अब घर पर भी पढ़ाई की गारंटी, छात्रों को मिलेगा शैक्षणिक सामग्री का स्थायी लाभ

तीन साल से अधिक पुरानी सामग्री स्कूल में रखने के बजाय विद्यार्थियों को दी जाएगी

स्कूल प्रबंधन समिति करेगी निर्णय
अमरावती/दि.29 – सरकारी और स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के स्कूलों में विद्यार्थियों की बुनियादी शिक्षा को मजबूत करने के लिए अब स्कूलों में उपलब्ध पुरानी शैक्षणिक सामग्री का उपयोग घर पर भी किया जा सकेगा. तीन वर्ष से अधिक समय से स्कूलों में उपयोग की जा रही शैक्षणिक सामग्री, खिलौने, बेसिक लिटरेसी एंड न्यूमरेसी किट, मैजिक बॉक्स और अन्य पूरक शैक्षणिक सामग्री विद्यार्थियों से वापस नहीं ली जाएगी, बल्कि उन्हें घर पर स्व-अध्ययन के लिए स्थायी रूप से देने का निर्णय लिया गया है.
इस पहल का उद्देश्य विद्यार्थियों को स्कूल के साथ-साथ घर पर भी अभ्यास का अवसर उपलब्ध कराना और खेल-खेल में सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करना है.

* शिक्षक अभिभावकों से करेंगे संवाद
विद्यार्थियों को दी जाने वाली पूरक शैक्षणिक सामग्री का घर पर नियमित रूप से उपयोग हो, इसके लिए कक्षा शिक्षक अभिभावकों से संवाद करेंगे. शिक्षक अभिभावकों को सामग्री के उपयोग और बच्चों की पढ़ाई में इसके महत्व के बारे में मार्गदर्शन भी देंगे.

* स्कूल प्रबंधन समिति करेगी निर्णय
16 अप्रैल 2025 के शासन निर्णय के अनुसार गठित स्कूल प्रबंधन समिति को वर्ष 2015-16 से स्कूलों को उपलब्ध कराई गई शैक्षणिक सामग्री के निपटारे की जिम्मेदारी दी गई है. समिति सामग्री की स्थिति और उपयोगिता की जांच करने के बाद विद्यार्थियों को इसे उपलब्ध कराने का निर्णय लेगी.

* तीन साल बाद सामग्री का होगा आकलन
सरकारी और स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के स्कूलों को उपलब्ध कराई जाने वाली टिकाऊ शैक्षणिक सामग्री की सामान्यतः तीन वर्ष की उपयोग अवधि मानी जाएगी. अवधि पूरी होने के बाद सामग्री की स्थिति और उपयोगिता की जांच की जाएगी. अनुपयोगी अथवा निर्धारित अवधि पूरी कर चुकी सामग्री को नियमानुसार राइट ऑफ किया जाएगा.

* कौन-कौन सी सामग्री मिलेगी?
विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जाने वाली सामग्री में बेसिक लिटरेसी एंड न्यूमरेसी सेट, वर्कबुक तथा भाषा, गणित और विज्ञान विषयों की पूरक शैक्षणिक सामग्री शामिल है. विद्यार्थियों को यह सामग्री घर पर व्यक्तिगत स्व-अध्ययन के लिए उपयोग करने की अनुमति होगी.

* नई पाठ्यपुस्तकों के कारण पुरानी सामग्री का उपयोग
निपुण भारत मिशन, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और संशोधित राज्य पाठ्यचर्या के अनुरूप नई पाठ्यपुस्तकें तैयार की जा रही हैं. ऐसे में स्कूलों में उपलब्ध पुरानी पूरक शैक्षणिक सामग्री को लंबे समय तक भंडारित रखने के बजाय उसका उपयोग विद्यार्थियों के व्यक्तिगत अध्ययन के लिए करने का निर्णय लिया गया है. इससे विद्यार्थियों को स्कूल के बाद घर पर भी पढ़ाई और अभ्यास के लिए उपयोगी सामग्री उपलब्ध होगी तथा स्कूलों में अनुपयोगी सामग्री जमा होने की समस्या भी कम होगी.

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