इर्विन अस्पताल में मरीजों की पीड़ा बरकरार
बाप्पा आए, भीड़ घटी, लेकिन...

* ओपीडी में सन्नाटा, दवाओं का टोटा
* 15 दिनों से बंद सीटी स्कैन सेवा
* बुजुर्ग और गर्भवती मरीजों की बढ़ीं मुश्किलें
अमरावती/दि.15 – गणेशोत्सव के चलते जिला सामान्य अस्पताल (इर्विन) में सोमवार को मरीजों की भीड़ अपेक्षाकृत कम दिखाई दी, लेकिन अस्पताल की बदहाल व्यवस्थाओं ने एक बार फिर स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक तस्वीर उजागर कर दी. ओपीडी में भले ही सन्नाटा नजर आया, मगर दवाओं की कमी, बंद पड़ी सीटी स्कैन सेवा और विभिन्न विभागों के स्थानांतरण से मरीजों की परेशानियां कम होने के बजाय और बढ़ गई हैं. सोमवार सुबह 11 बजे अस्पताल के पर्ची काउंटर पर जहां सामान्य दिनों में लंबी कतारें लगी रहती हैं, वहीं इस दिन मुश्किल से एक-दो मरीज ही दिखाई दिए. विभिन्न ओपीडी कक्षों में भी गिने-चुने मरीज जांच के लिए पहुंचे थे. अधिकांश कक्षों में केवल सात से आठ मरीज ही डॉक्टरों से परामर्श लेते नजर आए. हालांकि भीड़ कम होने के बावजूद मरीजों को आवश्यक दवाएं नहीं मिल सकीं. कई मरीजों ने शिकायत की कि डॉक्टरों द्वारा लिखी गई सभी दवाएं अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं. एलर्जी से पीड़ित 70 वर्षीय धनराज ने बताया कि उन्हें कुछ दवाएं मिलीं, लेकिन पूरी दवा उपलब्ध नहीं कराई गई. वहीं एक अन्य मरीज को कफ सिरप नहीं होने की जानकारी दी गई.
* 15 दिनों से बंद है सीटी स्कैन सुविधा
अस्पताल में सबसे गंभीर समस्या मुफ्त सीटी स्कैन सेवा के बंद रहने की है. जानकारी के अनुसार बकाया भुगतान के कारण पिछले करीब पंद्रह दिनों से सीटी स्कैन सुविधा पूरी तरह ठप है. इससे गंभीर रोगों की जांच के लिए आने वाले गरीब और जरूरतमंद मरीजों को निजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है या बिना जांच के लौटना पड़ रहा है.
* ऑपरेशन थिएटर बंद, मरीजों को किया जा रहा रेफर
अस्थि रोग और सर्जरी विभाग की पुरानी इमारत तोड़े जाने की प्रक्रिया के कारण कई विभागों को अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किया गया है. इसके चलते नेत्र विभाग का ऑपरेशन थिएटर भी प्रभावित हुआ है. आंखों की सर्जरी के लिए आने वाले मरीजों को अब पीडीएमसी अस्पताल रेफर किया जा रहा है. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद निरवणे ने सोमवार दोपहर चिकित्सकों और कर्मचारियों की बैठक भी ली.
* सोनोग्राफी के लिए इंतजार करता रहा विषबाधा का मरीज
रविवार को विष सेवन के बाद भर्ती किए गए 30 वर्षीय प्रांजल सोनवणे नामक मरीज को सोमवार को सोनोग्राफी कराने के निर्देश दिए गए थे. नाक में ट्यूब और हाथ में सलाइन लगी होने के बावजूद वह जांच कक्ष के बाहर बेंच पर अकेला इंतजार करता दिखाई दिया. इस दृश्य ने अस्पताल में मरीजों की देखभाल व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए.
* सीढ़ियां चढ़ने को मजबूर बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं
इर्विन अस्पताल में नेत्र, जनरल सर्जरी, बाल रोग और स्त्री रोग विभागों की ओपीडी को पहली और दूसरी मंजिल पर स्थानांतरित कर दिया गया है. लिफ्ट की पर्याप्त सुविधा नहीं होने के कारण बुजुर्ग मरीजों, दिव्यांगों और गर्भवती महिलाओं को सीढ़ियां चढ़कर ओपीडी तक पहुंचना पड़ रहा है. कई मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा.
* त्योहार के बीच भी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
गणेशोत्सव के कारण अस्पताल में भीड़ भले कम रही हो, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं की खामियां पूरी तरह उजागर होती दिखीं. दवाओं की कमी, बंद सीटी स्कैन, प्रभावित ऑपरेशन थिएटर और मरीजों की बढ़ती परेशानियां यह संकेत दे रही हैं कि इर्विन अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं को लेकर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है. गरीब और ग्रामीण मरीजों के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले इस अस्पताल की व्यवस्था पर अब फिर सवाल खड़े होने लगे हैं.





