिति की रिपोर्ट में किस स्तर पर किसकी जिम्मेदारी तय की गई है. रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद डफरीन अग्निकांड की प्रशासनिक जवाबदेही की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है.

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