हिंदी पखवाड़ा महोत्सव में गूंजी साहित्य, संस्कृति और राष्ट्रभाषा की स्वरधारा

महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी और सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था के संयुक्त आयोजन में कवि सम्मेलन ने बांधा समां

अमरावती/दि.30– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई तथा सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था, अमरावती के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हिंदी पखवाड़ा महोत्सव साहित्य, भाषा और सांस्कृतिक चेतना का भव्य उत्सव बन गया. श्री मुंगसाजी सभागृह में आयोजित इस कार्यक्रम में राष्ट्रभाषा हिंदी की वर्तमान स्थिति, उसके भविष्य, अनुवाद की भूमिका तथा कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक प्रयोग पर सार्थक चर्चा हुई. वहीं कवि सम्मेलन में हास्य, श्रृंगार, सामाजिक सरोकार और संवेदनाओं से ओतप्रोत रचनाओं ने श्रोताओं को देर तक मंत्रमुग्ध बनाए रखा.
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानमंत्री राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के डॉ. हेमचंद वैद्य ने की. प्रमुख अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के पूर्व सदस्य भगवान वैद्य ‘प्रखर’ तथा यशवंत महाविद्यालय, वर्धा के हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. संजय धोटे उपस्थित रहे. अकादमी के प्रतिनिधि गुप्ता जी और कन्नौजिया जी के साथ संस्था के अध्यक्ष नरेंद्र देवरणकर ‘निर्दोष’ तथा सचिव बरखा शर्मा ‘क्रांति’ मंचासीन थे.
कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजन एवं अतिथियों के स्वागत से हुआ. इसके बाद अतुल सुंदरकर, सुरेश श्रीरामवार एवं बबन दारोकार की टीम ने वंदे मातरम् और राज्य गीत की सुमधुर प्रस्तुति देकर वातावरण को राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत कर दिया. संस्था के उपाध्यक्ष श्याम दम्मानी ’निलेश’ ने प्रस्तावना प्रस्तुत की. अपने संबोधन में डॉ. संजय धोटे ने राष्ट्रभाषा हिंदी की वर्तमान स्थिति और उसकी व्यापक संभावनाओं पर प्रकाश डाला. भगवान वैद्य ’प्रखर’ ने हिंदी के विकास में अनुवाद की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया. अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. हेमचंद वैद्य ने कार्यालयीन कार्यों में हिंदी के अधिकाधिक उपयोग की आवश्यकता पर बल दिया. अकादमी के प्रतिनिधि गुप्ता जी और कन्नौजिया जी ने सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था द्वारा किए जा रहे साहित्यिक कार्यों की सराहना की. संस्था के अध्यक्ष नरेंद्र देवरणकर ‘निर्दोष’ ने कहा कि वे तन, मन और धन से संस्था को समर्पित हैं तथा सप्तरंगी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प लेकर कार्य कर रहे हैं.
* कवि सम्मेलन में बही संवेदनाओं की सरिता
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण कवि सम्मेलन रहा, जिसका प्रभावी संचालन डॉ. ममता मेहता ने किया. प्रारंभ में सभी अतिथियों का शाल, पुष्पगुच्छ और स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया गया. डॉ. आशा पांडे ने बेटियों की सुरक्षा और सम्मान पर केंद्रित अपनी कविता से श्रोताओं को भावुक कर दिया. डॉ. रवींद्र सिरसाट की रचनाओं ने भी खूब सराहना बटोरी. नरेंद्र देवरणकर ‘निर्दोष’ ने अपनी गजल के माध्यम से बदलते सामाजिक मूल्यों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज रिश्तों से अधिक पैसों को महत्व दिया जा रहा है. बरखा शर्मा ‘क्रांति’ ने अपनी कविताओं से खूब वाहवाही लूटी, जबकि लक्ष्मीकांत खंडेलवाल ने बेटियों पर आधारित मार्मिक कविता प्रस्तुत की. राजा भाई धर्माधिकारी ने बचपन की स्मृतियों को जीवंत करते हुए अपनी कविता से श्रोताओं को भावविभोर कर दिया. शंकर भूतड़ा ने श्रृंगार रस से सराबोर रचनाओं का पाठ किया. श्याम दम्मानी ‘निलेश’ ने पारिवारिक मूल्यों और न्यायपूर्ण व्यवहार का संदेश देने वाली कविता प्रस्तुत की. नीलिमा भोजने ‘नीलम’ ने संवेदनशील काव्य पाठ से श्रोताओं का मन मोह लिया, वहीं चंद्रभूषण किल्लेदार ने नारी जीवन की पीड़ा और संघर्ष को अपनी कविता के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया.
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. हेमचंद वैद्य ने अपने समापन उद्बोधन में कहा कि रिश्तों को हर परिस्थिति में निभाने का प्रयास किया जाना चाहिए, क्योंकि रिश्ते जीवन की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं. कवि सम्मेलन के पश्चात राष्ट्रगीत के गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ. कार्यक्रम में संस्था के पदाधिकारी, साहित्यकार, कवि, हिंदी प्रेमी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे. खचाखच भरे सभागृह में देर तक साहित्यिक वातावरण बना रहा. आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम को मिली सफलता की गूंज मुंबई तक पहुंची है. कार्यक्रम को सफल बनाने में सप्तरंगी हिंदी साहित्य संस्था के पदाधिकारियों एवं सभी सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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