हत्या के ‘हॉटस्पॉट’ बने गाडगेनगर और खोलापुरी गेट
251 दिनों में 35 हत्या प्रकरण, 36 लोगों की जान गई

* सितंबर के पहले सप्ताह में तीन सनसनीखेज हत्याओं से दहला शहर
* चाकूबाजी और नाबालिग अपराधियों की बढ़ती भूमिका ने बढ़ाई चिंता
अमरावती/दि.10- अमरावती शहर में सितंबर का पहला सप्ताह खून-खराबे और सनसनीखेज वारदातों के नाम रहा. महज सात दिनों के भीतर तीन हत्याओं ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है. इन घटनाओं में लगातार चाकू जैसे धारदार हथियारों का इस्तेमाल और कुछ मामलों में विधि-संघर्षित बालकों (नाबालिग आरोपियों) की संलिप्तता ने कानून-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
पुलिस आयुक्तालय के आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी से 8 सितंबर तक के 251 दिनों में शहर में हत्या के 35 प्रकरण दर्ज हुए हैं, जिनमें 36 लोगों की जान गई. मृतकों में दो युवतियां भी शामिल हैं. पिछले वर्ष इसी अवधि में हत्या के 28 मामले दर्ज हुए थे. यानी इस वर्ष हत्या की घटनाओं में सात मामलों की बढ़ोतरी हुई है. पूरे वर्ष 2025 में कुल 39 हत्याएं हुई थीं, जबकि इस वर्ष अभी साढ़े तीन महीने शेष रहते ही आंकड़ा 35 तक पहुंच गया है. ऐसे में वर्ष समाप्त होने तक हत्या का आंकड़ा 50 के करीब पहुंचने की आशंका जताई जा रही है.
* सात दिन, तीन हत्याएं और बढ़ता खौफ
शहर में रक्तरंजित घटनाओं की शुरुआत 3 सितंबर को रविनगर क्षेत्र में हुई, जहां एक कॉलेज छात्रा की दिनदहाड़े गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी गई. इस घटना ने पूरे शहर में आक्रोश की लहर पैदा कर दी. विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और नागरिक समूहों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किए तथा महिला सुरक्षा को लेकर प्रशासन से जवाब मांगा. इसके दो दिन बाद 5 सितंबर की रात एक युवक विशाल की चाकू मारकर हत्या कर दी गई. इस मामले में एक विधि-संघर्षित बालक की संलिप्तता सामने आने से नागरिकों की चिंता और बढ़ गई. इसके बाद 7 सितंबर की रात हैदरपुरा क्षेत्र में 22 वर्षीय मोहम्मद आदिल की चाकू और तलवार से हमला कर हत्या कर दी गई. लगातार तीन हत्याओं ने शहर में भय और असुरक्षा का माहौल पैदा कर दिया है.
* चाकू बने अपराधियों का सबसे आसान हथियार
हाल की अधिकांश हत्या और हत्या के प्रयास की घटनाओं में चाकू का इस्तेमाल सामने आया है. नागरिकों का कहना है कि धारदार हथियारों की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने से अपराधियों को आसानी से ऐसे हथियार उपलब्ध हो रहे हैं. यही कारण है कि छोटी-छोटी रंजिशें भी अब जानलेवा रूप ले रही हैं.
* हत्या के प्रयास के मामले भी बढ़े
हत्या के अलावा हत्या के प्रयास (हाफ मर्डर) की घटनाओं में भी वृद्धि दर्ज की गई है. 1 जनवरी से 8 सितंबर तक शहर में हत्या के प्रयास के 40 मामले दर्ज हुए हैं, जबकि पिछले वर्ष सितंबर अंत तक यह आंकड़ा 39 था. इससे स्पष्ट है कि गंभीर हिंसक अपराधों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है.
* गाडगेनगर और खोलापुरी गेट सबसे संवेदनशील
शहर के विभिन्न पुलिस थाना क्षेत्रों में दर्ज हत्या प्रकरणों के विश्लेषण में गाडगेनगर और खोलापुरी गेट क्षेत्र सबसे अधिक संवेदनशील बनकर उभरे हैं. इन दोनों थाना क्षेत्रों में हत्या की घटनाओं की संख्या अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक रही है. इसके अलावा फ्रेजरपुरा, राजापेठ, बडनेरा, वलगांव, नागपुरी गेट, कोतवाली, नांदगांव पेठ और भातकुली थाना क्षेत्र भी हत्या की घटनाओं से अछूते नहीं रहे.
* कानून-व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
लगातार बढ़ती हत्याओं, नाबालिग अपराधियों की संलिप्तता और धारदार हथियारों के खुले इस्तेमाल ने पुलिस और प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. नागरिकों का कहना है कि यदि समय रहते अपराधियों पर अंकुश लगाने के लिए विशेष अभियान नहीं चलाया गया तो शहर में भय का माहौल और गहरा सकता है. शहर में बढ़ती हिंसक वारदातों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमरावती वर्ष समाप्त होने से पहले हत्या के मामलों का नया रिकॉर्ड दर्ज करेगा, या फिर पुलिस अपराध नियंत्रण के लिए कोई प्रभावी रणनीति लागू कर हालात पर काबू पाएगी.





