तांबे के बर्तन में रखा पानी पीना कितना फायदेमंद?

‘डिटॉक्स’ करने के दावे पर विशेषज्ञों की सावधानी

तांबे का पानी किसी बीमारी का इलाज नहीं
अमरावती/दि.30 – प्लास्टिक के अधिक इस्तेमाल को लेकर स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं बढ़ने के साथ ही तांबे और पीतल जैसे धातु के बर्तनों का इस्तेमाल फिर बढ़ रहा है. तांबे के बर्तन में रातभर रखा पानी सुबह खाली पेट पीने की परंपरा भी कई घरों में आज तक जारी है. इसे लेकर शरीर से विषैले पदार्थ बाहर निकालने समेत कई स्वास्थ्य लाभों के दावे किए जाते हैं. हालांकि, इन दावों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझना जरूरी है.
* क्या तांबे का पानी शरीर को ‘डिटॉक्स’ करता है?
तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से शरीर ‘डिटॉक्स’ होने का दावा किया जाता है, लेकिन वास्तव में शरीर से अपशिष्ट और विषैले पदार्थ बाहर निकालने का मुख्य काम लिवर और किडनी करते हैं. इसलिए तांबे के पानी को शरीर का डिटॉक्स करने वाला इलाज मानना उचित नहीं है.
* क्या होते हैं फायदे?
तांबा शरीर के लिए आवश्यक सूक्ष्म खनिज है और शरीर में कई जैविक प्रक्रियाओं में इसकी भूमिका होती है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि तांबे के बर्तन में रखा पानी सभी स्वास्थ्य समस्याओं को दूर कर सकता है. तांबे के बर्तन में पानी रखने को किसी बीमारी के उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बर्तन साफ हो और उसका इस्तेमाल उचित तरीके से किया जाए. अत्यधिक मात्रा में तांबे का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है.
* इन लोगों को विशेष सावधानी जरूरी
लिवर या किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों, छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और नियमित रूप से दवाएं लेने वाले लोगों को तांबे का पानी नियमित रूप से पीने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.
* परंपरा के साथ विज्ञान भी जरूरी
भारतीय परंपरा में तांबे और पीतल के बर्तनों का विशेष महत्व रहा है. आज भी स्वास्थ्य लाभ से जुड़े दावों के कारण तांबे के बर्तन लोकप्रिय हैं. हालांकि, किसी भी धातु के बर्तन का इस्तेमाल स्वास्थ्य संबंधी उपचार का विकल्प नहीं है. तांबे के बर्तन में रखा पानी सीमित और उचित तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसे बीमारी का इलाज या शरीर को ‘डिटॉक्स’ करने का वैज्ञानिक उपाय नहीं समझना चाहिए. तांबे के बर्तन में पानी का इस्तेमाल कुछ परिस्थितियों में सीमित और सही तरीके से किया जा सकता है. हालांकि, इसे किसी बीमारी के इलाज के रूप में नहीं देखना चाहिए.

Back to top button