40 दिन के बारिश के खंड के बाद अब तेज धूप से सोयाबीन-कपास संकट में

चार दिन से बढ़े तापमान ने मिट्टी की नमी सुखाई

* सोयाबीन की फलियां भरने की प्रक्रिया प्रभावित
* कपास के पौधे भी मुरझाने लगे, किसान चिंता में
अमरावती/दि.23– मौसम की बेरुखी ने इस खरीफ सीजन में किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. जिले में करीब 40 दिनों के बारिश के खंड के बाद 10 और 11 सितंबर को हुई बारिश से खेतों में कुछ नमी लौटी थी, लेकिन पिछले चार दिनों से तेज धूप और बढ़ते तापमान ने यह नमी तेजी से सुखा दी है. इसका सीधा असर सोयाबीन, कपास और अन्य फसलों पर दिखाई दे रहा है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लंबे बारिश के खंड के कारण सोयाबीन उत्पादन में 40 से 50 प्रतिशत तक कमी की आशंका है.
सितंबर के शुरुआती दिनों में हुई बारिश से सोयाबीन, कपास और तुअर जैसी फसलों को कुछ राहत मिली थी. किसानों को उम्मीद थी कि अब फसल संभल जाएगी, लेकिन इसके बाद लगातार तेज धूप से खेतों की नमी फिर कम होने लगी. अमरावती में 21 सितंबर को अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था और 22 सितंबर को भी बारिश दर्ज नहीं हुई.
* सोयाबीन में दाना भरने पर असर
जमीन में पर्याप्त नमी नहीं रहने से सोयाबीन की फलियों में दाना भरने की प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है. जिन खेतों में पहले ही बारिश का अभाव रहा, वहां स्थिति अधिक गंभीर बताई जा रही है. कपास के पौधों की पत्तियां भी तेज गर्मी और नमी की कमी के कारण मुरझाने लगी हैं. किसानों का कहना है कि सितंबर की बारिश से मिली राहत कुछ ही दिनों में तेज धूप के कारण खत्म हो गई. जिला अधीक्षक कृषि अधिकारी राहुल सातपुते के अनुसार, इस वर्ष बारिश कम होने से मिट्टी में नमी पहले ही कम है. तापमान बढ़ने के कारण जमीन की बची हुई नमी तेजी से समाप्त हो रही है, जिससे फसलों की प्राकृतिक वृद्धि प्रभावित हो रही है.
* 24 से 26 सितंबर के बीच बारिश की उम्मीद
इस बीच किसानों को अगले कुछ दिनों में बारिश की उम्मीद है. मौसम विभाग के अमरावती पूर्वानुमान में 23 से 25 सितंबर तक गरज-चमक के साथ बारिश तथा 26 सितंबर को हल्की बारिश की संभावना जताई गई है. नागपुर क्षेत्रीय मौसम केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. प्रवीणकुमार के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के प्रभाव से विदर्भ के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना बनी है. अमरावती जिले में 24 से 26 सितंबर के दौरान अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना बताई गई है.
हालांकि किसानों का कहना है कि पिछले कई बार बारिश के पूर्वानुमान के बावजूद अपेक्षित बारिश नहीं हुई. इसलिए अब पूर्वानुमान से ज्यादा उन्हें खेत में वास्तविक बारिश का इंतजार है. किसानों को उम्मीद है कि यदि अगले कुछ दिनों में पर्याप्त बारिश होती है तो सोयाबीन की फलियों में दाना भरने और कपास की फसल को नमी मिलने से कुछ राहत मिल सकती है.

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