मोर्शी में बाघ की दहशत और मेलघाट में तेंदुए का कहर

जिले में फिर बढ़ा वन्यजीवों का आतंक

* भांबोरा में किसान पर हमले का दावा, बैलगाड़ी समेत नहर में गिरकर वृद्ध घायल
* सीनबन में 8 बकरियां मार डालीं, 2 को उठा ले गया तेंदुआ
अमरावती/दि. 10- अमरावती और वर्धा जिलों में चार लोगों की जान लेने वाली बाघिन पिंकी की मौत के बाद लोगों ने राहत की सांस ली ही थी कि जिले में एक बार फिर वन्यजीवों का आतंक बढ़ता दिखाई दे रहा है. मोर्शी तहसील के भांबोरा क्षेत्र में लगातार दो दिनों से बाघ देखे जाने की घटनाओं ने किसानों में दहशत फैला दी है, वहीं मेलघाट के सीनबन गांव में तेंदुए ने गोठे में घुसकर आठ बकरियों को मार डाला और दो को उठा ले गया. दोनों घटनाओं के बाद ग्रामीणों में वन विभाग के प्रति तीव्र आक्रोश है.
* बाघ दिखते ही बेकाबू हुए बैल, नहर में गिरी बैलगाड़ी
मोर्शी तहसील के भांबोरा शिवार में बुधवार दोपहर करीब 1 से 2 बजे के बीच किसान शिवहरी तुलशीराम सातंगे (75) खेत से बैलगाड़ी लेकर घर लौट रहे थे. इसी दौरान उन्हें सामने एक बाघ दिखाई दिया. बाघ को देखते ही बैल बुरी तरह घबरा गए और अनियंत्रित होकर दौड़ पड़े. देखते ही देखते बैलगाड़ी अप्पर वर्धा बांध के दाहिने मुख्य कालवे से जुड़े बाएं लघु नहर में जा गिरी. हादसे में सातंगे गंभीर रूप से घायल हो गए. वे कुछ समय तक नहर में ही पड़े रहे. दोपहर करीब ढाई बजे उनके पुत्र संजय सातंगे घटनास्थल पर पहुंचे, तब उन्हें घायल अवस्था में बाहर निकाला गया. उनके हाथ-पैर सहित शरीर के विभिन्न हिस्सों में गंभीर चोटें आई हैं और उन्हें अमरावती के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
* किसान का दावा : बाघ ने हाथ पर झपट्टा मारा
घटना की जानकारी मिलने पर वन परिक्षेत्र अधिकारी योगिता मगर तथा डीएफओ कार्यालय के अधिकारी अस्पताल पहुंचे. इस दौरान सातंगे ने दावा किया कि बाघ ने उन पर झपट्टा मारते हुए हाथ का मांस नोच लिया. हालांकि वन विभाग को घटनास्थल पर बाघ के स्पष्ट पगचिह्न नहीं मिले हैं. विभाग का कहना है कि सूखी जमीन होने के कारण निशान स्पष्ट नहीं दिखाई दे रहे हैं.
* दो दिन से लगातार दिख रहा बाघ
ग्रामीणों के अनुसार, भांबोरा क्षेत्र में मंगलवार और बुधवार दोनों दिन बाघ देखा गया. मंगलवार को मंगेश इखे को खेत स्थित कुएं के पास बाघ दिखाई दिया था. इसी क्षेत्र में कुछ समय पहले किसान चरणदास इखे की बाघ के हमले में मौत हुई थी, इसलिए ग्रामीणों में भय और अधिक बढ़ गया है. ग्रामीणों का दावा है कि पाला रेलवे गेट से मोर्शी स्टेशन की दिशा में दो शावकों के साथ बाघ की गतिविधियां भी देखी गई हैं.
* मासोद में भी तेंदुए की मौजूदगी
उधर चांदूर बाजार तहसील के मासोद क्षेत्र में भी पिछले दो दिनों से तेंदुए की गतिविधियां देखी जा रही हैं. किसान प्रदीप कुटकुले ने अपने खेत में तेंदुआ दिखाई देने की जानकारी दी है, जिससे आसपास के गांवों में चिंता बढ़ गई है.
* मेलघाट में तेंदुए ने पशुपालक को पहुंचाया भारी नुकसान
दूसरी ओर मेलघाट वन्यजीव क्षेत्र के धूलघाट परिक्षेत्र अंतर्गत सीनबन गांव में मंगलवार रात तेंदुआ सीधे अर्जुन वास्कले के गोठे में घुस गया. वहां बंधी 12 बकरियों में से 8 को मार डाला, जबकि 2 बकरियों को जबड़े में दबाकर जंगल की ओर ले गया. सुबह जब परिवार ने गोठे में मृत बकरियों का ढेर देखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. पशुपालन ही परिवार की आय का प्रमुख साधन होने के कारण इस घटना से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. सूचना मिलने पर वन विभाग के कर्मचारियों ने पंचनामा किया, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग केवल औपचारिकता निभा रहा है.
* वन विभाग के खिलाफ बढ़ा आक्रोश
सीनबन, मोथाखेड़ा, गोलाई, राणेगांव और भांबोरा सहित जंगल से सटे गांवों के नागरिकों ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि विभाग कैमरा ट्रैप लगाने और पदचिह्न खोजने तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावी कार्रवाई का अभाव है. ग्रामीणों ने प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल पिंजरे लगाने, विशेष गश्ती दल तैनात करने, कैमरा ट्रैप बढ़ाने और हिंसक वन्यजीवों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाने की मांग की है. साथ ही घायल शिवहरी सातंगे को उचित मुआवजा और चिकित्सा सहायता तथा अर्जुन वास्कले को बकरियों के नुकसान की पूर्ण भरपाई देने की मांग भी की गई है. ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि वन विभाग ने जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए तो प्रभावित गांवों के नागरिक आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे.

 

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