77 वर्ष की प्रतीक्षा के बाद सिंधी समाज को मिला मालिकाना हक का अधिकार

अमरावती के सिंधी समाज के लिए ऐतिहासिक निर्णय

* संघर्ष की कई पीढ़ियों को मिला न्याय, पत्रवार्ता में बोले महापौर श्रीचंद तेजवानी
अमरावती/दि.21- देश विभाजन के बाद अपनी जन्मभूमि, घर, जमीन-जायदाद और व्यवसाय छोड़कर भारत आए सिंधी समाज के पुनर्वास और मालिकाना हक के लंबे संघर्ष को आखिरकार बड़ी सफलता मिली है. अमरावती में वर्षों से निवास कर रहे सिंधी परिवारों को उनकी रहवासी जमीनों पर मालिकाना हक मिलने का मार्ग प्रशस्त होने से समाज में उत्साह और संतोष का वातावरण है. यह जानकारी अमरावती के महापौर श्रीचंद तेजवानी ने पत्रकार परिषद में दी. उन्होंने कहा कि लगभग 77 वर्षों से लंबित सिंधी समाज के मालिकाना हक के प्रश्न के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है. इससे विभाजन की पीड़ा झेलकर भारत आए हजारों सिंधी परिवारों और उनकी आने वाली पीढ़ियों को न्याय मिलने का मार्ग खुला है.
पत्रकार परिषद में भाजपा शहराध्यक्ष डॉ. नितिन धांडे, भाजपा प्रदेश महासचिव व विधायक प्रवीण पोटे पाटिल, भाजपा प्रदेश सचिव जयंत डेहनकर, मनपा पक्षनेता चेतन गावंडे, प्रदेश प्रवक्ता शिवराय कुलकर्णी सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे. इस अवसर पर महापौर तेजवानी ने बताया कि 1947 में देश विभाजन के बाद पूरा सिंध प्रांत पाकिस्तान में चला गया. इसके कारण लाखों सिंधी परिवारों को अपना घर-बार, कृषि भूमि, संपत्ति और व्यवसाय छोड़कर भारत आना पड़ा. पुनर्वास के लिए उन्हें देश के विभिन्न राज्यों में उपलब्ध सरकारी अथवा खाली पड़ी जमीनों पर बसाया गया. समय के साथ अस्थायी शिविर स्थायी बस्तियों में बदल गए और कई पीढ़ियां वहीं बस गईं. हालांकि जिन जमीनों पर ये परिवार दशकों से रह रहे थे, उन पर स्थायी मालिकाना हक का प्रश्न लंबे समय तक अनसुलझा रहा. सिंधी समाज लगातार इस मांग को सरकार के समक्ष उठाता रहा.
महापौर श्रीचंद तेजवानी के मुताबिक, सिंधी समाज के प्रतिनिधियों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने वर्षों तक शासन स्तर पर इस विषय का पीछा किया. इस अभियान में नागपुर के नगरसेवक तथा महाराष्ट्र राज्य व्यापारी आघाड़ी के अध्यक्ष वीरेंद्र कुकरेजा ने विशेष भूमिका निभाई. उन्होंने सिंधी समाज के मालिकाना हक के मुद्दे को शासन के समक्ष लगातार उठाया और समाधान के लिए प्रयास किए. महापौर तेजवानी ने बताया कि 2014 के बाद केंद्र और राज्य स्तर पर इस विषय को नई गति मिली. इसके बाद विभिन्न स्तरों पर प्रक्रिया आगे बढ़ी और अंततः संबंधित जमीनों के मालिकाना हक का प्रस्ताव मंजूरी की दिशा में आगे बढ़ा.
इस पत्रवार्ता में महापौर श्रीचंद तेजवानी ने कहा कि यह निर्णय केवल जमीन का कानूनी अधिकार देने तक सीमित नहीं है, बल्कि विभाजन की पीड़ा सहने वाले समाज के संघर्ष को मिला सम्मान और न्याय है. उन्होंने कहा, विभाजन की वेदना लेकर भारत आए हमारे पूर्वजों ने जिन स्थानों पर नया जीवन शुरू किया, उन्हीं स्थानों के मालिकाना हक के लिए आने वाली पीढ़ियों को सात दशक से अधिक समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ी. आज का दिन सिंधी समाज के संघर्ष, सम्मान और न्याय का दिन है. अमरावती के सिंधी समाज के इतिहास में यह दिन स्वर्णाक्षरों में दर्ज किया जाएगा.
इस निर्णय के लिए महापौर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राजस्व मंत्री एवं अमरावती के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले के प्रति आभार व्यक्त किया. साथ ही इस विषय को लगातार शासन के समक्ष उठाने वाले वीरेंद्र कुकरेजा के प्रयासों की भी सराहना की. सिंधी समाज के प्रतिनिधियों का मानना है कि 77 वर्षों की प्रतीक्षा के बाद मालिकाना हक का मार्ग प्रशस्त होना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि विभाजन के बाद नई जिंदगी शुरू करने वाले लाखों सिंधी परिवारों की भावनाओं और संघर्षों को मिली ऐतिहासिक मान्यता है.

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