पुलिस का ‘डिजिटल कवच’; 7,200 अपराधियों की मैपिंग

10 साल के अपराध रिकॉर्ड का डिजिटल डेटाबेस तैयार

 एक क्लिक पर मिलेगी आरोपी की पूरी कुंडली
अमरावती/दि.29 – जिले में अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण और आपराधिक गतिविधियों की जांच को तेज करने के लिए ग्रामीण पुलिस ने तकनीक का सहारा लिया है. पुलिस अधीक्षक निकेतन कदम के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन कवच’ के तहत अमरावती ग्रामीण अपराध शाखा ने पिछले 10 वर्षों में पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज करीब 7,200 अपराधियों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया है. इस डेटा की गूगल मैपिंग भी की गई है, जिससे किसी अपराध की जांच के दौरान संदिग्धों की जानकारी महज एक क्लिक पर हासिल की जा सकेगी.

* 31 थानों के अपराधियों का रिकॉर्ड एक जगह
अमरावती जिले के 31 पुलिस थानों में वर्ष 2016 से 2026 तक दर्ज एफआईआर और उनमें शामिल आरोपियों की जानकारी को एकत्रित कर डिजिटल स्वरूप दिया गया है. इसमें गिरफ्तार आरोपियों के साथ-साथ उनके आपराधिक रिकॉर्ड को भी शामिल किया गया है. लोकल क्राइम ब्रांच के पुलिस निरीक्षक अशोक लांडे की मदद से तैयार किए गए इस सिस्टम में अपराधियों की जानकारी को उनके संबंधित क्षेत्रों के साथ मैप किया गया है.

* नाम से लेकर मोबाइल नंबर और रिश्तेदारों के पते तक
डिजिटल डेटाबेस में अपराधियों का नाम, स्थायी पता, रिश्तेदारों के पते, मोबाइल नंबर, जन्मतिथि, फोटो तथा उनके खिलाफ दर्ज मामलों और गिरफ्तारियों की जानकारी दर्ज की गई है. इससे किसी नए अपराध में मिले सीसीटीवी फुटेज, संदिग्ध के हुलिए या अन्य जानकारी के आधार पर पुराने अपराधियों के रिकॉर्ड को तुरंत खंगाला जा सकेगा.

* चोरी से गंभीर अपराध तक का डेटा
इस डिजिटल सिस्टम में वाहन चोरी, घरफोड़ चोरी, खेती में इस्तेमाल होने वाले सामान की चोरी, बस स्टैंड क्षेत्र में होने वाले अपराधों के साथ ही पार्ट-1 से पार्ट-5 तक के गंभीर अपराधों का डेटा भी शामिल किया गया है. पुलिस के मुताबिक अपराध के तरीके और संदिग्ध की जानकारी के आधार पर पुराने मामलों से उसका मिलान करने में इस सिस्टम से काफी मदद मिलेगी.

* डेटा की सुरक्षा पर विशेष ध्यान
पुलिस ने इस पूरे डेटाबेस को गोपनीय और सुरक्षित रखने की व्यवस्था की है. जानकारी तक सीधे पहुंच का अधिकार फिलहाल पुलिस अधीक्षक और एलसीबी प्रमुख तक सीमित रखा गया है. रोजाना दर्ज होने वाले नए अपराध और अपराधियों की जानकारी भी इस डेटाबेस में जोड़ी जा रही है.

* अन्य जिलों का डेटा भी जुटाया जाएगा
एलसीबी के मुताबिक आने वाले समय में आसपास के चार और जिलों के अपराधियों तथा अपराधों का डेटा भी एकत्रित करने की योजना है. इससे अंतर-जिला अपराधों की जांच में भी पुलिस को मदद मिलने की उम्मीद है. एलसीबी निरीक्षक अशोक लांडे ने बताया कि जिले के सभी 31 थानों में दर्ज एफआईआर और गिरफ्तार आरोपियों का डेटा एकत्र कर उसकी गूगल मैपिंग की गई है. इससे अपराधों के डिटेक्शन और संदिग्धों की पहचान की प्रक्रिया में तेजी आई है.

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