श्रीकृष्ण मंडल में विराजे त्रिशुंड गणपति
डॉ. देशमुख दंपत्ति ने की पूजा, आरती

* पदाधिकारियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति
अमरावती/दि.15– शहर के प्रसिद्ध गणेश मंडलों में गिने जाते और अपने संकल्प को पूर्ण करते हुए अष्टविनायक सहित अनेक प्रमुख गणपति मंदिरों के दर्शन करानेवाले श्रीकृष्ण गणेश मंडल में उत्सव हेतु पुणे के प्रसिद्ध त्रिशुंड गणपति के मंदिर को साकार किया गया है. सोमवार शाम पूर्व पालकमंत्री डॉ. सुनील देशमुख और डॉ. सोनाली देशमुख के हस्ते विधिवत पूजन कर त्रिशुंड गणपति की स्थापना की गई. इस समय जय देव जय देव जय मंगल मूर्ति और गणपति की प्रिय आरतीयों का घंटानाद के साथ गायन किया गया. मंडल के पदाधिकारियों की उत्साहपूर्ण उपस्थिति इस समय रही.
मंडल के मार्गदर्शक कोमल बोथरा, मिलिंद चिमोटे, राजेश अग्रवाल, मंगेश गुडधे, एड. सुनील पडोले, संतोष अग्रवाल, धीरेंद्र धामोरीकर, सोहन कलंत्री तथा पूजा समिति में गोपाल बियाणी, विजय डागा, गोपाल झंवर अध्यक्ष मोहित श्रॉफ, उपाध्यक्ष मोहित अग्रवाल, सचिव तनय नांगलिया, कोषाध्यक्ष यश राठी, सहसचिव ऋषि घाडगे, अनुराग बोबडे, सहकोषाध्यक्ष लवेश विश्वकर्मा तथा कार्यकारिणी सदस्यों में सीए श्रेणिक बोथरा, रोहन चिमोटे, साकेत मेहता, सागर खंडेलवाल, शिखर शर्मा, सौरभ दीक्षित, प्रज्योत मुंधडा, आनंद बजाज, ऋषभ साबद्रा, शिवानंद भोंगाडे आदि सहित महिला वर्ग की उत्साहपूर्ण उपस्थिति स्थापना आरती दौरान रही.
प्राचीन मंदिर की हूबहू झांकी
विलोभनीय मूर्ति के साथ ही प्राचीन मंदिर की हुबहू झांकी साकार किए जाने की जानकारी इस वर्ष के मंडल पदाधिकारियों ने दी. उन्होंने बताया कि, वरिष्ठ के मार्गदर्शन में गणेशोत्सव को शानदार, जोरदार, यादगार बनाने युवा टीम वरिष्ठों के मार्गदर्शन में प्रयासरत हैं. यहां गणेश स्थापना के अगले ही दिन अर्थात पंचमी को अथर्वशीर्ष का सामूहिक पाठ होता है. यह भी श्रीकृष्ण मंडल की विशेषता है.
* क्या हैं मंदिर का प्राचीन इतिहास
त्रिशुंड गणपति मंदिर महाराष्ट्र के पुणे शहर में सोमवार पेठ इलाके में स्थित एक ऐतिहासिक और बेहद दुर्लभ हिंदू मंदिर है. इस मंदिर का निर्माण कार्य 1754 में शुरू हुआ था और 1770 में पूरा हुआ. जिसे तपस्वी भीमगीरजी गोसावी ने बनवाया था. यहां भगवान गणेश की विश्व-प्रसिद्ध और अनोखी प्रतिमा स्थापित है.
* 67 वर्षों से स्थापना
शहर की कुलीन बस्ती श्रीकृष्णपेठ में गणेशोत्सव का यह 67 वां वर्ष रहने की जानकारी युवा पदाधिकारियों ने दी. उन्होंने बताया कि, अष्टविनायक के दर्शन समान त्रिशुंड गणपति मंदिर की एक-एक बात यहां साकार करने का प्रयास होगा. विशेषज्ञ कलाकारों के साथ मिलकर पदाधिकारी झांकी और दर्शन साकार कर रहे हैं. श्रीकृष्ण मंडल पर्यावरण संरक्षण को भी प्रोत्साहन देता आया है. परिसर के वरिष्ठ नागरिक भी मंडल के माननीय सभासद और मार्गदर्शक हैं. जिनमें अनेक गणमान्य शामिल हैं.





